Shankaracharya Avimukteshwaranand controversy : प्रयागराज में आयोजित माघ मेले के दौरान शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद और प्रशासन के बीच शुरू हुआ विवाद अब थमने के बजाय और गहराता जा रहा है। मौनी अमावस्या के दिन हुई कथित झड़प ने पूरे संत समाज और प्रशासनिक तंत्र को आमने-सामने ला खड़ा किया है। मामला अब सिर्फ धार्मिक आयोजन तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह कानूनी और संवैधानिक दायरे में प्रवेश कर चुका है।
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Shankaracharya Avimukteshwaranand controversy : मौनी अमावस्या की घटना से भड़का विवाद
बताया जा रहा है कि मौनी अमावस्या के दिन शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद और उनके शिष्यों के साथ कथित रूप से पुलिस द्वारा दुर्व्यवहार किया गया। इस घटना के बाद संत समाज में आक्रोश फैल गया और प्रशासन पर गंभीर सवाल उठने लगे। आरोप है कि आस्था और धार्मिक मर्यादाओं को नजरअंदाज किया गया, जिससे विवाद ने तूल पकड़ लिया।
Shankaracharya Avimukteshwaranand controversy : सुलह की कोशिश या महज अफवाह?
इसी बीच सूत्रों के हवाले से यह चर्चा सामने आई कि प्रशासन स्थिति को नियंत्रित करने के लिए शंकराचार्य को ससम्मान दोबारा संगम स्नान कराने की संभावनाएं तलाश रहा है। कहा जा रहा है कि टकराव से बचने और माहौल शांत करने के लिए बीच का रास्ता निकालने की कोशिशें हो रही हैं।
हालांकि प्रशासनिक अधिकारियों ने इन खबरों को पूरी तरह नकार दिया है। अधिकारियों का साफ कहना है कि न तो शंकराचार्य से दोबारा संपर्क किया गया है और न ही किसी तरह के विशेष स्नान प्रस्ताव पर विचार किया गया है। ऐसे में यह सवाल उठ रहा है कि जब आधिकारिक स्तर पर कोई पहल नहीं है, तो फिर सुलह की खबरें कहां से आ रही हैं।
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Shankaracharya Avimukteshwaranand controversy : हाईकोर्ट पहुंचा मामला, कानूनी लड़ाई शुरू
विवाद ने अब नया मोड़ ले लिया है। इलाहाबाद हाईकोर्ट में इस पूरे घटनाक्रम को लेकर लेटर पिटीशन दाखिल की गई है। यह याचिका अधिवक्ता गौरव द्विवेदी द्वारा प्रस्तुत की गई है, जिसमें पुलिस और प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं।
याचिका में कहा गया है कि संतों के साथ किया गया व्यवहार न सिर्फ धार्मिक भावनाओं को आहत करता है, बल्कि यह संविधान द्वारा प्रदत्त मौलिक अधिकारों का भी उल्लंघन है। याचिकाकर्ता ने इस मामले में न्यायालय से सख्त हस्तक्षेप की मांग की है।
Shankaracharya Avimukteshwaranand controversy : शंकराचार्य की तीन शर्तों ने बढ़ाया दबाव
इस विवाद के बीच शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद से जुड़ी तीन प्रमुख मांगें सामने आई हैं, जिन्हें लेकर प्रशासन की चिंता और बढ़ गई है।
1.दोषियों पर तत्काल कार्रवाई
मांग की गई है कि 18 जनवरी को बटुकों के साथ कथित मारपीट करने वाले पुलिसकर्मियों के खिलाफ तुरंत एफआईआर दर्ज की जाए। साथ ही इस मामले में जिम्मेदार वरिष्ठ अधिकारियों को निलंबित किया जाए, ताकि प्रशासनिक जवाबदेही तय हो सके।
2.CBI से जांच
पूरे प्रकरण की निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच के लिए इस मामले को सीबीआई को सौंपने की मांग की गई है। याचिका में तर्क दिया गया है कि स्थानीय स्तर पर जांच होने से निष्पक्षता पर सवाल उठ सकते हैं।
3.स्थायी स्नान प्रोटोकॉल
तीसरी और दीर्घकालिक मांग यह है कि चारों शंकराचार्यों के लिए संगम स्नान का एक स्थायी SOP तैयार किया जाए। इससे भविष्य में किसी भी प्रकार की अव्यवस्था, टकराव या अपमानजनक स्थिति से बचा जा सके।
Shankaracharya Avimukteshwaranand controversy : संत समाज में उबाल, चेतावनी के सुर
घटना के बाद से संत समाज में गहरी नाराजगी देखने को मिल रही है। कई संत संगठनों ने प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा है कि यदि समय रहते समाधान नहीं निकाला गया, तो आंदोलन जैसी स्थिति भी बन सकती है।
संतों का कहना है कि माघ मेला केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि करोड़ों लोगों की आस्था से जुड़ा पवित्र पर्व है, जहां संतों के सम्मान से किसी भी कीमत पर समझौता नहीं होना चाहिए।
Shankaracharya Avimukteshwaranand controversy: आगे की राह क्या?
अब सबकी नजरें इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले पर टिकी हैं। क्या कोर्ट दोषी अधिकारियों के खिलाफ सख्त कदम उठाने का निर्देश देगा? क्या प्रशासन और संत समाज के बीच संवाद का कोई रास्ता निकलेगा? और क्या भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए कोई ठोस व्यवस्था बनेगी?
फिलहाल, यह मामला आस्था, प्रशासन और न्याय के बीच संतुलन की एक बड़ी परीक्षा बन चुका है। आने वाले दिनों में यह साफ हो जाएगा कि यह विवाद सुलह की ओर बढ़ता है या फिर और गहराता है।
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