Char Dham Yatra 2026: उत्तराखंड में Char Dham Yatra 2026 की तैयारियां तेज हो गई हैं। हर साल लाखों श्रद्धालुओं की आवाजाही को देखते हुए इस बार सरकार और लोक निर्माण विभाग ने यात्रा मार्ग को सुरक्षित और सुगम बनाने के लिए व्यापक कार्ययोजना तैयार की है। चारधाम से जुड़े राष्ट्रीय राजमार्गों पर भूस्खलन प्रभावित स्थानों की पहचान कर स्लोप ट्रीटमेंट का काम युद्धस्तर पर चल रहा है। अधिकारियों का दावा है कि यात्रा शुरू होने से पहले मार्ग को पूरी तरह दुरुस्त कर लिया जाएगा।
343 लैंडस्लाइड जोन चिह्नित, 207 पर स्वीकृति
चारधाम यात्रा रूट पर कुल 343 लैंडस्लाइड जोन चिन्हित किए गए हैं। इनमें से 207 स्थानों पर भारत सरकार से स्लोप ट्रीटमेंट की स्वीकृति मिल चुकी है। अब तक 88 स्थानों पर काम पूरा किया जा चुका है, जबकि 119 जगहों पर उपचार कार्य जारी है।
उत्तराखंड लोक निर्माण विभाग (NH विंग) के चीफ इंजीनियर मुकेश परमार के अनुसार, यात्रा मार्ग को सुरक्षित रखना विभाग की प्राथमिकता है। उन्होंने बताया कि केदारनाथ और बदरीनाथ जैसे अधिक भीड़ वाले धामों की ओर जाने वाले मार्गों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
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केंद्रीय स्तर पर समीक्षा, हाईवे का धरातलीय निरीक्षण
Char Dham Yatra 2026 मार्ग की व्यवस्थाओं को लेकर हाल ही में कई उच्चस्तरीय बैठकें आयोजित की गईं। केंद्रीय सड़क परिवहन राज्य मंत्री अजय टम्टा की मौजूदगी में भी समीक्षा की गई। इसके अलावा शासन स्तर के अधिकारियों ने राष्ट्रीय राजमार्गों का स्थलीय निरीक्षण किया।
निरीक्षण के दौरान ऋषिकेश से लेकर बदरीनाथ तक पूरे मार्ग का जायजा लिया गया। टीम ने रुद्रप्रयाग, सोनप्रयाग और गौरीकुंड होते हुए स्थिति का आकलन किया। इसके बाद गंगोत्री और यमुनोत्री हाईवे का भी निरीक्षण किया गया।
संवेदनशील स्थानों पर विशेष फोकस
NH-7 यानी ऋषिकेश-बदरीनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग पर शिवपुरी से कोड़ियाला तक 12 स्थानों, कोड़ियाला से देवप्रयाग तक 10 स्थानों और चमधार से रुद्रप्रयाग तक 8 स्थानों पर स्लोप ट्रीटमेंट जारी है। शिवपुरी से चमधार के बीच 15 स्थानों पर भी कार्य चल रहा है।
धरासू-यमुनोत्री (NH-134) मार्ग पर 9 में से 7 स्थानों पर काम पूरा हो चुका है, जबकि शेष जगहों पर उपचार जारी है। पालीगाड़ से जानकी चट्टी तक सड़क चौड़ीकरण और सुधार का कार्य भी प्रगति पर है।
रुद्रप्रयाग से गौरीकुंड (NH-107) मार्ग पर 21 स्थानों पर स्लोप ट्रीटमेंट प्रस्तावित है, जिनमें से 10 पर काम पूरा हो गया है और 11 स्थानों पर कार्य प्रगति पर है।

बछेलीखाल और चमधार से मिली सीख
पिछले मानसून में बछेलीखाल और चमधार क्षेत्र में भारी मलबा सड़क पर आने से यातायात ठप हो गया था। कई घंटों तक वाहन फंसे रहे और यात्रियों को जाम का सामना करना पड़ा। इस बार इन संवेदनशील स्थानों पर विशेष इंजीनियरिंग उपाय अपनाए जा रहे हैं ताकि भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा न बने।
वर्तमान में सभी प्रमुख मार्गों से मलबा हटा दिया गया है। जहां सड़क संकरी हो गई थी, वहां अब पूरी चौड़ाई बहाल कर दी गई है।
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सड़क सतह को भी मिलेगा नया रूप
सिर्फ पहाड़ी ढलानों को मजबूत करने पर ही नहीं, बल्कि सड़क की सतह को भी बेहतर बनाने पर काम चल रहा है। पिछले वर्ष अत्यधिक वर्षा के कारण कई स्थानों पर डामरीकरण क्षतिग्रस्त हो गया था। हालांकि सफाई का कार्य पूरा कर लिया गया है, लेकिन कुछ हिस्सों में दोबारा ब्लैक टॉप की आवश्यकता है।
मुख्य इंजीनियर के अनुसार, Char Dham Yatra 2026 मार्ग की सड़क सतह के सुधार के लिए विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) केंद्र सरकार को भेजी जा चुकी है। सैद्धांतिक स्वीकृति मिल गई है और जल्द ही टेंडर प्रक्रिया शुरू होगी। ऋषिकेश से रुद्रप्रयाग तक सड़क को फिर से मजबूत और समतल बनाया जाएगा।
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वैकल्पिक मार्ग भी तैयार
Char Dham Yatra 2026 के दौरान किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए वैकल्पिक मार्गों को भी दुरुस्त किया जा रहा है। NH विंग ने पूरे यात्रा रूट पर 68 मशीनें तैनात की हैं, ताकि जरूरत पड़ने पर तुरंत मलबा हटाया जा सके और यातायात बहाल किया जा सके।
अधिकारियों का कहना है कि इस बार Char Dham Yatra 2026 मार्ग को अधिक सुरक्षित और व्यवस्थित बनाने का लक्ष्य रखा गया है। यदि मौसम सामान्य रहा तो श्रद्धालुओं को पहले की तुलना में बेहतर और सुगम सफर का अनुभव होगा।
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