किस उम्र से शुरू करें पॉकेट मनी? (Pocket Money for Kids)
विशेषज्ञों के अनुसार बच्चों को 5–6 साल की उम्र से ही छोटी राशि के साथ पॉकेट मनी (Pocket Money for Kids) की शुरुआत की जा सकती है। इस उम्र में बच्चे सिक्कों और नोटों की पहचान करने लगते हैं और छोटी चीजें खरीदने का अनुभव उनके लिए सीखने का अवसर बनता है।
- 5–6 साल, हफ्ते में 10–20 रुपये
- 8–10 साल, हफ्ते में 50–100 रुपये
- 11–12 साल, जरूरत और समझ के अनुसार राशि तय करें
ध्यान रखें, शुरुआत हमेशा छोटी रकम से करें ताकि बच्चा पैसे की वैल्यू समझ सके।

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धीरे-धीरे बढ़ाएं अमाउंट, जिम्मेदारी के साथ
जैसे-जैसे बच्चा बड़ा होता है और उसकी जरूरतें बढ़ती हैं, पॉकेट मनी की राशि भी धीरे-धीरे बढ़ाई जानी चाहिए। लेकिन यह बढ़ोतरी उम्र के साथ-साथ बच्चे की समझ, व्यवहार और जिम्मेदारी के आधार पर होनी चाहिए। अगर बच्चा बिना सोचे-समझे पैसे खर्च करता है, तो पहले उसे सही गाइडेंस देना जरूरी है।
बजट बनाना सिखाएं, यही असली सीख है
पॉकेट मनी का सबसे बड़ा फायदा यह है कि इससे बच्चे बजट बनाना सीखते हैं। तय रकम में महीने या हफ्ते भर की जरूरतें पूरी करना उन्हें प्राथमिकताएं तय करना सिखाता है। माता-पिता बच्चों से पूछ सकते हैं:
- इस हफ्ते तुम किन चीजों पर खर्च करना चाहते हो?
- क्या कोई चीज है जिसके लिए बचत जरूरी है?
इस तरह बातचीत से बच्चे खुद सोचने लगते हैं।
बचत की आदत डालें, भविष्य की नींव
बचत की आदत जितनी जल्दी डल जाए, उतना बेहतर होता है। बच्चों को समझाएं कि अगर उन्हें कोई बड़ी चीज चाहिए, तो उसके लिए थोड़ा-थोड़ा पैसा बचाना होगा। आप गुल्लक, सेविंग बॉक्स या बच्चों के लिए अलग सेविंग अकाउंट का इस्तेमाल कर सकते हैं।
हर खर्च पर रोक न लगाएं
कई माता-पिता बच्चों के हर खर्च में दखल देते हैं, जो सही नहीं है। पॉकेट मनी का मकसद ही यह है कि बच्चा अपने फैसलों से सीखे। अगर बच्चा कभी गलत खरीदारी कर भी ले, तो उसे अनुभव के तौर पर देखने दें। यही अनुभव उसे भविष्य में बेहतर निर्णय लेना सिखाएगा।
डिजिटल मनी की समझ भी जरूरी
आज के समय में UPI, कार्ड और ऑनलाइन पेमेंट आम हो चुके हैं। 10–12 साल के बच्चों को धीरे-धीरे डिजिटल ट्रांजैक्शन की बेसिक जानकारी देना भी जरूरी है, ताकि वे फिजिकल और डिजिटल पैसे का फर्क समझ सकें।
जिम्मेदारी और आत्मनिर्भरता का विकास
पॉकेट मनी बच्चों में आत्मनिर्भरता, आत्म-सम्मान और अनुशासन की भावना विकसित करती है। जब बच्चे जानते हैं कि पैसे सीमित हैं, तो वे सोच-समझकर खर्च करना सीखते हैं।
पॉकेट मनी सिर्फ बच्चों को खर्च करने की आजादी नहीं देती, बल्कि उन्हें जीवनभर काम आने वाली फाइनेंशियल स्किल्स सिखाती है। सही उम्र, सही राशि और सही मार्गदर्शन के साथ दी गई पॉकेट मनी बच्चों को भविष्य में आर्थिक रूप से मजबूत और समझदार बनाती है।
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