Ghaziabad Breaking : वेव सिटी के खिलाफ चलाए जा रहे अवैध तरीके से धरना प्रदर्शन को पुलिस द्वारा हटाए जाने के विरोध में दायर याचिका को हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया है। हाईकोर्ट ने कहा है कि याचिकाकर्ता ने जो आरोप लगाए हैं वह निराधार है और ऐसी स्थिति में यह धरना प्रदर्शन अवैध प्रतीत होता है।
स्थानीय ग्रामीण प्रमोद डवास द्वारा किसानो के धरना को पुलिस द्वारा हटाये जाने के विरूद्ध दायर की गयी याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता के आरोप को अवैध करार दिया है।
Ghaziabad Breaking : सड़क पर दे रहे थे धरना
जानकारी के मुताबिक किसानों के द्वारा 20 अप्रैल के इस समझौते को लागू करने के लिए धरना प्रदर्शन किया गया था। किसान सड़क पर धरना दे रहे थे। इस प्रकरण की शिकायत बीएनएस की धारा 252 के अर्न्तगत सहायक पुलिस आयुक्त वेव सिटी को दी गई। किसानो को सुनवाई का अवसर प्रदान करने के बाद सहायक पुलिस आयुक्त मोदीनगर ज्ञान प्रकाश राय को पता चला कि स्थानीय किसान वेव सिटी की 57 मीटर रोड को जबरदस्की कब्जा कर बैठे हुए है।

Ghaziabad Breaking : लोगों को आम सुविधाओं की हो रही थी परेशानी
इससे न सिर्फ आम लोगों के अलावा स्कूल के बच्चे, एम्बुलेंस जैसी सुविधाओं को हासिल करने में समस्या का सामना करना पड़ रहा था। जिसको दिखते हुए सहायक पुलिस आयुक्त मोदीनगर ज्ञान प्रकाश राय ने किसानों को 3 दिन में धरना स्थल खाली करने का वक्त दिया था। परन्तु किसानों ने आदेश का पालन नही किया तो पुलिस ने 3 अगस्त के दिन कार्यवाही के अंजाम दिया और कुछ किसानों को गिरफ्तार कर लिया जिसके बाद बेल कर उन्हें छोड़ दिया था।
Ghaziabad Breaking : निकल गई समझौते की समयसीमा
किसानों को पुलिस द्वारा हटाने के विरूद्ध स्थानीय निवासी प्रमोद डवास ने उच्च न्यायालय में याचिका सं० 696 / 2025 दाखिल की, जिसे सुनवाई को दौरान 25 अगस्त को उच्च न्यायालय ने कोई ताकत न होने के कारण निरस्त कर दिया। याचिका के निरस्त होने से अब 8% के भूखण्ड़ भी नही दिये जा सकते क्योकि समझौता की समय सीमा निकल चुकी है।
किसानो द्वारा याचिका के बिन्दुं सं0 07 मे समझौता को लागू कराने के विषय में कहा गया था। मा० उच्च न्यायालय ने याचिका को निरस्त कर दिया है। उधर धरना स्थल पर पुलिस बल का सख्त पहरा है। अगर किसान किसी तरह का उपद्रव करते हैं तो किसी भी स्थिति से निपटने के लिए पुलिस प्रशासन तैयार है।
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