Magh Bihu Festival Assam: भारत में जनवरी का महीना आस्था, संस्कृति और उत्सवों से भरा होता है। मकर संक्रांति के ठीक एक दिन बाद असम में जिस पर्व की धूम मचती है, वह है माघ बिहू, जिसे भोगली बिहू भी कहा जाता है। वर्ष 2026 में यह पर्व 15 जनवरी को मनाया जाएगा। माघ बिहू केवल एक त्योहार नहीं, बल्कि असमिया जीवनशैली, खेती और प्रकृति के प्रति कृतज्ञता का जीवंत उत्सव है।
Magh Bihu Festival Assam: क्या है माघ बिहू या भोगली बिहू का अर्थ?
असम में साल भर में तीन बिहू यानी रोंगाली, कोंगाली और माघ बिहू मनाए जाते हैं। इनमें माघ बिहू का संबंध सीधे भोग-विलास और आनंद से है। ‘भोगली’ शब्द का अर्थ ही होता है, खाने-पीने और खुशियां मनाने का पर्व। इस समय तक खेतों की फसल कट चुकी होती है, घरों में अनाज भरा होता है और किसान साल भर की मेहनत का उत्सव मनाते हैं।
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Magh Bihu Festival Assam: उरुका की रात – जब गांव बन जाता है एक परिवार
माघ बिहू से ठीक एक दिन पहले की रात को उरुका कहा जाता है। यह रात पूरे त्योहार की जान होती है।
• भेलाघर बनाने की परंपरा: गांव के लोग मिलकर खेतों में बांस, पुआल और लकड़ी से एक अस्थायी झोपड़ी बनाते हैं, जिसे भेलाघर कहा जाता है। यह सामूहिक एकता और सहयोग का प्रतीक होता है।
• सामूहिक भोज और मस्ती: उरुका की रात सभी लोग भेलाघर में एक साथ खाना बनाते और खाते हैं। मछली, मांस, चावल से बने व्यंजन और स्थानीय पकवानों की खुशबू पूरे माहौल को उत्सवमय बना देती है।
• लोक संगीत और बिहू नृत्य: रात भर ढोल, पेपा और गोगोना की थाप पर लोग लोकगीत गाते हैं और पारंपरिक बिहू नृत्य करते हैं। यह रात हंसी, संगीत और मेल-मिलाप की होती है।
Magh Bihu Festival Assam: माघ बिहू की सुबह – अग्नि देव को समर्पित पर्व
माघ बिहू की असली शुरुआत अगले दिन सुबह होती है। लोग सूर्योदय से पहले स्नान कर पवित्र होकर मेजी के पास इकट्ठा होते हैं।
• मेजी क्या है और इसका महत्व: मेजी बांस, लकड़ी और पत्तों से बनी एक ऊंची संरचना होती है, जिसे मंदिर जैसा पवित्र माना जाता है। सुबह-सुबह इसमें अग्नि प्रज्वलित की जाती है।
• अग्नि पूजा और भोग: नई फसल से बने पीठा, चावल के लड्डू, तिल, जलपान और अन्य पकवान अग्नि देव को अर्पित किए जाते हैं। यह पूजा सुख-समृद्धि और अच्छी फसल की कामना के लिए की जाती है।
• राख का धार्मिक महत्व: मेजी जलने के बाद उसकी राख को खेतों में डाला जाता है। मान्यता है कि इससे भूमि उपजाऊ होती है और आने वाली फसल अच्छी होती है।
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Magh Bihu Festival Assam: माघ बिहू के खास पकवान
माघ बिहू खाने-पीने के बिना अधूरा ह। इस पर्व पर बनने वाले पारंपरिक व्यंजन असमिया संस्कृति की पहचान हैं
• तिल पीठा
• नारियल पीठा
• सुतुली पीठा
• लारू (चावल और गुड़ से बने लड्डू)
• जलपान और चिवड़ा
इन व्यंजनों का स्वाद केवल पेट ही नहीं, दिल भी भर देता है।
Magh Bihu Festival Assam: पशुओं का सम्मान – प्रकृति से जुड़ाव की मिसाल
असमिया समाज में खेती और पशुओं का गहरा संबंध है। माघ बिहू के दिन गायों और बैलों को नहलाया जाता है, उन्हें तिलक लगाया जाता है और अच्छा भोजन दिया जाता है। यह उनकी मेहनत और योगदान के प्रति आभार प्रकट करने का तरीका है।
Magh Bihu Festival Assam: क्यों खास है माघ बिहू आज के समय में?
आज जब आधुनिक जीवनशैली हमें प्रकृति से दूर कर रही है, माघ बिहू हमें याद दिलाता है कि हमारी जड़ें मिट्टी, खेती और सामूहिक जीवन में हैं। यह पर्व सिखाता है कि खुशी केवल भोग में नहीं, बल्कि मिल-बांटकर जीने में है।
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