US shoots down Iranian drone: अरब सागर में हालात अचानक बेहद तनावपूर्ण हो गए हैं। अमेरिका ने दावा किया है कि उसने एक ईरानी ड्रोन को मार गिराया, जो सीधे अमेरिकी एयरक्राफ्ट कैरियर यूएसएस अब्राहम लिंकन की ओर बढ़ रहा था। यह घटना ऐसे समय सामने आई है जब पहले से ही मध्य पूर्व में हालात विस्फोटक बने हुए हैं और ईरान-अमेरिका के बीच तनातनी चरम पर है।
अमेरिकी रक्षा अधिकारियों के अनुसार, यह ड्रोन ‘शत्रुतापूर्ण इरादों’ के साथ USS लिंकन की ओर बढ़ रहा था, जिसके बाद सेल्फ-डिफेंस में कार्रवाई करते हुए उसे हवा में ही नष्ट कर दिया गया।
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क्या था पूरा मामला? जानिए ड्रोन हमले की इनसाइड स्टोरी
पेंटागन के सूत्रों के मुताबिक, अमेरिकी रडार सिस्टम ने अरब सागर में एक संदिग्ध ड्रोन की पहचान की। यह ड्रोन तेजी से USS लिंकन की ओर बढ़ रहा था, जो इस वक्त रणनीतिक मिशन के तहत तैनात है।
अमेरिकी नौसेना ने पहले चेतावनी दी, लेकिन जब ड्रोन ने रास्ता नहीं बदला, तो उसे एयर-डिफेंस सिस्टम के जरिए मार गिराया गया। इस कार्रवाई में किसी अमेरिकी जहाज या कर्मी को नुकसान नहीं पहुंचा।
हालांकि, ईरान की ओर से अब तक इस पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन क्षेत्रीय जानकार इसे जानबूझकर उकसावे की कार्रवाई बता रहे हैं।
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यूएसएस अब्राहम लिंकन क्यों है ईरान की आंखों में खटक?
यूएसएस अब्राहम लिंकन सिर्फ एक युद्धपोत नहीं, बल्कि अमेरिका की सैन्य ताकत का चलता-फिरता प्रतीक है। इस एयरक्राफ्ट कैरियर पर 80 से ज्यादा फाइटर जेट, हजारों प्रशिक्षित सैनिक और अत्याधुनिक मिसाइल डिफेंस सिस्टम मौजूद हैं।
ईरान पहले भी अमेरिकी नौसैनिक मौजूदगी को ‘क्षेत्रीय संप्रभुता के लिए खतरा’ बता चुका है। ऐसे में USS लिंकन की अरब सागर में तैनाती ईरान को सीधी चुनौती मानी जा रही है।
ड्रोन वारफेयर – क्यों बन चुका है नया युद्ध हथियार?
पिछले कुछ सालों में ड्रोन आधुनिक युद्ध का सबसे खतरनाक हथियार बन चुका है। कम लागत, लंबी दूरी और रडार से बच निकलने की क्षमता इसे बेहद घातक बनाती है।
ईरान ड्रोन तकनीक में लगातार निवेश कर रहा है। माना जाता है कि उसके पास आत्मघाती (Kamikaze) ड्रोन, निगरानी ड्रोन और मिसाइल-लेस ड्रोन का बड़ा बेड़ा है। अमेरिका और उसके सहयोगी देशों के लिए यही सबसे बड़ी चिंता है।
मध्य पूर्व में बढ़ता तनाव – क्या जंग तय है?
विशेषज्ञों का मानना है कि यह घटना अकेली नहीं है। हाल के महीनों में लाल सागर में हमले, अमेरिकी ठिकानों पर ड्रोन स्ट्राइक और इजरायल-ईरान टकराव जैसी घटनाएं लगातार बढ़ी हैं।
अगर इसी तरह जवाबी कार्रवाई होती रही, तो अरब सागर जल्द ही अंतरराष्ट्रीय संघर्ष का केंद्र बन सकता है।
भारत समेत दुनिया क्यों है चिंतित?
अरब सागर सिर्फ एक समुद्री क्षेत्र नहीं, बल्कि भारत का प्रमुख व्यापार मार्ग, तेल और गैस सप्लाई का रास्ता और अंतरराष्ट्रीय शिपिंग कॉरिडोर है।
यहां किसी भी तरह का युद्ध भारत, एशिया और यूरोप की अर्थव्यवस्था पर सीधा असर डाल सकता है। यही वजह है कि पूरी दुनिया इस घटना पर नजर बनाए हुए है।
आगे क्या? शांति या टकराव?
फिलहाल अमेरिका ने साफ किया है कि वह युद्ध नहीं चाहता, लेकिन अपने सैनिकों और जहाजों की सुरक्षा से कोई समझौता भी नहीं करेगा। वहीं ईरान की चुप्पी कई सवाल खड़े कर रही है।
क्या यह सिर्फ एक चेतावनी थी? या आने वाले दिनों में इससे बड़ा टकराव देखने को मिलेगा? अरब सागर में उठती यह लहरें पूरी दुनिया को हिला सकती हैं।
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