Navjot Singh Sidhu Statement: भारत और इंग्लैंड के बीच खेले गए 5 मैचों की टेस्ट सीरीज 2-2 की बराबरी पर समाप्त हुआ। जैसे ही यह सीरीज समाप्त हुआ पूर्व भारतीय ओपनर नवजोत सिंह सिद्दधू (Navjot Singh Sidhu) ने हेड कोच गौतम गंभीर की तारीफ की और उनके आलोचकों को मुंहतोड़ जवाब भी दिया है।
दरअसल हेड कोच गौतम गंभीर (Gautam Gambhir) और टीम के कप्तान शुभमन गिल की रणनीति इंग्लैंड टीम के खिलाफ काम आई। जहां गिल पहली बार टेस्ट टीम की कप्तानी करने के लिए उतरे, वहीं कोच गौतम गंभीर ने कुछ नए चेहरों को टीम में शामिल किया था।
गंभीर को मिला जीत का श्रेय
पूर्व भारतीय ओपनर Navjot Singh Sidhu ने गौतम गंभीर के खिलाफ आलोचना करने वाले फैंस को करारा जवाब दिया है। उन्होंने सीधे उन ट्रोलर्स से सवाल किया कि इंडिया जब हारती है तो गंभीर दोषी होते हैं, लेकिन जब जीते तो क्या आप उन्हें सपोर्ट और उनकी तारीफ करोगे?

दरअसल नवजोत सिंह सिद्दधू ने भारतीय टीम की जीत का श्रेय कोच गौतम गंभीर को दिया है। उन्होंने अपने यूट्यूब चैनल पर गंभीर की तारीफ करते हुए, आलोचकों से सवाल भी किए। उन्होंने किया कि जब भी भारत खराब खेलता है तो सभी लोग गौतम गंभीर को इसका जिम्मेदार ठहराते हैं, लेकिन क्या आज आप उनका खड़े होकर उसका स्वागत करेंगे?
गंभीर सम्मान के हकदार हैं: Navjot Singh Sidhu
इतना ही नहीं उन्होंने आगे यह भी कहा कि ये गौतम गंभीर ही थे जिन्होंने इस बदलाव पर जोर दिया। उन्होंने ही आकाश दीप और वाशिंगटन सुंदर जैसे खिलाड़ियों को मौका दिया। कुलदीप शायद बेहतर ऑप्शन होते, लेकिन गंभीर को अपनी सोच पर भरोसा था। आज और कल में सुधार की गुंजाइश बनी रहेगी, लेकिन जिस इंसान को बार-बार सवालों और आलोचनाओं का सामना करना पड़ा है, आज उन्हें वो सम्मान दीजिए जिसका वो हकदार है।
Navjot Singh Sidhu comes out in support of Gautam Gambhir#INDvsENG pic.twitter.com/BntlUgErGw
— CricXtasy (@CricXtasy) August 6, 2025
युवाओं ने लिखा इतिहास

नवजोत सिंह सिद्दधू ने उन खिलाडियों के बारें में भी जिक्र किया, जो ज्यादा चर्चा में रहे ही नहीं है। उन्होंने कहा कि जब भारतीय टीम गई थी, तो उसमें कई ऐसे नाम थे जो अभी तक चर्चित नहीं थे। गौतम ने पहले ही कहा था कि टीम में तीन-चार बड़े नाम नहीं हैं, लेकिन इसे एक मौके की तरह देखिए, जहां बाकी खिलाड़ी खुद को साबित कर सकते हैं और आज उनकी कही बात सच साबित हो गई है। चाहे ब्रिस्बेन हो, पर्थ या इंग्लैंड, इतिहास युवाओं ने ही लिखा है और यह बहुत बड़ी बात है।