CPIM West Bengal Election Manifesto: पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक समय सबसे मजबूत ताकत रही भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (Marxist) यानी सीपीएम आज अपने सबसे कमजोर दौर से गुजर रही है। पिछले पांच वर्षों से राज्य विधानसभा में वामपंथी दलों का एक भी प्रतिनिधि नहीं होना इस गिरावट का सबसे बड़ा संकेत है।
लेकिन 2026 के विधानसभा चुनाव से पहले पार्टी ने जोरदार वापसी की तैयारी शुरू कर दी है। युवा चेहरों को आगे लाने के साथ-साथ अनुभवी नेताओं को भी मैदान में उतारा गया है।
CPIM West Bengal Election Manifesto: ‘बांग्ला बचाओ यात्रा’ से ग्राउंड पर एक्टिव
सीपीएम इस बार सिर्फ घोषणाओं तक सीमित नहीं रहना चाहती। पार्टी ने जिले-दर-जिले ‘बांग्ला बचाओ यात्रा’ शुरू की है, जिसके जरिए जनता से सीधा संवाद किया जा रहा है। यह रणनीति बताती है कि पार्टी जमीनी स्तर पर अपनी पकड़ फिर से मजबूत करने की कोशिश में है।
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CPIM West Bengal Election Manifesto: रोजगार पर सबसे बड़ा फोकस
CPIM West Bengal Election Manifesto का सबसे बड़ा फोकस रोजगार है। पार्टी ने साफ किया है कि बेरोजगारी के मुद्दे पर वह चुनाव लड़ेगी।
घोषणापत्र में कहा गया है कि हर परिवार को स्थायी रोजगार देने की दिशा में काम किया जाएगा। इसके तहत शहरों में 120 दिन और गांवों में 200 दिन का रोजगार सुनिश्चित करने की बात कही गई है। साथ ही सरकारी और औद्योगिक दोनों सेक्टर में नौकरियां बढ़ाने का वादा भी किया गया है। इन घोषणाओं को सीधे तौर पर युवाओं को आकर्षित करने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।
CPIM West Bengal Election Manifesto: मजदूरी और नौकरियों पर बड़े वादे
सीपीएम ने मजदूर वर्ग को साधने के लिए कई बड़े ऐलान किए हैं। पार्टी ने दैनिक मजदूरी को 600 रुपये करने और न्यूनतम मजदूरी को बढ़ाकर 700 रुपये तक करने का वादा किया है। इसके साथ ही अगले 5 सालों में SSC-PSC जैसी परीक्षाओं की सभी रिक्तियां भरने का दावा भी किया गया है। ये कदम खासतौर पर उन वर्गों को ध्यान में रखकर उठाए गए हैं, जो लंबे समय से रोजगार और वेतन वृद्धि की मांग कर रहे हैं।
CPIM West Bengal Election Manifesto: फ्री बिजली और स्मार्ट मीटर पर बड़ा फैसला
घोषणापत्र का सबसे चर्चित हिस्सा बिजली से जुड़ा है, जिसमें आम जनता को राहत देने पर खास फोकस किया गया है। इसके तहत 100 यूनिट तक बिजली पूरी तरह मुफ्त देने का वादा किया गया है, जबकि 200 यूनिट तक की खपत पर आधी कीमत चुकानी होगी। साथ ही प्रीपेड स्मार्ट मीटर को बंद करने का भी आश्वासन दिया गया है। यह कदम सीधे तौर पर आम उपभोक्ताओं और मध्यम वर्ग को आर्थिक राहत देने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।
किसानों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर जोर
सीपीएम ने किसानों को लुभाने के लिए कई बड़े वादे किए हैं। पार्टी ने 16 फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) को 1.5 गुना बढ़ाने का ऐलान किया है, साथ ही जल संसाधनों की सुरक्षा पर भी जोर दिया है। इसके अलावा नहर, तालाब और पोखरों को बचाने के लिए कानून बनाने की बात कही गई है। ये सभी घोषणाएं ग्रामीण वोट बैंक को साधने की रणनीति का हिस्सा मानी जा रही हैं।
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महिलाओं और बुजुर्गों के लिए खास योजनाएं
घोषणापत्र में सामाजिक सुरक्षा को विशेष प्राथमिकता दी गई है। इसके तहत 20 लाख स्वयं सहायता समूह बनाने का लक्ष्य रखा गया है, साथ ही महिलाओं के सशक्तिकरण पर खास फोकस किया गया है। बुजुर्गों के लिए स्वास्थ्य सेवा परियोजना शुरू करने और गरीब बुजुर्गों को 6000 टका मासिक भत्ता देने का वादा किया गया है। इसके अलावा अल्पसंख्यकों और आदिवासियों के लिए स्कूल, कॉलेज और अस्पताल बनाने की भी घोषणा की गई है।
CPIM West Bengal Election Manifesto: कानून-व्यवस्था और सुरक्षा पर भी ध्यान
सीपीएम ने कानून-व्यवस्था को मजबूत करने के लिए नई पहल करने की बात कही है। पार्टी ने हर जिले में ‘स्वायत्त अभय वाहिनी’ बनाने का प्रस्ताव रखा है और महिलाओं की सुरक्षा तथा उन्हें समय पर न्याय दिलाने का वादा किया है। यह कदम राज्य में बढ़ती सुरक्षा चिंताओं को ध्यान में रखते हुए उठाया गया है।
क्या वापसी कर पाएगी CPIM?
सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या ये वादे सीपीएम को सत्ता में वापसी दिला पाएंगे? राज्य में फिलहाल अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी के बीच कड़ा मुकाबला है। ऐसे में सीपीएम के लिए राह आसान नहीं है।
हालांकि, CPIM West Bengal Election Manifesto में किए गए वादे यह जरूर दिखाते हैं कि पार्टी इस बार पूरी तैयारी के साथ मैदान में उतरी है।
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