Mohan Bhagwat 75 Age Statement: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत एक बार फिर अपने बयान को लेकर सुर्खियों में हैं। लेकिन इस बार वजह कोई चुनावी भाषण, राजनीतिक टिप्पणी या वैचारिक टकराव नहीं, बल्कि 75 साल की उम्र और पद छोड़ने को लेकर दिया गया उनका साफ-सपाट जवाब है। मोहन भागवत ने कहा, ‘अगर RSS कहेगा, तो मैं पद छोड़ दूंगा।’
इतना सा वाक्य, लेकिन इसके सियासी मायने इतने गहरे हैं कि दिल्ली से लेकर राज्यों की राजनीति तक हलचल तेज हो गई है।
Mohan Bhagwat 75 Age Statement: 75 साल की उम्र क्यों है भारतीय राजनीति में इतना अहम?
भारतीय राजनीति में 75 साल की उम्र एक अनकही रेखा मानी जाती रही है। बीते वर्षों में कई बड़े और दिग्गज नेताओं को इस उम्र के आसपास सक्रिय भूमिकाओं से हटते देखा गया है।
- मार्गदर्शक मंडल
- संगठनात्मक जिम्मेदारियों से दूरी
- सत्ता से सम्मानजनक विदाई
इन सभी के साथ 75 साल की उम्र को जोड़कर देखा गया। यही वजह है कि जब RSS प्रमुख जैसे शीर्ष पद पर बैठे व्यक्ति से यह सवाल पूछा गया, तो उसका जवाब सामान्य नहीं रह गया।
Mohan Bhagwat 75 Age Statement: मोहन भागवत ने असल में क्या कहा?
मोहन भागवत ने अपने बयान में तीन बेहद अहम बातें स्पष्ट कीं –
- RSS में व्यक्ति नहीं, संगठन सर्वोपरि है
- कोई भी पद स्थायी नहीं होता
- फैसले संस्था लेती है, व्यक्ति नहीं
उन्होंने यह भी कहा कि RSS में जिम्मेदारियां उम्र के आधार पर नहीं, बल्कि संगठन की जरूरत और परिस्थिति के अनुसार तय होती हैं। यानी संदेश बिल्कुल साफ, ‘मैं पद से चिपका नहीं हूं, संघ जो कहेगा वही होगा।’
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Mohan Bhagwat 75 Age Statement: बयान के सियासी मायने क्या हैं?
यह बयान केवल RSS तक सीमित नहीं है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह टिप्पणी अप्रत्यक्ष रूप से BJP और उसके वरिष्ठ नेतृत्व से जुड़ी उम्र को लेकर चल रही बहसों से भी जुड़ती है। इस बयान के बाद कई सवाल फिर से चर्चा में आ गए –
- क्या 75 साल का नियम सभी पर समान रूप से लागू होगा?
- क्या नेतृत्व की क्षमता उम्र से तय की जानी चाहिए?
- क्या अनुभव और ऊर्जा के बीच संतुलन संभव है?
मोहन भागवत का बयान इन सवालों का सीधा जवाब नहीं देता, लेकिन संकेत बहुत स्पष्ट छोड़ जाता है।
Mohan Bhagwat 75 Age Statement: RSS की कार्यसंस्कृति – पद नहीं, परंपरा मायने रखती है
RSS की कार्यशैली भारतीय राजनीति और संगठनों से हमेशा अलग रही है। यहां –
- पद को सत्ता नहीं, सेवा माना जाता है
- उत्तराधिकारी तैयार करने की परंपरा मजबूत है
- व्यक्ति नहीं, विचारधारा केंद्र में रहती है
मोहन भागवत का यह बयान इसी सोच को दोहराता है। उन्होंने यह जताया कि संघ किसी एक चेहरे से नहीं, बल्कि निरंतरता, अनुशासन और विचार से चलता है।
Mohan Bhagwat 75 Age Statement: सोशल मीडिया पर क्यों मच गया बवाल?
बयान सामने आते ही सोशल मीडिया पर प्रतिक्रियाओं की बाढ़ आ गई –
- समर्थकों ने इसे विनम्रता और संगठनात्मक अनुशासन का उदाहरण बताया
- आलोचकों ने इसे राजनीतिक संदेश करार दिया
- कुछ लोगों ने इसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उम्र से जोड़कर देखा
- तो कुछ ने इसे RSS की आंतरिक लोकतांत्रिक प्रक्रिया का प्रमाण माना
ट्विटर, फेसबुक और व्हाट्सऐप पर यह बयान अलग-अलग संदर्भों में वायरल होने लगा।
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Mohan Bhagwat 75 Age Statement: क्या यह भविष्य के नेतृत्व का संकेत है?
विशेषज्ञों का मानना है कि यह बयान सिर्फ वर्तमान की बात नहीं करता, बल्कि भविष्य की राजनीति की दिशा भी इशारों में बता देता है।
- नेतृत्व का सवाल
- उम्र बनाम योग्यता
- संगठन बनाम व्यक्ति
इन सभी मुद्दों पर मोहन भागवत का यह बयान एक नई बहस को जन्म देता है।
Mohan Bhagwat 75 Age Statement: आगे क्या?
फिलहाल मोहन भागवत RSS प्रमुख बने रहेंगे या नहीं, यह फैसला भविष्य में संगठन करेगा। लेकिन एक बात तय है, यह बयान आने वाले समय में नेतृत्व, उम्र और सत्ता को लेकर होने वाली बहसों की दिशा तय कर सकता है। RSS प्रमुख का यह कथन केवल व्यक्तिगत राय नहीं, बल्कि संघ की सोच, परंपरा और अनुशासन को दर्शाता है।
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