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Lokhitkranti > Blog > उत्तराखंड > Chardham Yatra 2026: अब मुफ्त नहीं होगा पंजीकरण, सरकार लाएगी टोकन शुल्क व्यवस्था
उत्तराखंड

Chardham Yatra 2026: अब मुफ्त नहीं होगा पंजीकरण, सरकार लाएगी टोकन शुल्क व्यवस्था

Manisha
Last updated: 2026-02-18 2:08 अपराह्न
Manisha Published 2026-02-18
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Chardham Yatra 2026
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Chardham Yatra 2026: उत्तराखंड की प्रसिद्ध Chardham Yatra 2026 को लेकर इस बार प्रशासन ने एक अहम बदलाव का संकेत दिया है। अब तक निःशुल्क रहने वाली ऑनलाइन पंजीकरण प्रक्रिया में सरकार टोकन शुल्क लागू करने की तैयारी में है। इस प्रस्ताव का उद्देश्य फर्जी रजिस्ट्रेशन पर रोक लगाना और वास्तविक श्रद्धालुओं को प्राथमिकता देना है।

Contents
क्यों जरूरी हुआ शुल्क लागू करना?कितना होगा शुल्क?इस सप्ताह खुल सकता है पंजीकरण पोर्टलपारदर्शिता और बेहतर प्रबंधन की ओर कदमपर्यटन व्यवसायियों की प्रतिक्रियाआस्था और प्रशासन के बीच संतुलन

गढ़वाल मंडल के आयुक्त विनय शंकर पांडेय ने ऋषिकेश स्थित ट्रांजिट कैंप में होटल एसोसिएशन, टूर-ट्रैवल यूनियन और अन्य संबंधित पक्षों के साथ बैठक में इस योजना की जानकारी साझा की। बैठक में पर्यटन व्यवसाय से जुड़े लोगों ने ‘नो-शो’ की बढ़ती समस्या पर गंभीर चिंता जताई।

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क्यों जरूरी हुआ शुल्क लागू करना?

पिछले कुछ वर्षों में देखा गया कि हजारों लोग ऑनलाइन पंजीकरण तो कर लेते हैं, लेकिन यात्रा के दौरान धामों तक नहीं पहुंचते। इस वजह से होटल और गेस्ट हाउस खाली रह जाते हैं, जबकि कई वास्तविक श्रद्धालु स्लॉट न मिलने के कारण पंजीकरण से वंचित रह जाते हैं।

मुफ्त व्यवस्था के कारण कई बार ट्रैवल एजेंसियों या दलालों द्वारा बड़ी संख्या में स्लॉट बुक कर लिए जाते थे। बाद में या तो वे रद्द कर दिए जाते थे या फिर ब्लैक मार्केटिंग जैसी समस्याएं सामने आती थीं। इससे प्रशासनिक डेटा भी प्रभावित होता था और वास्तविक भीड़ का सही अनुमान लगाना मुश्किल हो जाता था। सरकार का मानना है कि यदि पंजीकरण के समय एक मामूली शुल्क लिया जाएगा, तो केवल वही लोग आवेदन करेंगे जिनकी यात्रा करने की वास्तविक योजना होगी।

कितना होगा शुल्क?

प्रारंभिक प्रस्ताव के अनुसार पंजीकरण शुल्क न्यूनतम ₹10 रखा जा सकता है। हालांकि, अंतिम निर्णय अभी लिया जाना बाकी है। इस विषय पर अपर आयुक्त प्रशासन की अध्यक्षता में एक विशेष समिति गठित की गई है, जो एक से दो दिनों के भीतर अपनी रिपोर्ट राज्य सरकार को सौंपेगी।

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मुख्यमंत्री की मंजूरी मिलने के बाद ही शुल्क की अंतिम राशि घोषित की जाएगी। अधिकारियों का कहना है कि शुल्क बहुत अधिक नहीं होगा, बल्कि प्रतीकात्मक होगा, ताकि यात्रियों पर आर्थिक बोझ न पड़े और व्यवस्था भी नियंत्रित रहे।

इस सप्ताह खुल सकता है पंजीकरण पोर्टल

श्रद्धालुओं के लिए राहत की बात यह है कि ऑनलाइन पंजीकरण प्रक्रिया जल्द ही शुरू होने की संभावना है। प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, पोर्टल इसी सप्ताह के भीतर खोल दिया जाएगा।

Chardham Yatra 2026 के लिए धामों के कपाट खुलने की तिथियां भी घोषित कर दी गई हैं:

  • गंगोत्री और यमुनोत्री धाम के कपाट 19 अप्रैल 2026 को खुलेंगे।
  • केदारनाथ धाम 22 अप्रैल 2026 से श्रद्धालुओं के लिए खुल जाएगा।
  • बद्रीनाथ धाम के कपाट 23 अप्रैल 2026 को खोले जाएंगे।

अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि फिलहाल यात्रियों की संख्या पर कोई दैनिक सीमा निर्धारित नहीं की गई है। हालांकि, प्रत्येक यात्री के लिए पंजीकरण अनिवार्य रहेगा।

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पारदर्शिता और बेहतर प्रबंधन की ओर कदम

सरकार का मानना है कि नई व्यवस्था लागू होने से कई सकारात्मक बदलाव देखने को मिलेंगे। पहला, प्रशासन के पास वास्तविक यात्रियों की सटीक संख्या उपलब्ध होगी, जिससे सुरक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं और यातायात प्रबंधन को बेहतर बनाया जा सकेगा। दूसरा, होटल और स्थानीय व्यवसायियों को अपनी बुकिंग और संसाधनों की बेहतर योजना बनाने में मदद मिलेगी। तीसरा, अचानक बढ़ने वाली भीड़ और अव्यवस्था की संभावना कम होगी, जिससे यात्रा अधिक सुरक्षित और सुव्यवस्थित बन सकेगी।

पर्यटन व्यवसायियों की प्रतिक्रिया

ऋषिकेश और आसपास के क्षेत्रों में होटल संचालकों और टूर ऑपरेटरों ने इस प्रस्ताव का स्वागत किया है। उनका कहना है कि मामूली शुल्क से गंभीर और वास्तविक श्रद्धालुओं की पहचान आसान होगी। इससे अनावश्यक बुकिंग कम होंगी और कमरे खाली रहने की समस्या घटेगी। कुछ श्रद्धालुओं ने भी इस पहल को सकारात्मक बताया है। उनका मानना है कि यदि इससे Chardham Yatra 2026 पंजीकरण प्रक्रिया सरल और पारदर्शी बनती है, तो यह कदम स्वागतयोग्य है। हालांकि, कुछ लोगों ने यह भी सुझाव दिया है कि शुल्क व्यवस्था के साथ-साथ पोर्टल को तकनीकी रूप से मजबूत बनाया जाए, ताकि पंजीकरण के दौरान वेबसाइट क्रैश जैसी समस्याएं न आएं।

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आस्था और प्रशासन के बीच संतुलन

Chardham Yatra 2026 केवल एक धार्मिक यात्रा नहीं, बल्कि उत्तराखंड की अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण आधार भी है। हर वर्ष लाखों श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं, जिससे स्थानीय रोजगार और व्यापार को बढ़ावा मिलता है। ऐसे में सरकार का यह प्रयास आस्था और व्यवस्थापन के बीच संतुलन बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। यदि टोकन शुल्क व्यवस्था प्रभावी ढंग से लागू होती है, तो Chardham Yatra 2026 पहले से अधिक सुव्यवस्थित, सुरक्षित और पारदर्शी हो सकती है।

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