Uttarakhand Cancer: कैंसर का नाम सुनते ही आमतौर पर लोगों के मन में डर और असहजता पैदा हो जाती है। यह बीमारी न केवल जानलेवा मानी जाती है, बल्कि समय पर पहचान और इलाज न होने पर इसके परिणाम बेहद गंभीर हो सकते हैं। यही कारण है कि हर साल 4 फरवरी को विश्व कैंसर दिवस मनाकर लोगों को इस बीमारी के प्रति जागरूक किया जाता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि कैंसर की पहचान शुरुआती चरण में हो जाए, तो इलाज की संभावना काफी बढ़ जाती है।
उत्तराखंड में तेजी से बढ़ रहे कैंसर के मामले
उत्तराखंड में बीते कुछ वर्षों के दौरान कैंसर मरीजों की संख्या में लगातार इजाफा देखने को मिला है। खासतौर पर पर्वतीय और दूरस्थ इलाकों से आने वाले मरीजों में यह Uttarakhand Cancer अधिक गंभीर रूप में सामने आ रही है। कई मरीज तब अस्पताल पहुंचते हैं, जब कैंसर दूसरे या तीसरे चरण में पहुंच चुका होता है, जिससे इलाज चुनौतीपूर्ण हो जाता है।
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Uttarakhand Cancer के मामलों को देखते हुए राज्य सरकार अब इस बीमारी को अधिसूचित रोग (Notified Disease) घोषित करने की दिशा में आगे बढ़ रही है। इसका उद्देश्य यह है कि सरकारी और निजी सभी स्वास्थ्य संस्थानों से कैंसर मरीजों से जुड़ा सटीक डेटा स्वास्थ्य विभाग के पास उपलब्ध हो सके।
गैर-संक्रामक रोगों में कैंसर सबसे खतरनाक
वर्तमान समय में गैर-संक्रामक रोग यानी नॉन कम्युनिकेबल डिजीज (NCD) सबसे ज्यादा मौतों का कारण बन रहे हैं। आंकड़ों के अनुसार, कुल मौतों में लगभग 63 प्रतिशत मौतें NCDs की वजह से होती हैं, जिनमें से करीब 9 प्रतिशत मौतें कैंसर के कारण होती हैं। इसी को देखते हुए केंद्र और राज्य सरकारें कैंसर की रोकथाम और जागरूकता पर विशेष ध्यान दे रही हैं।

सटीक आंकड़ों की कमी बनी बड़ी चुनौती
Uttarakhand Cancer अब तक अधिसूचित रोग नहीं होने के कारण स्वास्थ्य विभाग के पास मरीजों की पूरी और सटीक जानकारी उपलब्ध नहीं है। हालांकि, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) के तहत 30 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों की कम्युनिटी बेस्ड स्क्रीनिंग की जा रही है, ताकि बीमारी को समय रहते पहचाना जा सके।
तीन प्रमुख कैंसर की हो रही स्क्रीनिंग
राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत राज्य के 1,554 आरोग्य मंदिरों में ओरल कैंसर, ब्रेस्ट कैंसर और सर्वाइकल कैंसर की जांच की जा रही है।
- ओरल कैंसर के लिए लगभग 41 लाख से अधिक लोगों की स्क्रीनिंग का लक्ष्य रखा गया है, जिसमें से अब तक 30 लाख से ज्यादा लोगों की जांच हो चुकी है। इसमें 124 मामलों में कैंसर की पुष्टि हुई है।
- ब्रेस्ट कैंसर की जांच के दौरान लगभग 15 लाख महिलाओं की स्क्रीनिंग की गई, जिसमें 30 महिलाओं में कैंसर पाया गया।
- सर्वाइकल कैंसर की स्क्रीनिंग में भी 30 महिलाओं में कैंसर की पुष्टि हुई है।
दून मेडिकल कॉलेज में बढ़ता मरीजों का दबाव
राजकीय दून मेडिकल कॉलेज अस्पताल, देहरादून के रेडिएशन ऑन्कोलॉजी विभाग के अनुसार, यहां कैंसर मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है। पिछले पांच वर्षों में ओपीडी में 15 हजार से अधिक मरीज आए, जबकि तीन हजार से ज्यादा मरीजों को भर्ती कर इलाज किया गया।
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Uttarakhand Cancer को अधिसूचित रोग बनाने पर सरकार का जोर
स्वास्थ्य सचिव सचिन कुर्वे के अनुसार, कैंसर को अधिसूचित रोग घोषित करने की प्रक्रिया जल्द पूरी की जाएगी। इससे राज्य में कैंसर की वास्तविक स्थिति सामने आएगी और बेहतर स्वास्थ्य नीतियां बनाई जा सकेंगी। उन्होंने बताया कि स्वास्थ्य विभाग की एक टीम टाटा कैंसर इंस्टीट्यूट और नेशनल कैंसर इंस्टीट्यूट का अध्ययन करेगी, ताकि वहां विकसित सुविधाओं को उत्तराखंड में पीपीपी मॉडल के जरिए लागू किया जा सके।
महिलाओं में स्तन और सर्वाइकल कैंसर के ज्यादा मामले
दून मेडिकल कॉलेज अस्पताल के विशेषज्ञों के अनुसार, महिलाओं में स्तन और सर्वाइकल कैंसर के मामले सबसे अधिक सामने आ रहे हैं। पर्वतीय क्षेत्रों में जागरूकता की कमी इसकी एक बड़ी वजह मानी जा रही है। वहीं पुरुषों में मुंह, गला, फेफड़े और प्रोस्टेट कैंसर के मामले ज्यादा देखे जा रहे हैं।
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लाइफस्टाइल बना कैंसर का बड़ा कारण
Uttarakhand Cancer विशेषज्ञों का कहना है कि बदलती जीवनशैली, फास्ट फूड का बढ़ता सेवन, तंबाकू, शराब और धूम्रपान जैसी आदतें कैंसर के मामलों में वृद्धि का मुख्य कारण बन रही हैं। अब 40 से 60 वर्ष की उम्र के लोगों में भी कैंसर तेजी से सामने आ रहा है, जिसे ‘कैंसर ऑफ द यंग’ कहा जा रहा है।
जागरूकता ही है सबसे बड़ा बचाव
विशेषज्ञों का मानना है कि समय पर जांच, सही जानकारी और जागरूकता के जरिए कैंसर से होने वाली मौतों को काफी हद तक कम किया जा सकता है। सरकार और स्वास्थ्य विभाग की कोशिश है कि जल्द से जल्द कैंसर को अधिसूचित रोग बनाकर इस दिशा में ठोस कदम उठाए जाएं।
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