Gold Import from USA: भारत और अमेरिका के बीच हुए ऐतिहासिक अंतरिम व्यापार समझौते के बाद सरकार ने अपनी रणनीतिक प्राथमिकताओं में अहम बदलाव के संकेत दिए हैं। ऊर्जा क्षेत्र में सहयोग को मजबूत करने के बाद अब भारत ने संयुक्त अरब अमीरात पर निर्भरता घटाते हुए अमेरिका से सोना और चांदी जैसे कीमती धातुओं का आयात बढ़ाने का निर्णय लिया है। यह कदम व्यापार संतुलन, आपूर्ति विविधीकरण और घरेलू बाजार की स्थिरता को ध्यान में रखकर उठाया गया है।
सरकारी सूत्रों के अनुसार, अमेरिका वैश्विक स्तर पर कीमती धातुओं के प्रमुख व्यापारिक केंद्रों में शामिल है। वहां से कच्चे, रिफाइंड और स्क्रैप के रूप में बड़ी मात्रा में सोने और चांदी का निर्यात होता है। ऐसे में अमेरिका से आयात बढ़ाने से भारत को आपूर्ति के नए स्रोत मिलेंगे और एक ही क्षेत्र पर निर्भरता कम होगी।
आयात बास्केट में विविधता लाने की रणनीति
एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि इस नीति का मुख्य उद्देश्य भारत के आयात बास्केट को अधिक संतुलित और विविध बनाना है। अब तक सोने और चांदी के आयात में संयुक्त अरब अमीरात की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। लेकिन वैश्विक अनिश्चितताओं और आपूर्ति जोखिमों को देखते हुए भारत बहु-स्रोत रणनीति अपना रहा है।
READ MORE: मजबूत डॉलर और अमेरिकी आंकड़ों से सोना-चांदी की रफ्तार पर ब्रेक, बाजार में बढ़ी अस्थिरता
Gold Import from USA बदलाव से घरेलू सर्राफा बाजार में प्रतिस्पर्धा बढ़ने की उम्मीद है, जिससे कीमतों में स्थिरता आ सकती है। साथ ही, अमेरिका से बढ़ते आयात से दोनों देशों के बीच व्यापार असंतुलन को कम करने में भी मदद मिलेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम भारत-अमेरिका आर्थिक संबंधों को और गहरा करेगा।
कृषि क्षेत्र को नई दिशा
समझौते के तहत कृषि व्यापार भी चर्चा में है। वर्तमान में भारत अमेरिका को लगभग 2.8 अरब डॉलर का कृषि निर्यात करता है, जबकि वहां से 1.5 अरब डॉलर का आयात होता है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि अमेरिका से आने वाले कृषि उत्पादों को भारत के कड़े बायो-सिक्योरिटी मानकों का पालन करना होगा।
विशेष रूप से जेनेटिकली मॉडिफाइड (GM) खाद्य पदार्थों को अनुमति नहीं देने का रुख बरकरार रखा गया है। इससे भारतीय किसानों और उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा सुनिश्चित होगी। अधिकारियों का कहना है कि समझौता संतुलित है और घरेलू कृषि क्षेत्र पर प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा।
READ MORE: एंट्री-लेवल नौकरियों पर असर, रिपोर्ट में बड़ा खुलासा!
डेटा सेंटर उद्योग के लिए गेम-चेंजर
Gold Import from USA समझौता भारत के उभरते डेटा सेंटर उद्योग के लिए भी अहम माना जा रहा है। पहले एंटरप्राइज GPU सर्वर पर 20 से 28 प्रतिशत तक आयात शुल्क लगता था। अब शुल्क को तर्कसंगत बनाते हुए इसमें उल्लेखनीय कमी की गई है।
इससे GPU-रेडी डेटा सेंटर स्थापित करने की लागत में करीब 14 प्रतिशत की कमी आने का अनुमान है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे भारत डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर के क्षेत्र में सिंगापुर जैसे वैश्विक केंद्रों के साथ प्रतिस्पर्धा कर सकेगा। कम लागत और बेहतर तकनीकी पहुंच से विदेशी निवेश को भी प्रोत्साहन मिलेगा।
टैरिफ कटौती से निर्यातकों को बड़ी राहत
वर्ष 2024 में अमेरिका को भारत का कुल निर्यात 86.35 अरब डॉलर रहा। नए समझौते के तहत 30.94 अरब डॉलर मूल्य के भारतीय निर्यात पर प्रभावी शुल्क को 50 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत कर दिया गया है। इसके अलावा 10.03 अरब डॉलर के उत्पादों पर शुल्क को पूरी तरह समाप्त कर दिया गया है।
Latest News Update Uttar Pradesh News,उत्तराखंड की ताज़ा ख़बर
शुल्क में इस कमी से भारतीय कपड़ा, चमड़ा, रत्न एवं आभूषण, फार्मास्यूटिकल्स और मशीनरी क्षेत्र को अमेरिकी बाजार में प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त मिलेगी। निर्यातकों का मानना है कि इससे ऑर्डर बुक मजबूत होगी और उत्पादन क्षमता में विस्तार संभव होगा।
एमएसएमई और निवेश के लिए नए अवसर
Gold Import from USA समझौते का सकारात्मक प्रभाव सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSMEs) पर भी पड़ेगा। कम टैरिफ और बेहतर बाजार पहुंच से छोटे और मध्यम उद्यमों को अमेरिकी बाजार में अपनी उपस्थिति बढ़ाने का मौका मिलेगा। विशेषज्ञों का कहना है कि यह समझौता सिर्फ व्यापारिक आंकड़ों तक सीमित नहीं है, बल्कि तकनीक हस्तांतरण, निवेश और रोजगार सृजन के नए रास्ते खोलेगा।
Gold Import from USA समझौता दोनों देशों के आर्थिक संबंधों को नई ऊंचाई पर ले जाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। Gold Import from USA से लेकर कृषि और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर तक, इस समझौते के दूरगामी प्रभाव देखने को मिल सकते हैं।
पढ़े ताजा अपडेट: Hindi News, Today Hindi News, Breaking News



