Chardham Yatra 2026: Chardham Yatra 2026 को लेकर उत्तराखंड प्रशासन ने अभी से तैयारियां तेज कर दी हैं। शनिवार, 17 जनवरी को ऋषिकेश स्थित ट्रांजिट कैंप परिसर में Chardham Yatra 2026 प्रबंधन एवं नियंत्रण संगठन की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता गढ़वाल कमिश्नर विनय शंकर पांडे ने की, जबकि आईजी गढ़वाल राजीव स्वरूप सहित यात्रा से जुड़े विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी इसमें मौजूद रहे।
बैठक का मुख्य उद्देश्य आगामी Chardham Yatra 2026 को सुव्यवस्थित, सुरक्षित और श्रद्धालुओं के लिए अधिक सुविधाजनक बनाना रहा। इस दौरान बीते वर्षों की यात्राओं के अनुभवों, सामने आई चुनौतियों और व्यवस्थागत कमियों पर विस्तार से चर्चा की गई। गढ़वाल कमिश्नर ने साफ शब्दों में कहा कि Chardham Yatra 2026 उत्तराखंड की आस्था और पहचान से जुड़ी है, इसलिए इसमें किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
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मंदिर परिसरों में मोबाइल और कैमरे पर सख्त प्रतिबंध
बैठक में इस बार का सबसे अहम फैसला बदरीनाथ और केदारनाथ धाम से जुड़ा रहा। निर्णय लिया गया कि Chardham Yatra 2026 से बदरीनाथ धाम में सिंह द्वार से आगे किसी भी श्रद्धालु को मोबाइल फोन या कैमरा ले जाने की अनुमति नहीं होगी। बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति इसके लिए क्लॉक रूम की व्यवस्था करेगी, जहां श्रद्धालु अपने मोबाइल और कैमरे सुरक्षित जमा करा सकेंगे। इसी तरह केदारनाथ धाम में भी मंदिर के चबूतरे पर फोटो या वीडियो बनाने की अनुमति नहीं होगी और इस नियम को सख्ती से लागू कराया जाएगा।
प्रशासन का कहना है कि वर्ष 2025 की Chardham Yatra के दौरान मंदिर परिसरों में फोटो खींचने को लेकर कई बार विवाद की स्थिति सामने आई थी। कुछ मामलों में श्रद्धालुओं के बीच झगड़े तक हो गए थे, जिनके वीडियो सोशल मीडिया पर भी वायरल हुए। इन्हीं घटनाओं से सबक लेते हुए इस बार यह सख्त फैसला लिया गया है, ताकि मंदिर परिसर की गरिमा बनी रहे और दर्शन व्यवस्था सुचारु रह सके।
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श्रद्धालुओं की सुविधा सर्वोपरि
गढ़वाल कमिश्नर विनय शंकर पांडे ने बैठक में कहा कि Chardham Yatra 2026 के दौरान हर साल लाखों श्रद्धालु देश-विदेश से उत्तराखंड पहुंचते हैं। ऐसे में उनकी सुविधा, सुरक्षा और सुचारु आवागमन सुनिश्चित करना प्रशासन की पहली जिम्मेदारी है। उन्होंने सभी विभागों के अधिकारियों को निर्देश दिए कि यात्रा से जुड़ी तैयारियां समय रहते पूरी कर ली जाएं।
उन्होंने विशेष रूप से ट्रैफिक प्रबंधन, पेयजल आपूर्ति, स्वच्छ शौचालय, पार्किंग व्यवस्था, सड़कों की मरम्मत, स्वास्थ्य सेवाएं, सुरक्षा व्यवस्था और परिवहन सेवाओं पर फोकस करने को कहा। इसके साथ ही श्रद्धालुओं के ठहरने और रहने की व्यवस्था को भी बेहतर बनाने के निर्देश दिए गए, ताकि किसी को अनावश्यक परेशानी न उठानी पड़े।
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ऋषिकेश ट्रांजिट कैंप पर विशेष ध्यान
Chardham Yatra 2026 का पहला पड़ाव माने जाने वाले ऋषिकेश ट्रांजिट कैंप को लेकर भी बैठक में खास चर्चा हुई। गढ़वाल कमिश्नर ने कहा कि यहां पंजीकरण से लेकर अन्य सभी सुविधाएं दुरुस्त होनी चाहिए। श्रद्धालुओं को शुरुआती चरण में ही सकारात्मक अनुभव मिले, इसके लिए व्यवस्थाओं को और मजबूत किया जाएगा। अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में सामाजिक संस्थाओं और स्वयंसेवी संगठनों के साथ तालमेल बनाकर काम करें, ताकि भीड़ प्रबंधन और सहायता कार्यों में सहयोग मिल सके।
बरसात के मौसम में सतर्क रहने के निर्देश
बैठक में सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) को भी विशेष रूप से अलर्ट रहने के निर्देश दिए गए। गढ़वाल कमिश्नर ने कहा कि बरसात के दौरान भूस्खलन और सड़क बंद होने जैसी समस्याएं सामने आती हैं, इसलिए बीआरओ को पहले से तैयारी रखने के लिए कहा गया है। ताकि किसी भी आपात स्थिति में सड़कों को जल्द से जल्द बहाल किया जा सके और यात्रा प्रभावित न हो।
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समन्वय और ईमानदार कार्यशैली पर जोर
अंत में गढ़वाल कमिश्नर ने सभी अधिकारियों से अपील की कि वे चारधाम यात्रा को केवल एक प्रशासनिक जिम्मेदारी नहीं, बल्कि श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़ा दायित्व समझें। उन्होंने कहा कि हर अधिकारी को ईमानदारी और समर्पण के साथ अपने कर्तव्यों का निर्वहन करना होगा। प्रशासन का लक्ष्य है कि Chardham Yatra 2026 पहले से अधिक सुरक्षित, व्यवस्थित और श्रद्धालुओं के लिए यादगार बने।



