Politics News : कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के बेटे और कर्नाटक सरकार में मंत्री प्रियांक खरगे ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) को लेकर बड़ा बयान देकर राजनीतिक हलकों में नई बहस छेड़ दी है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि जब कांग्रेस देश की सत्ता में वापसी करेगी, तब आरएसएस पर पूरे देश में प्रतिबंध लगाया जाएगा। इस बयान के बाद सियासी गलियारों में हलचल तेज हो गई है। आरएसएस और भाजपा पर पहले भी लगातार निशाना साधते आ रहे कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी भी कई मौकों पर इन संगठनों पर संविधान विरोधी मानसिकता और देश को बांटने का आरोप लगा चुके हैं।
Politics News : प्रियांक खरगे ने क्यों उठाई बैन की बात?
प्रियांक खरगे ने हाल ही में आरएसएस महासचिव दत्तात्रेय होसबोले की टिप्पणी पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि जो लोग जाति और धर्म के नाम पर समाज में नफरत फैलाते हैं, वे असली राष्ट्र-विरोधी हैं। डॉ. भीमराव अंबेडकर ने भी अपने अंतिम भाषण में बताया था कि समाज में नफरत फैलाने वाले लोग ही राष्ट्र की प्रगति में सबसे बड़ी रुकावट होते हैं। प्रियांक खरगे ने आरएसएस पर संविधान की मूल भावना बदलने का प्रयास करने का आरोप लगाते हुए कहा कि आरएसएस ने हमेशा संविधान से असहमति दिखाई है। संविधान सभा की कार्यवाही के समय से ही उन्होंने मनुस्मृति को भारत का आदर्श ग्रंथ बताया और ऑर्गनाइज़र जैसी पत्रिका में इसकी आलोचना की।
Politics News : पहले भी लग चुका है प्रतिबं
प्रियांक खरगे ने कहा कि आरएसएस पर पहले भी प्रतिबंध लगाया गया था क्या सरदार पटेल ने 1948 में महात्मा गांधी की हत्या के बाद आरएसएस पर बैन नहीं लगाया था? इंदिरा गांधी ने भी आपातकाल के दौरान इस पर पाबंदी लगाई थी। हर बार आरएसएस ने झुककर संविधान का पालन करने का वादा किया, लेकिन बाद में वही पुराना रवैया दिखाया गया। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या देश में एक संगठन के लिए अलग कानून हो सकते हैं?
Politics News : प्रियांक खरगे के बयान पर आई राजनीतिक प्रतिक्रियाएं
प्रियांक खरगे के इस बयान को लेकर राजनीतिक हलकों में तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। भाजपा नेताओं ने इसे ‘लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ बताया है, जबकि कांग्रेस के कुछ नेताओं ने इसे संवैधानिक प्रतिबद्धता की रक्षा के रूप में देखा है। वहीं सोशल मीडिया पर भी संविधान बनाम मनुस्मृति और आरएसएस की भूमिका को लेकर नई बहस छिड़ गई है।
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