Shankaracharya Sexual Harassment Case: प्रयागराज (Prayagraj) की अदालत ने शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती (Shankaracharya Swami Avimukteswarananda Saraswati) के खिलाफ यौन शोषण के आरोपों पर सख्त कदम उठाया है। अदालत ने पुलिस को तुरंत FIR दर्ज करने और जांच शुरू करने का आदेश दिया। इस फैसले से यह साफ हो गया कि कानून के सामने कोई बड़ा या प्रभावशाली व्यक्ति अलग नहीं है। अदालत ने स्पष्ट किया कि धार्मिक या सामाजिक पद का गलत इस्तेमाल कानून से ऊपर नहीं है। यह फैसला समाज और महिलाओं के लिए भी एक महत्वपूर्ण संदेश है।
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Shankaracharya Sexual Harassment Case: कैसे शुरू हुई केस की शुरुआत
यह मामला तब शुरू हुआ जब पीड़ित महिला ने पहले स्थानीय पुलिस के पास शिकायत दर्ज कराई थी। लेकिन स्वामी के ऊंचे पद और उनके सामाजिक प्रभाव की वजह से पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की। इसके बाद पीड़ित ने प्रयागराज (Prayagraj) की अदालत में CrPC 156(3) के तहत अर्जी दाखिल की। 156(3) के तहत अदालत सीधे पुलिस को FIR दर्ज करने और जांच शुरू करने का आदेश दे सकती है। कोर्ट ने प्रारंभिक सबूतों और आरोपों की गंभीरता को देखते हुए तुरंत जांच की दिशा में कदम उठाने का निर्देश दिया।
Shankaracharya Sexual Harassment Case: पीड़िता ने लगाए गंभीर आरोप
पीड़िता ने अदालत में कहा कि वह धार्मिक ट्रस्ट और सेवा के उद्देश्य से स्वामी के संपर्क में आई थी। लेकिन उसके भरोसे का गलत फायदा उठाया गया। उसके अनुसार उसके साथ शारीरिक शोषण किया गया और विरोध करने पर उसे डराया-धमकाया गया। पीड़िता ने यह भी बताया कि उस पर मानसिक और सामाजिक दबाव डाला गया ताकि वह केस न करे। उनका कहना है कि यह मामला केवल व्यक्तिगत नहीं है, बल्कि धार्मिक संस्था और ट्रस्ट के भरोसे का दुरुपयोग है।
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Shankaracharya Sexual Harassment Case: कोर्ट का आदेश और पुलिस की जिम्मेदारी
अदालत ने पुलिस को साफ निर्देश दिए कि FIR दर्ज करें और जांच तुरंत शुरू करें। जांच में पीड़िता और गवाहों के बयान, सबूतों की जांच और आरोपी का बयान शामिल होगा। अदालत ने यह भी कहा कि कानून के सामने किसी को भी विशेष ट्रीटमेंट नहीं मिलेगा। FIR दर्ज होने के बाद पुलिस को यह सुनिश्चित करना होगा कि पीड़िता सुरक्षित रहे और किसी प्रकार की धमकी या दबाव न हो। अदालत का यह कदम कानून के सख्त पालन का संदेश देता है।
Shankaracharya Sexual Harassment Case: समाज और कानून के लिए संदेश
विशेषज्ञों का कहना है कि यह फैसला समाज और धार्मिक संस्थाओं के लिए बड़ा संदेश है। अदालत ने स्पष्ट किया कि कानून सबके लिए बराबर है और भविष्य में किसी भी ऊंचे पद का इस्तेमाल दबाव डालने या अपराध छुपाने के लिए नहीं किया जा सकता। यह फैसला यह भी दर्शाता है कि न्यायपालिका कानून की शक्ति और निष्पक्षता के साथ कार्य कर रही है, चाहे आरोपी कितना भी प्रभावशाली क्यों न हो।
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Shankaracharya Sexual Harassment Case: आगे की प्रक्रिया और सुरक्षा
FIR दर्ज होने के बाद पुलिस पूरे मामले की गहन जांच करेगी। इसमें सभी गवाह और सबूत इकट्ठा किए जाएंगे, और आरोपी से पूछताछ की जाएगी। अदालत मामले की गंभीरता को देखते हुए सख्त कार्रवाई का आदेश दे सकती है। पुलिस और अदालत ने यह भी कहा कि पीड़िता की सुरक्षा सर्वोपरि होगी और कोई भी उसे धमकाने की कोशिश नहीं कर पाएगा। यह फैसला महिलाओं की सुरक्षा और कानूनी जागरूकता के लिए भी मजबूत संदेश है।
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