Noida Twin Brothers Crime News : नोएडा में वाहन चोरी का एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जिसने पुलिस के साथ-साथ आम लोगों को भी हैरान कर दिया है। यहां बाइक चोरी करने वाले एक ऐसे गिरोह का खुलासा हुआ है, जिसमें शामिल जुड़वां भाई अपनी एक जैसी शक्ल का इस्तेमाल करके चोरी की वारदातों को अंजाम देते थे। उनकी चाल इतनी शातिर थी कि शक होने के बावजूद लोग और पुलिस तय ही नहीं कर पाते थे कि असली चोर कौन है।
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Noida Police ने इस गिरोह का भंडाफोड़ करते हुए चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस के मुताबिक, इनके पास से लगभग 30 चोरी की मोटरसाइकिलें और उनके कटे हुए पुर्जे बरामद किए गए हैं। जब्त किए गए सामान की कीमत करीब 15 लाख रुपये आंकी गई है।
एक जैसी शक्ल बनी जुड़वां भाइयों की सबसे बड़ी ताकत
पुलिस जांच में सामने आया है कि असमान उर्फ सूटा और उलमान सगे जुड़वां भाई हैं। दोनों का चेहरा, कद-काठी और रंग-रूप इतना मिलता-जुलता है कि पहली नजर में फर्क करना लगभग नामुमकिन है। इसी समानता को उन्होंने अपराध का हथियार बना लिया।
जब एक भाई किसी इलाके में बाइक चोरी करता था, उसी वक्त दूसरा भाई बिल्कुल वैसे ही कपड़े पहनकर अपनी कबाड़ की दुकान पर मौजूद रहता था। अगर किसी को चोरी करते समय शक भी होता, तो जांच करने पर वही शक्ल वाला व्यक्ति दुकान में बैठा मिल जाता था। इससे लोग भ्रम में पड़ जाते थे और चोर आसानी से निकल जाता था।
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रेकी के बाद होती थी चोरी
पुलिस के अनुसार, इस गिरोह का मास्टरमाइंड शादाब उर्फ रुतबा था। वह अपने साथियों के साथ पहले कॉलोनियों, सोसायटियों, बाजारों और कंपनियों के बाहर खड़ी बाइकों की रेकी करता था। खास तौर पर उन जगहों को चुना जाता था, जहां सीसीटीवी कैमरे न हों या निगरानी कम हो।
इसके बाद मास्टर चाबी या लॉक तोड़ने वाले औजारों की मदद से बाइक चोरी की जाती थी। चोरी के तुरंत बाद बाइक को दूसरी जगह ले जाया जाता था, ताकि किसी को शक न हो।
कबाड़ की दुकान बन गई थी गिरोह का अड्डा
उलमान की कबाड़ की दुकान इस पूरे खेल का सबसे अहम हिस्सा थी। चोरी की गई बाइक सीधे उसी दुकान पर लाई जाती थी। वहां बाइक के पुर्जे अलग कर दिए जाते थे। नंबर प्लेट, इंजन नंबर और पहचान से जुड़े दूसरे हिस्से बदल दिए जाते थे, ताकि बाइक की पहचान पूरी तरह मिट जाए।
कुछ ही समय में पूरी बाइक कबाड़ में बदल दी जाती थी, जिससे पुलिस के लिए उसे ट्रेस करना बेहद मुश्किल हो जाता था।
हरियाणा तक फैला था चोरी का नेटवर्क
पुलिस जांच में यह भी सामने आया है कि चोरी की गई बाइकों और उनके पुर्जों को कच्चे रास्तों के जरिए हरियाणा के बल्लभगढ़ भेजा जाता था। वहां पवन और विजय नाम के आरोपी इन बाइकों को खरीदते थे। ग्राहक की मांग के हिसाब से या तो पूरी बाइक बेची जाती थी या फिर अलग-अलग पुर्जे सप्लाई किए जाते थे। बाइक बिकने के बाद मिलने वाली रकम सभी आरोपी आपस में बांट लेते थे। इसी वजह से यह गिरोह लंबे समय तक पुलिस की नजरों से बचता रहा।
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ऐसे हुआ गिरोह का खुलासा
नोएडा पुलिस को काफी समय से वाहन चोरी की शिकायतें मिल रही थीं। जब एक ही इलाके में लगातार बाइक चोरी की घटनाएं होने लगीं, तो Police ने जांच तेज की। CCTV फुटेज, मुखबिरों की सूचना और तकनीकी जांच के बाद पुलिस को जुड़वां भाइयों पर शक हुआ।
आखिरकार पुलिस ने जाल बिछाकर चारों आरोपियों को पकड़ लिया। पूछताछ में उन्होंने कई चोरी की घटनाओं को कबूल भी किया।
पुलिस का बयान और लोगों से अपील
DCP यमुना प्रसाद ने बताया कि सभी आरोपियों को जेल भेज दिया गया है। पुलिस अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इस गिरोह ने अब तक कितनी चोरी की वारदातों को अंजाम दिया है और इसमें कोई अन्य व्यक्ति तो शामिल नहीं है।
उन्होंने लोगों से अपील की है कि वाहन सुरक्षित स्थान पर पार्क करें, लॉक लगाकर रखें और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की जानकारी तुरंत पुलिस को दें।
इलाके में चर्चा का विषय बना मामला
जुड़वां भाइयों की यह अनोखी चोरी की कहानी अब पूरे इलाके में चर्चा का विषय बनी हुई है। लोग हैरान हैं कि कैसे एक जैसी शक्ल का इस्तेमाल करके इतने समय तक पुलिस और आम लोगों को धोखे में रखा गया।
इस कार्रवाई से यह साफ हो गया है कि अपराधी चाहे कितने भी शातिर क्यों न हों, कानून से ज्यादा दिन तक बच नहीं सकते।



