Nanda Devi Yatra: विश्व प्रसिद्ध Nanda Devi Yatra को लेकर पिछले कुछ दिनों से चल रही असमंजस और स्थगन की चर्चाओं पर नंदानगर में आयोजित महापंचायत ने पूर्ण विराम लगा दिया है। चमोली जिले के नंदानगर में हुई इस महापंचायत में सर्वसम्मति से यह निर्णय लिया गया कि वर्ष 2026 में यात्रा हर हाल में आयोजित की जाएगी। इसके साथ ही यह भी तय किया गया कि इस ऐतिहासिक धार्मिक यात्रा को अब ‘नंदा राजजात’ नहीं, बल्कि ‘नंदा की बड़ी जात (ठुलि जात)’ के नाम से जाना जाएगा। पंचायत में शामिल लोगों ने स्पष्ट कहा कि सदियों पुरानी इस परंपरा से किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार्य नहीं होगा।
परंपरागत समय पर ही होगा आयोजन
महापंचायत में साफ तौर पर कहा गया कि नंदा की बड़ी जात का आयोजन परंपरा के अनुसार अगस्त–सितंबर माह में ही किया जाएगा। Nanda Devi Yatra को स्थगित किए जाने की चर्चाओं को पूरी तरह खारिज करते हुए ग्रामीणों, हक- हकूकधारियों, जनप्रतिनिधियों और मंदिर समितियों ने एक स्वर में कहा कि यह यात्रा केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि लोक आस्था, संस्कृति और परंपराओं का प्रतीक है, जिसे पूरी श्रद्धा और मर्यादा के साथ संपन्न किया जाएगा।
नंदानगर ब्लॉक सभागार में जुटी बड़ी संख्या में जनता
19 जनवरी को नंदानगर के ब्लॉक सभागार में आयोजित महापंचायत में मां नंदा के प्रति आस्था रखने वाले श्रद्धालुओं की बड़ी मौजूदगी देखने को मिली। इसमें स्थानीय ग्रामीण, महिलाएं, धर्माचार्य, सामाजिक कार्यकर्ता और जनप्रतिनिधि शामिल हुए। बैठक के दौरान यात्रा के नाम, स्वरूप, आयोजन की तिथि और व्यवस्थाओं को लेकर विस्तृत चर्चा की गई। सभी ने इस बात पर सहमति जताई कि यात्रा को किसी भी तरह की राजनीति या बाहरी हस्तक्षेप से दूर रखा जाना चाहिए।
बसंत पंचमी पर निकलेगा बड़ी जात का मुहूर्त
महापंचायत में यह निर्णय भी लिया गया कि आगामी 23 जनवरी को बसंत पंचमी के पावन अवसर पर सिद्धपीठ नंदा देवी मंदिर कुरुड़ में विधिवत पूजा-अर्चना के साथ ‘नंदा की बड़ी जात’ का मुहूर्त निकाला जाएगा। इसी दिन दिनपटा निकाला जाएगा, जिसे यात्रा की औपचारिक शुरुआत माना जाता है। यात्रा को लोक परंपराओं और धार्मिक मान्यताओं के अनुरूप भव्य और सुव्यवस्थित ढंग से संपन्न कराने पर सभी ने सहमति जताई।
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Nanda Devi Yatra आयोजन के लिए समिति गठित
बड़ी जात यात्रा के सफल संचालन और व्यवस्थाओं को समय पर पूरा करने के लिए महापंचायत में एक समिति के गठन का फैसला भी लिया गया। सर्वसम्मति से सेवानिवृत्त कर्नल हरेंद्र सिंह रावत को समिति का अध्यक्ष चुना गया। पंचायत में कहा गया कि यह समिति Nanda Devi Yatra से जुड़ी सभी तैयारियों, व्यवस्थाओं और समन्वय का कार्य करेगी, ताकि आयोजन में किसी भी प्रकार की अव्यवस्था न हो और परंपराओं की गरिमा बनी रहे।
‘यह हमारी सांस्कृतिक पहचान है’
कुरुड़ मंदिर समिति के अध्यक्ष सुखवीर रौतेला ने कहा कि यह महापंचायत सभी वर्गों की सहमति के बाद बुलाई गई थी। उन्होंने कहा कि नंदा की बड़ी जात केवल एक धार्मिक यात्रा नहीं है, बल्कि यह पूरे क्षेत्र की सांस्कृतिक पहचान, लोक परंपराओं और सामूहिक आस्था का जीवंत प्रतीक है। इसे किसी भी सूरत में कमजोर नहीं होने दिया जाएगा।
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राजनीति से दूर रखने की मांग
महापंचायत में मौजूद वक्ताओं ने यह भी स्पष्ट किया कि Nanda Devi Yatra को किसी भी प्रकार की राजनीति या राजशाही प्रभाव से मुक्त रखा जाना चाहिए। समिति अध्यक्ष सेवानिवृत्त कर्नल हरेंद्र सिंह रावत ने कहा कि यह यात्रा विशुद्ध रूप से लोक आस्था और परंपरा से जुड़ी हुई है, जिसे जनविश्वास के आधार पर ही संचालित किया जाना चाहिए।
स्थगन के फैसले को बताया व्यक्तिगत राय
महापंचायत में हाल ही में सामने आए Nanda Devi Yatra स्थगन के फैसले पर भी चर्चा हुई। पंचायत ने स्पष्ट किया कि एक एनजीओ द्वारा लिया गया यह निर्णय उसका व्यक्तिगत विचार था, जिससे व्यापक समाज सहमत नहीं है। पंचायत ने उस फैसले को पूरी तरह खारिज करते हुए दो टूक कहा कि नंदा देवी की बड़ी जात होकर रहेगी।
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2027 की घोषणा से पैदा हुआ था विवाद
गौरतलब है कि 18 जनवरी को श्री नंदा राजजात समिति नौटी ने 2026 की यात्रा को स्थगित कर 2027 में कराने की घोषणा की थी। समिति का तर्क था कि उच्च हिमालयी क्षेत्रों में आवश्यक कार्य समय पर पूरे नहीं हो पाए हैं और सितंबर के दौरान बर्फबारी व प्रतिकूल मौसम की संभावना रहती है। इसी घोषणा के बाद क्षेत्र में असंतोष और विवाद की स्थिति बनी, जिसके चलते नंदानगर में महापंचायत आयोजित की गई।
महापंचायत का स्पष्ट संदेश
महापंचायत ने साफ संदेश दिया है कि Nanda Devi Yatra वर्ष 2026 में परंपरागत समय, मूल भावना और लोक आस्था के अनुरूप आयोजित की जाएगी। इसे लेकर अब किसी भी तरह की अनिश्चितता या भ्रम की कोई गुंजाइश नहीं छोड़ी गई है।



