Mamata Banerjee New Schemes: पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव की आहट के बीच मुख्यमंत्री ममता बनर्जी (Mamata Banerjee New Schemes) ने बड़ा राजनीतिक और सामाजिक कदम उठाते हुए दो नई योजनाओं की शुरुआत कर दी है। पहले इन योजनाओं को 1 अप्रैल से लागू किया जाना था, लेकिन राज्य सरकार ने इन्हें तय समय से पहले यानी 7 मार्च से ही लागू करने का फैसला लिया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि ये योजनाएं राज्य के युवाओं और भूमिहीन खेत मजदूरों को आर्थिक और सामाजिक सहयोग देने के उद्देश्य से शुरू की गई हैं। इस घोषणा के साथ ही उन्होंने केंद्र सरकार और चुनाव आयोग पर भी तीखा हमला बोला।
तय समय से पहले शुरू हुई दो अहम योजनाएं
मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने राज्य बजट में दो योजनाओं की घोषणा की थी। इनमें ‘बंगालर युवा साथी’ और ‘भूमिहीन खेत मजदूर’ योजना शामिल हैं। सरकार ने पहले इन्हें 1 अप्रैल से लागू करने का फैसला किया था, लेकिन बाद में इन्हें 7 मार्च से ही शुरू कर दिया गया। ममता बनर्जी ने कहा कि राज्य सरकार लोगों के हित में काम कर रही है और इन योजनाओं का उद्देश्य जरूरतमंद वर्गों को आर्थिक सहारा देना है। उन्होंने दावा किया कि पश्चिम बंगाल देश में कल्याणकारी योजनाएं लागू करने के मामले में अग्रणी राज्यों में शामिल है।
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केंद्र सरकार पर लगाया दबाव बनाने का आरोप
इस मौके पर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी (Mamata Banerjee New Schemes) ने केंद्र सरकार पर भी गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार पश्चिम बंगाल की छवि खराब करने की कोशिश कर रही है।ममता ने आरोप लगाया कि राज्य सरकार द्वारा चलाई जा रही कई योजनाएं देश में सबसे बेहतर मानी जाती हैं, लेकिन केंद्र सरकार इसे स्वीकार नहीं करना चाहती। उन्होंने यह भी कहा कि राज्य सरकार को परेशान करने के लिए कई तरह के कदम उठाए जा रहे हैं और विभिन्न एजेंसियों का इस्तेमाल भी किया जा रहा है।
वोटर लिस्ट विवाद को लेकर जारी है धरना
इसी बीच मुख्यमंत्री ममता बनर्जी (Mamata Banerjee New Schemes) का धरना शनिवार को दूसरे दिन भी जारी रहा। उन्होंने 6 मार्च को दोपहर 2 बजे कोलकाता के एस्प्लेनेड मेट्रो चैनल पर धरना शुरू किया था। यह धरना पश्चिम बंगाल में स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (SIR) के दौरान वोटर लिस्ट से नाम हटाने के विरोध में किया जा रहा है। ममता बनर्जी ने आरोप लगाया कि वोटर लिस्ट से नाम हटाने की प्रक्रिया के जरिए राज्य को विभाजित करने की कोशिश की जा रही है।
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चुनाव आयोग पर भी उठाए सवाल
धरने के दौरान अपने समर्थकों को संबोधित करते हुए ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि वोटर लिस्ट में नाम हटाने का फैसला लोकतांत्रिक व्यवस्था के खिलाफ है और इससे राज्य के मतदाताओं के अधिकारों पर असर पड़ सकता है। ममता ने कहा कि उनकी पार्टी और सरकार इस मुद्दे पर चुप नहीं बैठेगी और लोकतंत्र की रक्षा के लिए संघर्ष जारी रहेगा।
LPG कीमतों को लेकर भी केंद्र पर हमला
मुख्यमंत्री ने केंद्र सरकार को LPG सिलेंडर की बढ़ती कीमतों को लेकर भी घेरा। उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि अब गैस सिलेंडर बुक कराने के लिए 21 दिन पहले आवेदन करना पड़ता है। उन्होंने कहा कि अगर किसी घर में गैस खत्म हो जाए तो लोग इतने दिन तक क्या करेंगे और खाना कैसे बनाएंगे। ममता ने यह भी कहा कि केरोसिन का कोटा भी कम कर दिया गया है और रोजमर्रा की चीजों की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं। उनका कहना था कि आम लोगों पर बढ़ते आर्थिक दबाव को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
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राजनीतिक संदेश भी माना जा रहा फैसला
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि चुनाव से पहले इन योजनाओं को लागू करने का फैसला केवल प्रशासनिक कदम नहीं बल्कि एक महत्वपूर्ण राजनीतिक संदेश भी है। राज्य सरकार का प्रयास है कि युवाओं और ग्रामीण मजदूरों जैसे वर्गों को सीधे लाभ पहुंचाकर सामाजिक समर्थन को मजबूत किया जाए। आने वाले समय में पश्चिम बंगाल (Mamata Banerjee New Schemes) की राजनीति में इन योजनाओं और वोटर लिस्ट विवाद का मुद्दा चुनावी बहस का केंद्र बन सकता है।
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