व्हाइट हाउस की फैक्ट शीट में क्या कहा गया?
व्हाइट हाउस द्वारा जारी फैक्ट शीट के अनुसार, India US trade agreement समझौते की घोषणा की गई है। यह घोषणा अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से जारी एक संयुक्त बयान पर आधारित है, जो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ हालिया बातचीत के बाद सामने आया। फैक्ट शीट एक ऐसा दस्तावेज होता है, जिसमें किसी भी व्यापारिक समझौते या आर्थिक फैसले से जुड़ी जरूरी जानकारियां संक्षेप में दी जाती हैं।
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India US trade agreement के ढांचे पर बनी सहमति
फैक्ट शीट में बताया गया है कि दोनों नेताओं के बीच हुई बातचीत के बाद पारस्परिक व्यापार को लेकर एक अंतरिम India US trade agreement के ढांचे पर सहमति बनी है। इसके साथ ही, दोनों देशों ने एक व्यापक द्विपक्षीय व्यापार समझौते पर बातचीत जारी रखने की प्रतिबद्धता भी दोहराई है। इस बातचीत में टैरिफ कटौती, बाजार तक बेहतर पहुंच और व्यापारिक संतुलन जैसे मुद्दों को प्रमुखता से शामिल किया गया है।
अमेरिका ने टैरिफ को लेकर क्या फैसला लिया
अमेरिका की ओर से सबसे बड़ा ऐलान भारत पर लगाए गए अतिरिक्त 25 प्रतिशत टैरिफ को हटाने को लेकर किया गया है। इसके अलावा, भारत पर लागू रेसिप्रोकल टैरिफ को 25 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत करने का निर्णय लिया गया है। व्हाइट हाउस के मुताबिक, यह कदम भारत द्वारा कुछ नीतिगत प्रतिबद्धताओं के मद्देनजर उठाया गया है, जिससे दोनों देशों के बीच व्यापारिक असंतुलन को कम किया जा सके।
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समझौते के प्रमुख बिंदु क्या हैं?
इस India US trade agreement में कई अहम बिंदुओं को शामिल किया गया है। इसके तहत भारत कई अमेरिकी औद्योगिक उत्पादों के साथ-साथ कृषि और खाद्य उत्पादों पर लगाए गए टैरिफ को समाप्त या कम करेगा। इससे अमेरिकी कंपनियों और निर्यातकों को भारतीय बाजार में बेहतर अवसर मिलने की उम्मीद है।
अमेरिकी उत्पादों की बड़े पैमाने पर खरीद का संकल्प
फैक्ट शीट में यह भी उल्लेख किया गया है कि भारत ने अमेरिका से ऊर्जा, आईटी, कृषि उत्पाद, कोयला और अन्य वस्तुओं की बड़े पैमाने पर खरीद का संकल्प लिया है। माना जा रहा है कि इससे अमेरिका के निर्यात को बढ़ावा मिलेगा, वहीं भारत को भी अपनी ऊर्जा और तकनीकी जरूरतों को पूरा करने में मदद मिलेगी।
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नॉन-टैरिफ बैरियर्स और डिजिटल टैक्स पर बातचीत
दोनों देशों ने केवल टैरिफ ही नहीं, बल्कि नॉन-टैरिफ बैरियर्स को दूर करने पर भी मिलकर काम करने पर सहमति जताई है। इसके साथ ही डिजिटल सर्विस टैक्स को हटाने और डिजिटल व्यापार से जुड़े नियमों पर बातचीत की प्रतिबद्धता भी जताई गई है। यह कदम खास तौर पर अमेरिकी टेक कंपनियों के लिए अहम माना जा रहा है।
सप्लाई चेन और तकनीकी सहयोग पर जोर
India US trade agreement में सप्लाई चेन, तकनीक और निवेश के क्षेत्रों में आर्थिक सुरक्षा सहयोग बढ़ाने की बात भी कही गई है। दोनों देश चाहते हैं कि भविष्य में आपूर्ति श्रृंखला को अधिक भरोसेमंद और सुरक्षित बनाया जाए, ताकि वैश्विक स्तर पर किसी भी तरह की बाधा का असर कम हो।
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यह India US trade agreement क्यों है अहम?
व्हाइट हाउस का कहना है कि भारत में लंबे समय से अमेरिकी उत्पादों पर ऊंचे टैरिफ और सख्त नॉन-टैरिफ प्रतिबंध रहे हैं। इस अंतरिम समझौते का उद्देश्य अमेरिकी निर्यातकों के लिए भारतीय बाजार में बेहतर पहुंच सुनिश्चित करना, व्यापार में पारस्परिक संतुलन लाना और अनावश्यक बाधाओं को कम करना है।
आगे क्या होगा?
India US trade agreement फैक्ट शीट में यह भी स्पष्ट किया गया है कि आने वाले हफ्तों में इस ढांचे को लागू करने और अंतरिम समझौते को अंतिम रूप देने की दिशा में काम किया जाएगा। इसके बाद दोनों देश एक व्यापक India US trade agreement की ओर बढ़ सकते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह प्रक्रिया सफल रहती है, तो इससे न केवल दोनों देशों के व्यापारिक संबंध मजबूत होंगे, बल्कि वैश्विक व्यापार पर भी इसका सकारात्मक असर देखने को मिलेगा।
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