Noida Engineer Death Case Update: नोएडा के सेक्टर-150 में हुए दर्दनाक हादसे ने पूरे प्रदेश को झकझोर कर रख दिया है। 27 वर्षीय सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता की मौत को अब सिर्फ एक सड़क हादसा नहीं माना जा रहा, बल्कि यह प्रशासनिक लापरवाही और सुरक्षा में बड़ी चूक का मामला बनता जा रहा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सख्त रुख के बाद जहां एक ओर कार्रवाई तेज हुई है, वहीं दूसरी ओर सच सामने लाने की जिम्मेदारी अब विशेष जांच टीम यानी SIT के कंधों पर है।
इस मामले में पहली गिरफ्तारी हो चुकी है। पुलिस ने नामजद बिल्डर अभय कुमार को गिरफ्तार कर लिया है, जो एमजेड विश्टाउन का मालिक बताया जा रहा है। साथ ही तीन सदस्यीय SIT ने औपचारिक रूप से जांच शुरू कर दी है। आने वाले पांच दिन इस केस के लिए बेहद अहम माने जा रहे हैं, क्योंकि इन्हीं दिनों में यह तय होगा कि हादसे के पीछे सिर्फ एक गलती थी या लापरवाही।
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Noida Engineer Death Case Update : क्या है पूरा मामला
यह हादसा 16 जनवरी की देर रात हुआ, जब सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता अपनी ड्यूटी खत्म कर गुरुग्राम से घर लौट रहे थे। घना कोहरा था और विजिबिलिटी बेहद कम थी। इसी दौरान सेक्टर-150 में उनकी कार एक निर्माणाधीन साइट के पास बने 20 फीट से ज्यादा गहरे पानी से भरे गड्ढे में जा गिरी। यह गड्ढा एक मॉल के बेसमेंट निर्माण के लिए खोदा गया था।
सबसे हैरान करने वाली बात यह रही कि मौके पर न तो कोई बैरिकेडिंग थी और न ही चेतावनी बोर्ड या रिफ्लेक्टर लगे थे। कार सीधे गड्ढे में चली गई और युवराज बाहर नहीं निकल सके। कई घंटों तक चले रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद उनका शव बरामद किया गया।
Noida Engineer Death Case Update: पहली गिरफ्तारी, बिल्डर पर शिकंजा
हादसे के बाद युवराज के परिवार की शिकायत पर पुलिस ने केस दर्ज किया था। जांच में सामने आया कि निर्माण स्थल पर सुरक्षा के मानकों की खुली अनदेखी की गई थी। इसी आधार पर नामजद बिल्डर अभय कुमार को नॉलेज पार्क थाना पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। पुलिस का कहना है कि यह गिरफ्तारी शुरुआती कार्रवाई है और जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ेगी, और भी जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई हो सकती है। लोटस ग्रीन नामक डेवलपर के खिलाफ भी मुकदमा दर्ज किया गया है।
Noida Engineer Death Case Update: SIT ने संभाली कमान, जांच शुरू
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर गठित तीन सदस्यीय SIT ने मंगलवार से अपनी जांच शुरू कर दी है। इस टीम की अगुवाई मेरठ जोन के एडीजी भानु भास्कर कर रहे हैं। उनके साथ मेरठ मंडलायुक्त भानु चंद्र गोस्वामी और पीडब्ल्यूडी के मुख्य अभियंता अजय वर्मा शामिल हैं।
SIT ने सबसे पहले नोएडा विकास प्राधिकरण के सेक्टर-6 स्थित दफ्तर पहुंचकर अधिकारियों से जानकारी ली। इसके बाद टीम ने घटनास्थल से जुड़े दस्तावेज, नक्शे और निर्माण से संबंधित अनुमतियों की जांच शुरू की। टीम ने मृतक युवराज मेहता के परिजनों से भी मुलाकात कर उनका बयान दर्ज किया। एडीजी भानु भास्कर ने कहा, ‘हम सभी पहलुओं पर जांच कर रहे हैं। यह बेहद दुखद घटना है और परिवार के प्रति हमारी पूरी संवेदना है।’
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Noida Engineer Death Case Update :अधिकारियों पर गिरी गाज
इस मामले में कार्रवाई सिर्फ बिल्डर तक सीमित नहीं रही। मुख्यमंत्री के निर्देश पर नोएडा विकास प्राधिकरण के सीईओ एम. लोकेश को उनके पद से हटा दिया गया है और उन्हें प्रतीक्षारत कर दिया गया है। इसके अलावा नोएडा ट्रैफिक सेल में तैनात जूनियर इंजीनियर नवीन कुमार को तत्काल प्रभाव से बर्खास्त कर दिया गया।
सेक्टर-150 और आसपास के इलाकों में तैनात कई अधिकारियों और कर्मचारियों को कारण बताओ नोटिस जारी किए गए हैं। उनसे पूछा गया है कि आखिर इतनी बड़ी निर्माण साइट पर सुरक्षा के इंतजाम क्यों नहीं थे।
Noida Engineer Death Case Update: हादसे के पीछे सिस्टम की लापरवाही
इस पूरे मामले ने एक बार फिर निर्माण स्थलों की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह गड्ढा कई दिनों से खुला पड़ा था और इसकी जानकारी अधिकारियों को भी थी। बावजूद इसके न तो बैरिकेड लगाए गए और न ही रोशनी या चेतावनी संकेत लगाए गए।
हादसे के बाद स्थानीय लोगों ने प्रदर्शन कर प्रशासन के खिलाफ नाराजगी जताई। उनका कहना है कि अगर समय रहते सुरक्षा इंतजाम किए जाते, तो एक युवा की जान बचाई जा सकती थी।
रेस्क्यू में देरी पर भी सवाल
परिजनों और स्थानीय लोगों ने रेस्क्यू ऑपरेशन में देरी को लेकर भी सवाल उठाए हैं। हालांकि पुलिस का कहना है कि घने कोहरे और पानी भरे गड्ढे के कारण बचाव कार्य में मुश्किलें आईं। फायर ब्रिगेड, SDRF और NDRF की टीमों ने मिलकर ऑपरेशन चलाया था।
Noida Engineer Death Case Update: अब सबकी नजर SIT की रिपोर्ट पर
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने SIT से पांच दिन के भीतर रिपोर्ट मांगी है। माना जा रहा है कि इस रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई तय होगी। यह रिपोर्ट यह भी साफ करेगी कि हादसे के लिए कौन-कौन जिम्मेदार है और किन स्तरों पर लापरवाही हुई।
फिलहाल, युवराज मेहता की मौत ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या विकास की दौड़ में आम लोगों की सुरक्षा को नजरअंदाज किया जा रहा है। आने वाले दिन इस सवाल का जवाब दे सकते
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