Rajasthan New Excise Policy: राजस्थान की भजनलाल शर्मा सरकार द्वारा नई आबकारी नीति (Rajasthan New Excise Policy) को मंजूरी मिलते ही राज्य की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। सरकार जहां इसे राजस्व बढ़ाने का व्यावहारिक कदम बता रही है, वहीं विपक्ष इसे सामाजिक सुरक्षा और कानून-व्यवस्था से जोड़कर बड़ा मुद्दा बना रहा है। दिलचस्प बात यह है कि शराब की दुकानों के समय में बदलाव से ज्यादा, इस फैसले पर हो रही सियासी बयानबाजी सुर्खियों में है।
क्या है नई आबकारी नीति का बड़ा बदलाव?
नई आबकारी नीति के तहत अब शराब की दुकानों के खुलने और बंद होने का समय तय करने का अधिकार आबकारी आयुक्त को दिया गया है। सरकार की मंशा है कि दुकानों के बंद होने का समय रात आठ बजे से बढ़ाकर दस बजे तक किया जाए। इसके साथ ही शराब की कीमतों में बढ़ोतरी का भी प्रस्ताव है। सरकार का तर्क है कि इससे अवैध शराब की बिक्री पर लगाम लगेगी और राज्य के राजस्व में इजाफा होगा, जिससे विकास योजनाओं को गति मिल सकेगी।
राजस्व बढ़ाने की जरूरत या मजबूरी?

वित्त विभाग की मंजूरी के बाद इस नीति पर सरकार की मुहर लग चुकी है। राजनीतिक गलियारों में इसे सरकार की ‘आर्थिक रणनीति’ बताया जा रहा है। माना जा रहा है कि बढ़ती योजनाओं और खर्चों के बीच सरकार अतिरिक्त आय के स्रोत तलाश रही है, और आबकारी राजस्व इसमें अहम भूमिका निभा सकता है। हालांकि विपक्ष का आरोप है कि यह कदम मजबूरी में उठाया गया है, न कि किसी दीर्घकालिक नीति के तहत।
अशोक गहलोत की आपत्ति: सुरक्षा और सामाजिक असर का मुद्दा
राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत, जो इन दिनों स्वास्थ्य कारणों से मुंबई में हैं, उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर इस फैसले पर कड़ी प्रतिक्रिया दी। गहलोत का कहना है कि देर रात तक शराब की दुकानें (Rajasthan New Excise Policy) खुली रहने से अपराधों में बढ़ोतरी हो सकती है और महिलाएं खुद को असुरक्षित महसूस करेंगी। उन्होंने इसे सामाजिक दृष्टि से गलत कदम बताते हुए सरकार से फैसले पर पुनर्विचार करने की मांग की।
कांग्रेस का हमला – ‘खजाना खाली, इसलिए शराब का सहारा’
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने सरकार पर सीधा हमला बोला। उनका आरोप है कि राज्य का खजाना खाली हो चुका है और कर्मचारियों के वेतन तक के लिए सरकार के पास पर्याप्त धन नहीं है। डोटासरा ने कहा कि शराब की बिक्री बढ़ाने के बजाय राज्य में पूर्ण शराबबंदी (Rajasthan New Excise Policy) पर विचार किया जाना चाहिए। उनके अनुसार यह समय राजस्व के नाम पर सामाजिक समझौतों का नहीं है।
सरकार का पलटवार – मुद्दे से ध्यान हटाने का आरोप
जब इस मुद्दे पर गृह राज्य मंत्री जवाहर सिंह बेडम से सवाल किया गया तो उन्होंने नीति के संभावित दुष्प्रभावों पर टिप्पणी करने के बजाय अशोक गहलोत पर राजनीतिक निशाना साधा। बेडम ने कहा कि गहलोत अपनी ही पार्टी में अलग-थलग पड़ चुके हैं और सुर्खियों में बने रहने के लिए इस तरह के बयान दे रहे हैं। वहीं कानून मंत्री जोगाराम पटेल भी इस मुद्दे पर स्पष्ट जवाब देने से बचते नजर आए।
नीति बनाम नैतिकता – आगे क्या?
नई आबकारी नीति (Rajasthan New Excise Policy) ने एक बार फिर यह बहस छेड़ दी है कि क्या राजस्व बढ़ाने के लिए सामाजिक जोखिम उठाना सही है। सरकार के सामने चुनौती है कि वह आर्थिक जरूरतों और सामाजिक संतुलन के बीच सही रास्ता चुने। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि सरकार इस फैसले पर अडिग रहती है या बढ़ते राजनीतिक और सामाजिक दबाव के चलते इसमें कोई बदलाव करती है।
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