Lakshmi Bhandar Scheme Bengal Election: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव (Lakshmi Bhandar Scheme Bengal) का शंखनाद हो चुका है और राज्य की राजनीति पूरी तरह चुनावी मोड में आ गई है। मुकाबला साफ है भारतीय जनता पार्टी बनाम तृणमूल कांग्रेस। घुसपैठ, एसआईआर (Special Intensive Revision) और राष्ट्रीय सुरक्षा जैसे मुद्दों से बीजेपी ने आक्रामक शुरुआत की है, वहीं मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने चुनावी जंग को महिला-केंद्रित कल्याण योजनाओं की ओर मोड़ दिया है। बंगाल की राजनीति पर गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर की पंक्तियां ‘तोबे एकला चलो रे’ – एकदम सटीक बैठती हैं। जहां बीजेपी अकेले दम पर मैदान में है, वहीं विपक्षी INDIA गठबंधन बंगाल में लगभग गायब नजर आ रहा है। ऐसे में ममता बनर्जी और उनकी पार्टी टीएमसी सीधे बीजेपी से दो-दो हाथ करने को तैयार हैं।
घुसपैठ और SIR से गरमाई राजनीति, लेकिन चुनाव सिर्फ नैरेटिव से नहीं जीते जाते
बीजेपी लगातार आरोप लगा रही है कि टीएमसी घुसपैठियों को संरक्षण दे रही है और वोट बैंक की राजनीति के लिए राष्ट्रीय सुरक्षा से समझौता कर रही है। दूसरी ओर, ममता बनर्जी ने SIR प्रक्रिया की खामियों को लेकर सुप्रीम कोर्ट तक का रुख किया है। हालांकि, सियासी जानकार मानते हैं कि चुनाव सिर्फ आरोपों और नैरेटिव से नहीं जीते जाते, बल्कि ज़मीन पर असर डालने वाली योजनाएं ही निर्णायक भूमिका निभाती हैं। यही वजह है कि ममता बनर्जी ने अब अपना सबसे कारगर हथियार फिर से धारदार कर दिया है लक्ष्मी भंडार योजना (Lakshmi Bhandar Scheme Bengal)।
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लक्ष्मी भंडार बना ममता का ‘ब्रह्मास्त्र’
ममता सरकार ने विधानसभा चुनाव से ठीक पहले लक्ष्मी भंडार योजना (Lakshmi Bhandar Scheme Bengal) में 500 रुपये मासिक बढ़ोतरी का ऐलान कर दिया है। अब सामान्य वर्ग की महिलाओं को 1500 रुपये और SC/ST वर्ग की महिलाओं को 1700 रुपये प्रति माह मिलेंगे। इतना ही नहीं, सरकार ने गिग वर्कर्स के लिए एक नया सोशल सिक्योरिटी पोर्टल, आंगनवाड़ी, आशा और नागरिक स्वयंसेवकों के मानदेय में बढ़ोतरी जैसे कई ऐलान किए हैं। यह साफ संकेत है कि टीएमसी का फोकस इस बार भी महिला और निम्न आय वर्ग पर है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि 2021 विधानसभा और 2024 लोकसभा चुनाव में टीएमसी की सफलता के पीछे लक्ष्मी भंडार योजना की बड़ी भूमिका रही है।
लक्ष्मी भंडार योजना क्या है?
लक्ष्मी भंडार योजना (Lakshmi Bhandar Scheme Bengal) फरवरी 2021 में शुरू की गई थी।
- लाभार्थी – 25 से 60 वर्ष की आर्थिक रूप से कमजोर महिलाएं
- वर्तमान लाभार्थी – लगभग 2.42 करोड़ महिलाएं
- उद्देश्य – महिलाओं को आर्थिक आत्मनिर्भरता और वित्तीय सुरक्षा
डायरेक्ट बैंक ट्रांसफर के जरिए हर महीने मिलने वाली राशि ने महिलाओं और सरकार के बीच सीधा जुड़ाव बनाया है।
बीजेपी का पलटवार – 1000 नहीं, 3000 रुपये देंगे
ममता बनर्जी के ऐलान के तुरंत बाद बीजेपी ने भी पलटवार कर दिया। विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष शुभेंदु अधिकारी ने दावा किया कि अगर बीजेपी सत्ता में आई तो लक्ष्मी भंडार (Lakshmi Bhandar Scheme Bengal) के तहत 3000 रुपये प्रति माह दिए जाएंगे। यानी अब मुकाबला सिर्फ घुसपैठ या SIR का नहीं, बल्कि कैश ट्रांसफर की रेस में बदल चुका है।
बिहार से लेकर बंगाल तक, महिला योजनाएं क्यों बन रहीं जीत की कुंजी?
मध्य प्रदेश की लाडली बहन योजना, महाराष्ट्र की लाडकी बहीण, छत्तीसगढ़ की महतारी वंदन, बिहार की महिला रोजगार योजना और झारखंड की मासिक सहायता योजना इन सभी ने चुनावी नतीजों को सीधे प्रभावित किया है। इन योजनाओं की सबसे बड़ी ताकत रही-
- सीधा पैसा
- हर महीने
- बिना बिचौलिये
बंगाल में ममता बनर्जी इसी मॉडल को और मजबूत करने में जुटी हैं।
सवाल बरकरार – क्या सुरक्षा बनाम सुविधा में महिलाएं किसे चुनेंगी?
हालांकि, बंगाल में महिलाओं की सुरक्षा को लेकर सवाल भी उठते रहे हैं। हाल के वर्षों में महिला अपराधों के मामलों ने विपक्ष को हमलावर होने का मौका दिया है। 2019 के CSDS सर्वे के मुताबिक, टीएमसी एकमात्र ऐसी पार्टी थी जिसे पुरुषों से ज्यादा महिलाओं ने वोट दिया। अब सवाल यही है क्या आर्थिक सुरक्षा, सुरक्षा के सवालों पर भारी पड़ेगी? इसका जवाब आने वाले चुनावी नतीजे देंगे।
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