Uttarakhand Budget: उत्तराखंड सरकार इन दिनों करीब एक लाख करोड़ रुपये के बजट की तैयारी में जुटी है। यह Uttarakhand Budget इसलिए भी खास माना जा रहा है क्योंकि यह धामी सरकार का विधानसभा चुनाव से पहले आखिरी पूर्ण बजट होगा। ऐसे में सरकार के सामने न केवल आर्थिक संतुलन बनाए रखने की चुनौती है, बल्कि आम जनता की अपेक्षाओं पर खरा उतरने का दबाव भी साफ नजर आ रहा है। बजट को अंतिम रूप देने से पहले विभागीय स्तर पर मंथन चल रहा है और आम लोगों से भी सुझाव लिए जा रहे हैं।
आमदनी और खर्च के बीच संतुलन पर टिकी रणनीति
Uttarakhand Budget का बजट पूरी तरह उसकी आय और व्यय पर निर्भर करता है। केंद्रीय बजट के बाद अब नजरें Uttarakhand Budget पर टिकी हैं। सरकार के पास यह मौका है कि वह चुनाव से पहले विकास, रोजगार और सामाजिक कल्याण से जुड़े मुद्दों पर फोकस करे। हालांकि यह सब तभी संभव है, जब राज्य की आय और खर्च के आंकड़े संतुलन में हों।
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टैक्स और नॉन-टैक्स से आती है राज्य की आय
उत्तराखंड की आमदनी मुख्य रूप से टैक्स और नॉन-टैक्स रेवेन्यू से होती है। टैक्स के जरिए राज्य को जीएसटी, वैट, स्टांप ड्यूटी, आबकारी शुल्क और परिवहन कर से राजस्व मिलता है। जीएसटी से राज्य को लगभग 10 हजार करोड़ रुपये की आय होती है। वैट और स्टांप ड्यूटी से 2600 से 3000 करोड़ रुपये तक का योगदान मिलता है। वहीं, आबकारी शुल्क से करीब 5 हजार करोड़ और परिवहन कर से 1500 से 2000 करोड़ रुपये की आमदनी होती है।
नॉन-टैक्स रेवेन्यू भी Uttarakhand Budget का अहम आधार
नॉन-टैक्स रेवेन्यू के तहत खनन से राज्य को लगभग 1000 करोड़ रुपये मिलते हैं। वन विभाग से 600 करोड़, पावर सेक्टर से करीब 1000 करोड़ और विभिन्न सरकारी सेवाओं की फीस से लगभग 600 करोड़ रुपये की आय होती है। इसके अलावा विभागीय बजट को एफडी में रखने से मिलने वाला ब्याज और बिजली-पानी से जुड़े करों से भी सरकार को सैकड़ों करोड़ रुपये मिलते हैं।
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केंद्र से मिलने वाला हिस्सा भी महत्वपूर्ण
केंद्र सरकार से उत्तराखंड को टैक्स शेयर के रूप में 15 से 17 हजार करोड़ रुपये मिलते हैं। इसके अलावा SDRF और NDRF के तहत भी राज्य को सहायता मिलती है। इन सभी स्रोतों को मिलाकर उत्तराखंड को सालाना लगभग 45 से 48 हजार करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त होता है।
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वेतन, पेंशन और कर्ज बना बड़ा खर्च
राज्य सरकार का बड़ा हिस्सा वेतन और पेंशन में खर्च हो जाता है। कर्मचारियों के वेतन पर करीब 17 हजार करोड़ और पेंशन पर लगभग 8 हजार करोड़ रुपये खर्च होते हैं। इसके अलावा लिए गए कर्ज पर ब्याज और मूलधन की अदायगी में भी हर साल 10 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा की रकम चली जाती है। यह खर्च बजट पर भारी दबाव बनाता है।
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शिक्षा, स्वास्थ्य और सड़क पर सबसे ज्यादा निवेश
विभागीय खर्च की बात करें तो शिक्षा, खेल और युवा कल्याण के लिए करीब 10 हजार करोड़ रुपये खर्च किए जाते हैं। स्वास्थ्य सेवाओं पर लगभग 7 हजार करोड़ और लोक निर्माण विभाग के तहत सड़क-पुल निर्माण पर 3500 करोड़ रुपये सालाना खर्च होते हैं। अन्य विभागों के लिए भी अलग-अलग मदों में बजट का प्रावधान किया जाता है।
गैरसैंण में होगा Uttarakhand Budget सत्र
इस बार Uttarakhand Budget सत्र ग्रीष्मकालीन राजधानी गैरसैंण में आयोजित होने की संभावना है। हालांकि तारीखों का औपचारिक ऐलान अभी नहीं हुआ है, लेकिन माना जा रहा है कि मार्च में Uttarakhand Budget सत्र बुलाया जाएगा। चुनाव से पहले होने के कारण यह सत्र राजनीतिक और आर्थिक दोनों दृष्टि से बेहद अहम माना जा रहा है।
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लोकलुभावन बजट की उम्मीद
विशेषज्ञों का मानना है कि सरकार इस Uttarakhand Budget में रोजगार, पर्यटन, स्वास्थ्य और बुनियादी ढांचे पर खास जोर दे सकती है। साथ ही यह भी सुझाव दिए जा रहे हैं कि केंद्र और Uttarakhand Budget के बीच बेहतर तालमेल के लिए एक विशेषज्ञ समिति बनाई जाए, ताकि भविष्य की वित्तीय योजना मजबूत हो सके।
यह Uttarakhand Budget के लिए केवल आंकड़ों का दस्तावेज नहीं, बल्कि आने वाले चुनाव और राज्य की दिशा तय करने वाला महत्वपूर्ण पड़ाव साबित हो सकता है।
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