Manipur Violence Erupts Again: पूर्वोत्तर भारत का संवेदनशील राज्य मणिपुर एक बार फिर हिंसा, भय और अनिश्चितता के अंधेरे में डूब गया है। लंबे समय से भीतर ही भीतर सुलग रहे जातीय और क्षेत्रीय तनाव ने अचानक विस्फोटक रूप ले लिया, जिससे राज्य के कई जिलों में हालात पूरी तरह बेकाबू हो गए। आगजनी, खुलेआम गोलीबारी और प्रशासनिक सख्ती ने मणिपुर को एक बार फिर राष्ट्रीय चिंता का विषय बना दिया है।
Manipur Violence Erupts Again: कैसे भड़की हिंसा? तनाव से तांडव तक की कहानी
प्रारंभिक रिपोर्ट्स के मुताबिक, दो समुदायों के बीच पैदा हुआ तनाव पहले स्थानीय विवाद तक सीमित था, लेकिन देखते ही देखते यह हिंसक झड़पों में बदल गया। अफवाहों, उकसावे और अविश्वास ने आग में घी का काम किया।
स्थिति इतनी तेजी से बिगड़ी कि स्थानीय प्रशासन और पुलिस को हालात संभालने में भारी मशक्कत करनी पड़ी। कई इलाकों में सुरक्षा बलों की मौजूदगी के बावजूद उग्र भीड़ हिंसा पर उतारू रही।
Manipur Violence Erupts Again: घरों में आग, सड़कों पर डर का साया
हिंसा का सबसे भयावह चेहरा तब सामने आया जब रिहायशी इलाकों को निशाना बनाया गया। उपद्रवियों ने घरों, दुकानों और वाहनों में आग लगा दी। चारों ओर धुएं के गुबार और आग की लपटों के बीच लोग अपनी जान बचाने के लिए घर छोड़कर भागने को मजबूर हो गए।
महिलाएं, बच्चे और बुजुर्ग रातों-रात बेघर हो गए। कई परिवारों ने खुले आसमान के नीचे रात बिताई, जबकि कुछ राहत शिविरों में शरण लेने को मजबूर हुए। मणिपुर की सड़कों पर इंसानियत की बेबसी साफ झलकने लगी।
Read : पूर्व सेना प्रमुख नरवणे की अप्रकाशित आत्मकथा लीक, दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने शुरू की जांच
Manipur Violence Erupts Again: अंधाधुंध फायरिंग से कांपा मणिपुर
इस हिंसा का सबसे खतरनाक पहलू रहा खुलेआम गोलीबारी। प्रत्यक्षदर्शियों का दावा है कि हमलावरों के पास अत्याधुनिक हथियार थे और वे बिना किसी डर के गोलियां चला रहे थे।
गोलीबारी के चलते लोग अपने ही घरों में कैद होकर रह गए। बाहर निकलना जान जोखिम में डालने जैसा था।
- स्कूल और कॉलेज बंद
- बाजारों पर ताले
- दफ्तरों में सन्नाटा
पूरे राज्य में सामान्य जनजीवन पूरी तरह ठप हो गया।
Manipur Violence Erupts Again: 5 दिनों के लिए इंटरनेट बंद, अफवाहों पर लगाम की कोशिश
हालात की गंभीरता को देखते हुए मणिपुर सरकार ने पूरे राज्य में 5 दिनों के लिए इंटरनेट सेवाएं बंद करने का फैसला लिया। प्रशासन का कहना है कि सोशल मीडिया पर फैलने वाली अफवाहें, भ्रामक वीडियो और उकसाऊ पोस्ट हिंसा को और भड़का सकती हैं।
हालांकि, इस फैसले का असर आम लोगों पर गहराई से पड़ा है –
- छात्रों की ऑनलाइन पढ़ाई ठप
- व्यापार और डिजिटल लेनदेन प्रभावित
- अपनों से संपर्क करना भी मुश्किल
इंटरनेट बंदी शांति के लिए जरूरी बताई जा रही है, लेकिन इसके सामाजिक और आर्थिक दुष्प्रभाव भी सामने आ रहे हैं।
Manipur Violence Erupts Again: सुरक्षा बल अलर्ट, फ्लैग मार्च और सख्त निगरानी
स्थिति पर नियंत्रण पाने के लिए सेना, असम राइफल्स, केंद्रीय बल और राज्य पुलिस को संवेदनशील इलाकों में तैनात किया गया है। कई क्षेत्रों में लगातार फ्लैग मार्च किए जा रहे हैं ताकि लोगों में सुरक्षा का भरोसा लौटाया जा सके।
ड्रोन, सीसीटीवी और अन्य निगरानी उपकरणों की मदद से प्रशासन हर गतिविधि पर नजर बनाए हुए है। अधिकारियों ने साफ कहा है कि कानून हाथ में लेने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होगी, चाहे वे किसी भी समुदाय से हों।
Latest News Update Uttar Pradesh News,उत्तराखंड की ताज़ा ख़बर
Manipur Violence Erupts Again: राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप तेज
मणिपुर हिंसा को लेकर सियासत भी गरमा गई है। विपक्षी दलों ने राज्य और केंद्र सरकार पर समय रहते हालात न संभाल पाने का आरोप लगाया है। वहीं सरकार का दावा है कि स्थिति धीरे-धीरे नियंत्रण में लाई जा रही है और शांति बहाली के लिए हर जरूरी कदम उठाया जा रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि सिर्फ सुरक्षा बलों की तैनाती से समस्या का स्थायी समाधान संभव नहीं है। संवाद, विश्वास बहाली और राजनीतिक इच्छाशक्ति ही मणिपुर को इस आग से बाहर निकाल सकती है।
Manipur Violence Erupts Again: आम लोगों का दर्द, सवाल वही – कब लौटेगी शांति?
इस पूरी हिंसा का सबसे बड़ा खामियाजा आम नागरिक भुगत रहे हैं। डर, असुरक्षा और अनिश्चितता के बीच जी रहे लोगों के सामने रोजमर्रा की जिंदगी भी चुनौती बन गई है। जरूरी सामान की किल्लत, बच्चों की पढ़ाई और भविष्य की चिंता हर सवाल अनुत्तरित है।
स्थानीय लोगों की आंखों में एक ही सवाल तैर रहा है, ‘क्या मणिपुर में फिर से शांति लौटेगी?’
पढ़े ताजा अपडेट: Hindi News, Today Hindi News, Breaking News



