Punjab Anti-Drug March: पंजाब के राज्यपाल गुलाबचंद कटारिया द्वारा शुरू की गई चार दिवसीय नशा विरोधी पदयात्रा (Punjab Anti-Drug March) ने राज्य की राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है। आधिकारिक तौर पर यह यात्रा पंजाब को नशे के दलदल से बाहर निकालने के संदेश के साथ शुरू की गई है, लेकिन इसमें शामिल हुए राजनीतिक चेहरों और धार्मिक हस्तियों ने इसे एक सियासी रंग दे दिया है। मंगलवार को फिरोजपुर में आयोजित पदयात्रा में शिरोमणि अकाली दल के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल, पंजाब बीजेपी के कार्यकारी अध्यक्ष अश्वनी शर्मा और डेरा राधा स्वामी सत्संग ब्यास के प्रमुख बाबा गुरिंदर सिंह ढिल्लों की मौजूदगी ने राजनीतिक गलियारों में कई सवाल खड़े कर दिए।
सभी दलों को न्योता, लेकिन AAP ने बनाई दूरी
राज्यपाल कार्यालय की ओर से स्पष्ट किया गया है कि इस नशा विरोधी अभियान में सभी राजनीतिक दलों को आमंत्रित किया गया था, ताकि इसे एक साझा सामाजिक आंदोलन बनाया जा सके। इसके बावजूद सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी (AAP) ने इस पदयात्रा से खुद को अलग रखा। पार्टी नेताओं का कहना है कि यह यात्रा नशे के खिलाफ कम और विपक्षी दलों को मंच देने का जरिया ज्यादा बन गई है।

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अकाली दल-बीजेपी गठबंधन की अटकलें तेज
सुखबीर सिंह बादल और अश्वनी शर्मा की एक साथ मौजूदगी ने आगामी विधानसभा चुनावों को लेकर नई चर्चाओं को जन्म दे दिया है। माना जा रहा है कि करीब एक दशक बाद शिरोमणि अकाली दल और बीजेपी फिर से गठबंधन की संभावनाएं टटोल रहे हैं। दोनों दलों के नेता भले ही सार्वजनिक रूप से इसे सामाजिक पहल बता रहे हों, लेकिन राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह मुलाकात चुनावी रणनीति का हिस्सा हो सकती है।
कांग्रेस का तंज – ‘समझौता एक्सप्रेस’
पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वडिंग ने इस पदयात्रा पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर सवाल उठाते हुए कहा कि यह नशा विरोधी यात्रा है या अकाली दल और बीजेपी के बीच समझौता कराने वाली ‘समझौता एक्सप्रेस’। वडिंग ने राज्यपाल से पूछा कि क्या उन्होंने नशे के मुद्दे पर केंद्रीय गृह मंत्रालय से कोई ठोस बातचीत की है, खासकर तब जब बीएसएफ का कार्यक्षेत्र अंतरराष्ट्रीय सीमा से 50 किलोमीटर तक बढ़ा दिया गया है। उनका कहना है कि अगर वास्तव में नशे के खिलाफ लड़ाई लड़नी है, तो केंद्र सरकार को सीमा पार (Punjab Anti-Drug March) से हो रही तस्करी पर जवाब देना होगा।
केंद्र और राज्य, दोनों पर उठे सवाल
कांग्रेस अध्यक्ष ने आगे कहा कि एक तरफ आम आदमी पार्टी सरकार राज्य में नशे पर प्रभावी नियंत्रण पाने में असफल रही है, वहीं दूसरी ओर केंद्र सरकार भी अपनी जिम्मेदारी से नहीं बच सकती। उन्होंने राज्यपाल से आग्रह किया कि राजनीतिक दलों में समझौता कराने के बजाय केंद्र से ठोस कार्रवाई की मांग करें।
AAP का आरोप – राजनीति से प्रेरित यात्रा
आम आदमी पार्टी के विधायक और पूर्व मंत्री कुलदीप सिंह धालीवाल ने इस पदयात्रा को पूरी तरह राजनीति से प्रेरित बताया है। उन्होंने आरोप लगाया कि पंजाब में नशे की जड़ें 2007 से 2017 के दौरान शिरोमणि अकाली दल-बीजेपी शासन में मजबूत हुईं और अब वही चेहरे इस यात्रा (Punjab Anti-Drug March) में शामिल होकर नैतिकता का पाठ पढ़ा रहे हैं।
यात्रा का मार्ग और आगे की रणनीति
राज्यपाल की यह चार दिवसीय नशा विरोधी पदयात्रा (Punjab Anti-Drug March) सोमवार को तरन तारन से शुरू हुई थी। यात्रा के दौरान तरन तारन, फिरोजपुर और फाजिल्का जैसे सीमावर्ती जिलों को कवर किया जा रहा है, जहां नशे की समस्या सबसे गंभीर मानी जाती है। राज्यपाल का कहना है कि यह अभियान जनता को जागरूक करने और सामाजिक दबाव बनाने की दिशा में एक कदम है।
नशा विरोध या चुनावी संकेत?
कुल मिलाकर, यह पदयात्रा जहां एक ओर नशे के खिलाफ सामाजिक संदेश देने का दावा कर रही है, वहीं दूसरी ओर इसने पंजाब की राजनीति में नए समीकरणों और संभावित गठबंधनों की चर्चा को हवा दे दी है। आने वाले दिनों में यह साफ हो जाएगा कि यह पहल वास्तव में सामाजिक आंदोलन बनती है या फिर चुनावी राजनीति का नया अध्याय।
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