TMC Manifesto ishtehar Controversy: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 की आहट के साथ ही राज्य में ‘भाषाई और ऐतिहासिक युद्ध’ छिड़ गया है। ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस (TMC) द्वारा अपने चुनावी घोषणा पत्र का नाम ‘इश्तेहार’ रखे जाने पर भारतीय जनता पार्टी ने तीखा हमला बोला है। भाजपा ने इसे महज एक शब्द नहीं, बल्कि 121 साल पुराने उस काले इतिहास से जोड़ा है जिसने बंगाल विभाजन के दौरान सांप्रदायिक विद्वेष फैलाने का काम किया था। भाजपा सांसद सुधांशु त्रिवेदी ने टीएमसी पर सीधा निशाना साधते हुए इसे ‘मुस्लिम तुष्टीकरण’ की पराकाष्ठा बताया है और सवाल किया है कि बांग्ला गौरव की बात करने वाली ममता सरकार ने बांग्ला के ‘घोषणा पत्र’ शब्द को त्याग कर फारसी-उर्दू शब्द का चुनाव क्यों किया?
इस विवाद ने 1905 के उस ‘लाल इश्तेहार’ (Red Pamphlet) की यादें ताजा कर दी हैं, जिसने बंगाल की धरती पर सांप्रदायिक विभाजन की नींव रखने की कोशिश की थी। भाजपा का आरोप है कि टीएमसी जानबूझकर बंगाल की मूल संस्कृति और भाषा में बाहरी शब्दों का अतिक्रमण कर रही है ताकि एक विशेष वोट बैंक को साधा जा सके। वहीं, दूसरी ओर टीएमसी ने इन आरोपों को निराधार बताते हुए इसे भाजपा की ध्रुवीकरण की राजनीति करार दिया है। बंगाल की सियासत में छिड़ा यह ‘शब्द-युद्ध’ अब चुनावी रैलियों से लेकर सोशल मीडिया तक मुख्य चर्चा का विषय बन गया है। (TMC Manifesto ishtehar Controversy)
क्या है 1905 का ‘लाल इश्तेहार’
इतिहास के पन्नों में झांकें तो 1905 से 1907 के बीच का कालखंड बंगाल के लिए अत्यंत पीड़ादायक था। लॉर्ड कर्जन के बंगाल विभाजन के फैसले के बाद जब पूरा राज्य ‘वंदे मातरम’ के नारों से गूंज रहा था, तब ‘लाल इश्तेहार’ (Red Pamphlet) नाम का एक विवादित दस्तावेज सामने आया था। इब्राहिम खान द्वारा रचित और ढाका के नवाब के प्रभाव वाले क्षेत्रों में वितरित इस ‘इश्तेहार’ का मुख्य उद्देश्य मुस्लिम समुदाय को स्वदेशी आंदोलन के खिलाफ भड़काना और हिंदुओं के प्रति विद्वेष पैदा करना था। भाजपा नेता सुधांशु त्रिवेदी का दावा है कि ‘इश्तेहार’ शब्द का ऐतिहासिक संदर्भ ही विभाजनकारी रहा है। (TMC Manifesto ishtehar Controversy)

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बांग्ला या फारसी?
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान सुधांशु त्रिवेदी ने टीएमसी की भाषाई पहचान पर सवाल उठाते हुए पूछा, ‘क्या ‘इश्तेहार’ बांग्ला भाषा का शब्द है?’ उन्होंने तर्क दिया कि बांग्ला में घोषणा पत्र को आमतौर पर ‘घोषणा पत्र’ या ‘संकल्प पत्र’ कहा जाता है। उन्होंने आरोप लगाया कि जिस तरह 1905 में नवाबों ने तुष्टीकरण के जरिए बंगाल को तोड़ने की कोशिश की थी, टीएमसी उसी ‘मिनी पाकिस्तान’ वाली मानसिकता पर चल रही है। भाजपा का मानना है कि प्रशासनिक कार्यों में उर्दू और फारसी शब्दों का बढ़ता उपयोग बंगाल की मूल संस्कृति के साथ खिलवाड़ है। (TMC Manifesto ishtehar Controversy)
‘इश्तेहार’ तो आम बोलचाल का शब्द है
भाजपा के तीखे हमलों के बीच टीएमसी नेताओं ने पलटवार करते हुए कहा है कि ‘इश्तेहार’ शब्द दशकों से बांग्ला बोलचाल और साहित्य का हिस्सा रहा है। इसका उपयोग नोटिस, विज्ञापन या घोषणा के संदर्भ में आम तौर पर किया जाता है। टीएमसी का तर्क है कि भाजपा के पास चुनाव लड़ने के लिए कोई वास्तविक मुद्दा नहीं है, इसलिए वे डिक्शनरी और इतिहास के मुर्दों को उखाड़कर जनता का ध्यान भटकाने की कोशिश कर रहे हैं। (TMC Manifesto ishtehar Controversy)
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मुद्दों से ज्यादा पहचान की लड़ाई?
जैसे-जैसे 2026 के चुनाव नजदीक आ रहे हैं, बंगाल की राजनीति में विकास और रोजगार जैसे मुद्दों की जगह भाषाई पहचान और ऐतिहासिक विवाद लेते जा रहे हैं। ‘इश्तेहार’ शब्द पर मचा यह बवाल साफ संकेत दे रहा है कि आने वाले दिनों में ध्रुवीकरण की राजनीति और तेज होगी। भाजपा जहां इसे ‘सांस्कृतिक राष्ट्रवाद’ बनाम ‘तुष्टीकरण’ की लड़ाई बता रही है, वहीं ममता बनर्जी इसे ‘बंगाली अस्मिता’ पर बाहरी लोगों के हमले के रूप में पेश करने की कोशिश कर रही हैं। (TMC Manifesto ishtehar Controversy)



