Vedic Clock Varanasi को लेकर काशी एक बार फिर चर्चा के केंद्र में है। प्राचीन भारतीय ज्ञान परंपरा को आधुनिक दौर से जोड़ते हुए Kashi Vishwanath Temple परिसर में विक्रमादित्य वैदिक घड़ी स्थापित की गई है, जिसने ब्रह्म मुहूर्त से समय बताना शुरू कर दिया है।
यह घड़ी Vedic Clock Varanasi के रूप में विश्व की दूसरी ऐसी घड़ी मानी जा रही है, जो पूरी तरह भारतीय कालगणना प्रणाली पर आधारित है। इससे पहले ऐसी घड़ी Mahakaleshwar Temple की नगरी उज्जैन में स्थापित की गई थी।
सूर्योदय से संचालित होगी समय गणना
Vedic Clock Varanasi की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह घड़ी सूर्योदय के आधार पर काम करती है। यानी जिस स्थान पर सूर्योदय का समय होगा, उसी के अनुसार समय की गणना की जाएगी।
काशी विश्वनाथ धाम के मुख्य कार्यपालक अधिकारी Vishw Bhushan Mishra ने बताया कि यह घड़ी वैदिक कालगणना के सभी घटकों को जोड़कर तैयार की गई है। इसमें भारतीय स्टैंडर्ड टाइम को भी समन्वित किया गया है, जिससे आधुनिक और पारंपरिक समय का संतुलन बना रहता है।
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30 मुहूर्तों में बंटा एक दिन
Vedic Clock Varanasi के अनुसार, एक दिन को 30 मुहूर्तों में विभाजित किया गया है। हर मुहूर्त लगभग 48 मिनट का होता है। यह प्रणाली आधुनिक 24 घंटे की घड़ी से अलग है और भारतीय परंपरा के अनुसार समय को समझने का एक वैज्ञानिक तरीका प्रस्तुत करती है।
इसके साथ ही एक दिन में 900 कला (लगभग 96 सेकंड) और 27,000 काष्ठा (लगभग 3.2 सेकंड) होते हैं। Vedic Clock Varanasi इस पूरी गणना को एक ही स्थान पर दर्शाती है, जो इसे बेहद खास बनाता है।
पंचांग और ग्रहों की स्थिति भी बताएगी
Vedic Clock Varanasi सिर्फ समय ही नहीं बताती, बल्कि यह एक तरह का संपूर्ण वैदिक सूचना तंत्र भी है। इसके माध्यम से भारतीय पंचांग, विक्रम संवत, ग्रहों की स्थिति, चंद्रमा की चाल और भद्रा की स्थिति जैसी जानकारी भी प्राप्त की जा सकती है।
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इस घड़ी के साथ एक मोबाइल ऐप भी विकसित किया गया है, जो 180 से अधिक भाषाओं में उपलब्ध है। Vedic Clock Varanasi ऐप के जरिए उपयोगकर्ता अपने शहर के अनुसार समय, मौसम और अन्य जानकारियां भी प्राप्त कर सकते हैं।
विद्वानों के मार्गदर्शन में तैयार हुई घड़ी
Vedic Clock Varanasi के निर्माण में काशी के विद्वानों का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। Banaras Hindu University के संस्कृत विद्या धर्म विज्ञान संकाय से जुड़े प्रोफेसर Ramnarayan Dwivedi ने बताया कि यह घड़ी युवाओं को भारतीय कालगणना को समझने में मदद करेगी। उन्होंने कहा कि Vedic Clock Varanasi के माध्यम से पारंपरिक वैज्ञानिक गणना को न केवल भारत में बल्कि विश्व स्तर पर भी पहचान मिलेगी।
आधुनिक घड़ियों को दे रही चुनौती
Vedic Clock Varanasi को लेकर यह भी कहा जा रहा है कि यह आधुनिक स्मार्ट वॉच और डिजिटल घड़ियों को नई चुनौती दे रही है। जहां आज की घड़ियां केवल समय दिखाती हैं, वहीं यह वैदिक घड़ी समय के साथ-साथ संस्कृति, विज्ञान और परंपरा का समन्वय प्रस्तुत करती है। यह पहल सनातन परंपरा के प्रचार-प्रसार के साथ-साथ नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ने का भी काम करेगी।
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धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व
Vedic Clock Varanasi का धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व भी बेहद खास है। काशी विश्वनाथ धाम में स्थापित यह घड़ी श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र बन गई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की पहलें भारत की प्राचीन वैज्ञानिक परंपराओं को वैश्विक स्तर पर पहचान दिलाने में मदद करेंगी। Vedic Clock Varanasi केवल एक घड़ी नहीं, बल्कि भारतीय ज्ञान, विज्ञान और संस्कृति का जीवंत उदाहरण है। यह दिखाती है कि हजारों साल पुरानी परंपराएं आज भी प्रासंगिक हैं और आधुनिक दुनिया को नई दिशा दे सकती हैं।
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