Zepto Delivery Boy Beaten: दिल्ली के न्यू अशोक नगर से एक ऐसी घटना सामने आई है जो सिर्फ एक डिलीवरी बॉय की पिटाई की कहानी नहीं है, बल्कि गिग वर्कर्स के साथ रोज होने वाली बेइज्जती का एक डरावना उदाहरण है। जेप्टो जैसे एक बड़े फास्ट-कॉमर्स ब्रांड के स्टोर पर काम करने वाले एक डिलीवरी बॉय को ‘मुर्गे’ की तरह खड़ा करके पीटा गया सिर्फ इसलिए क्योंकि उसने परफ्यूम इस्तेमाल किया था।
सोचिए 2025 का भारत, डिजिटल इंडिया, स्टार्टअप क्रांति और यहां एक वर्कर के साथ जानवर जैसा बर्ताव किया जा रहा है।
Zepto Delivery Boy Beaten: क्या थी डिलीवरी बॉय ऋषभ कुमार की गलती?
पीड़ित का नाम ऋषभ कुमार है, जो ईस्ट दिल्ली के ओल्ड कोंडली इलाके का रहने वाला है। ऋषभ जेप्टो के लिए डिलीवरी बॉय का काम करता है। घटना वाले दिन, वह एक ऑर्डर लेने के लिए स्टोर पर आया था। उसने स्टोर के अंदर से एक परफ्यूम की बोतल उठाई और खुद पर स्प्रे कर लिया।
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Zepto Delivery Boy Beaten: बहस परफ्यूम को लेकर शुरू हुई और मारपीट पर हुई खत्म
जब स्टोर के कुछ कर्मचारियों ने ऋषभ को परफ्यूम लगाते देखा, तो पहले तो उनकी उससे बहस हुई। बहस जल्द ही गाली-गलौज और फिर मारपीट में बदल गई।
कहा जा रहा है कि, स्टोर ऑपरेटर और स्टाफ ने मिलकर ऋषभ को मुर्गे की तरह खड़ा किया, उसके हाथ घुटनों के नीचे बांध दिए और फिर उसे बुरी तरह पीटा। यह सिर्फ मारपीट नहीं थी, बल्कि सबके सामने बेइज्जती थी।
Zepto Delivery Boy Beaten: CCTV फुटेज से सच सामने आया
पूरी घटना का CCTV फुटेज सामने आया है और सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो में साफ दिख रहा है कि ऋषभ को कर्मचारियों ने घेर लिया है और मुर्गे की तरह खड़ा कर दिया है।
CCTV फुटेज ने एक बार फिर सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या गिग वर्कर्स की कोई इज्जत नहीं है, कोई सिक्योरिटी नहीं है?
Zepto Delivery Boy Beaten: पुलिस एक्शन – FIR दर्ज, जांच जारी
घटना के बाद, ऋषभ कुमार ने अशोक नगर पुलिस स्टेशन में लिखित शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने मामले में FIR दर्ज कर ली है और CCTV फुटेज के आधार पर जांच शुरू कर दी है। इंडियन पीनल कोड (IPC) की कई धाराएं लगाई जा सकती हैं, जिनमें मारपीट, क्रिमिनल इंटिमिडेशन और गैर-कानूनी तरीके से रोकना शामिल है।
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Zepto Delivery Boy Beaten: जेप्टो जैसे ब्रांड के लिए एक बड़ा सवाल
अगर जेप्टो जैसे यूनिकॉर्न स्टार्टअप के स्टोर में काम करने वालों के साथ ऐसा कुछ होता है, जो कुछ ही मिनटों में डिलीवरी का वादा करता है, तो कौन जिम्मेदार होगा? क्या कंपनी की पॉलिसी सिर्फ कस्टमर्स के लिए हैं? क्या डिलीवरी पार्टनर सिर्फ दबाव, टारगेटिंग और गलत इस्तेमाल के शिकार होते हैं?
अगर परफ्यूम लगाना इतना बड़ा जुर्म था, तो क्या चेतावनी या सैलरी में कटौती का ऑप्शन नहीं था?
Zepto Delivery Boy Beaten: गिग वर्कर्स का कड़वा सच
यह घटना सिर्फ ऋषभ की कहानी नहीं है। यह हर उस डिलीवरी बॉय की कहानी है जो कम सैलरी पर काम करता है। रोज गाली-गलौज सुनता है। जॉब की कोई सिक्योरिटी नहीं है और गलती करने पर, उसके साथ इंसान नहीं, बल्कि गुलाम जैसा बर्ताव किया जाता है।
सरकार गिग वर्कर्स के लिए कानून बनाने की बात करती है, लेकिन जमीनी हकीकत अभी भी डरावनी है।
Zepto Delivery Boy Beaten: सोशल मीडिया पर गुस्सा और सपोर्ट
जैसे ही वीडियो वायरल हुआ, सोशल मीडिया पर लोगों का गुस्सा फूट पड़ा।
#JusticeForRishabh और #GigWorkersRights जैसे हैशटैग ट्रेंड करने लगे। लोग ये सवाल पूछ रहे हैं कि, क्या स्टोर के कर्मचारियों के खिलाफ तुरंत एक्शन लिया जाएगा? क्या जेप्टो सबके सामने माफी मांगेगा? क्या ऋषभ को मुआवजा मिलेगा?
Zepto Delivery Boy Beaten: इंसानियत या सिर्फ बिजनेस?
आखिर में सवाल यही है कि, क्या कोई एम्प्लॉई या डिलीवरी बॉय सिर्फ एक मशीन है? परफ्यूम लगाना गलत हो सकता है, लेकिन किसी इंसान को पीटकर मुर्गा बनाना कभी सही नहीं है।
यह घटना हमें याद दिलाती है कि जब तक मेहनत की इज्जत को सीरियसली नहीं लिया जाएगा, तब तक ‘डिजिटल इंडिया’ srf एक नारा ही रहेगा।
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