Uttarakhand Census: उत्तराखंड में वर्ष 2026 से जनगणना की औपचारिक प्रक्रिया शुरू होने जा रही है। केंद्र सरकार की अधिसूचना के बाद राज्य स्तर पर तैयारियां तेज कर दी गई हैं। इस बार Uttarakhand Census पूरी तरह डिजिटल माध्यम से कराई जाएगी और इसे तीन चरणों में संपन्न किया जाएगा। पहला चरण मकान सूचीकरण और भवन गणना से संबंधित होगा, जिसकी संभावित अवधि 25 अप्रैल से 24 मई 2026 के बीच तय की जा रही है। राज्य सरकार जल्द ही इसकी आधिकारिक घोषणा करेगी।
मकान सूचीकरण से होगी शुरुआत
Uttarakhand Census अभियान का पहला चरण मकानों और भवनों के सूचीकरण से शुरू होगा। इसके तहत गांवों, कस्बों और शहरों में स्थित सभी आवासीय और गैर-आवासीय ढांचों का विवरण दर्ज किया जाएगा। अधिकारियों के अनुसार, केंद्र ने अप्रैल से सितंबर 2026 के बीच किसी भी उपयुक्त अवधि में यह कार्य पूरा करने की अनुमति दी है। उत्तराखंड में इसे अप्रैल-मई के दौरान पूरा करने की रणनीति बनाई गई है, ताकि मानसून और स्कूल अवकाश से पहले काम निपटाया जा सके।
राज्य में लगभग 30 हजार गणना ब्लॉक बनाए जाएंगे। एक गणना ब्लॉक में अधिकतम 800 की आबादी का मानक रखा गया है। इसी आधार पर सीमांकन और कर्मचारियों की तैनाती की योजना तैयार की गई है।
बड़ी संख्या में कर्मचारियों की तैनाती
मकान सूचीकरण के लिए करीब 30 हजार इन्यूमेरेटर्स नियुक्त किए जाएंगे। शिक्षा विभाग सहित विभिन्न विभागों के कर्मचारी इस कार्य में लगाए जाएंगे। प्रत्येक इन्यूमेरेटर को एक गणना ब्लॉक सौंपा जाएगा, जिसके अंतर्गत आने वाले क्षेत्र का नक्शा तैयार करना और प्रत्येक भवन का विवरण दर्ज करना उनकी जिम्मेदारी होगी।
इसके अलावा लगभग 4 हजार सुपरवाइजर तैनात किए जाएंगे, जो फील्ड स्तर पर निगरानी और समन्वय का कार्य संभालेंगे। प्रशासन का मानना है कि इतने बड़े पैमाने पर मानव संसाधन की तैनाती से कार्य को समयबद्ध ढंग से पूरा किया जा सकेगा।
मोबाइल एप के जरिए डेटा संग्रह
इस बार Uttarakhand Census पूरी तरह डिजिटल होगी। कर्मचारियों को विशेष मोबाइल एप उपलब्ध कराया जाएगा, जिसमें 31 निर्धारित प्रश्नों के आधार पर जानकारी दर्ज करनी होगी। इन्यूमेरेटर्स घर-घर जाकर परिवार के सदस्यों, भवन की प्रकृति और अन्य आवश्यक विवरणों को मौके पर ही एप में अपलोड करेंगे।
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सरकार ने इसके लिए सेंसस मैनेजमेंट एंड मॉनिटरिंग सिस्टम (CMMS) नामक ऑनलाइन पोर्टल भी तैयार किया है। यह पोर्टल पूरे अभियान की मॉनिटरिंग और डेटा प्रबंधन का केंद्रीय मंच होगा। अधिकारियों का कहना है कि डिजिटल प्रणाली से त्रुटियों की संभावना कम होगी और डेटा विश्लेषण में तेजी आएगी।
प्रशिक्षण कार्यक्रम का विस्तृत खाका
इतने बड़े अभियान को सफल बनाने के लिए चरणबद्ध प्रशिक्षण कार्यक्रम तैयार किया गया है। 16 February से चार्ज अधिकारियों को प्रशिक्षण दिया जाएगा। इसके बाद मास्टर ट्रेनर्स तैयार किए जाएंगे, जो आगे फील्ड ट्रेनर्स को प्रशिक्षित करेंगे।
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प्रदेश के सभी 13 जिलों से 555 फील्ड ट्रेनर्स का चयन किया जाएगा। ये ट्रेनर्स 30 हजार इन्यूमेरेटर्स और 4 हजार सुपरवाइजर को प्रशिक्षण देंगे। 25 मार्च से 7 अप्रैल के बीच राज्यभर में प्रशिक्षण सत्र आयोजित किए जाएंगे। प्रत्येक बैच में लगभग 40 कर्मचारियों को तीन दिन का प्रशिक्षण दिया जाएगा, ताकि उन्हें एप संचालन और सर्वे प्रक्रिया की पूरी जानकारी मिल सके।
हिमालयी क्षेत्रों के लिए अलग समय-सारिणी
उत्तराखंड के चार हिमालयी जिलों के स्नोबाउंड क्षेत्रों में मौसम की स्थिति को देखते हुए अलग कार्यक्रम तय किया गया है। इन इलाकों में 11 सितंबर से 30 सितंबर 2026 के बीच जनसंख्या गणना की जाएगी। बाकी क्षेत्रों में व्यक्तिगत Uttarakhand Census 9 February से 28 February 2027 के बीच संपन्न होगी।
दूसरे चरण में व्यक्तिगत जानकारी
पहले चरण के बाद दूसरे चरण में परिवार और व्यक्तियों से जुड़ी विस्तृत जानकारी एकत्र की जाएगी। इसमें परिवार के सदस्यों की संख्या, शिक्षा स्तर, आय के स्रोत और सामाजिक-आर्थिक स्थिति से जुड़े प्रश्न शामिल होंगे। यह पूरा डेटा भी डिजिटल माध्यम से दर्ज किया जाएगा।
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प्रशासन की प्राथमिकता: समयबद्ध और पारदर्शी प्रक्रिया
मुख्य सचिव स्तर पर समीक्षा बैठकों के जरिए जिलाधिकारियों को निर्देश दिए जा चुके हैं कि तैयारियां समय पर पूरी की जाएं। प्रशिक्षण स्थल, तकनीकी संसाधन और मानव बल की उपलब्धता सुनिश्चित करने पर जोर दिया जा रहा है।
उत्तराखंड में प्रस्तावित यह Uttarakhand Census अभियान राज्य की विकास योजनाओं, संसाधन आवंटन और सामाजिक नीतियों के लिए महत्वपूर्ण आधार प्रदान करेगा। डिजिटल प्रणाली, व्यापक प्रशिक्षण और चरणबद्ध रणनीति के जरिए प्रशासन इस प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और प्रभावी बनाने का प्रयास कर रहा है।
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