Banarasi Yadav encounter: उत्तर प्रदेश के वाराणसी में पुलिस और एसटीएफ की संयुक्त कार्रवाई ने एक कुख्यात अपराधी के लंबे आपराधिक सफर पर विराम लगा दिया। गाजीपुर से सोनभद्र तक कई जिलों में दहशत फैलाने वाला सुपारी किलर बनारसी यादव आखिरकार एनकाउंटर में मारा गया। इस कार्रवाई को पुलिस पूर्वांचल में अपराध के खिलाफ बड़ी कामयाबी मान रही है।
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Banarasi Yadav encounter: रात मिली लोकेशन, तुरंत बिछाया गया जाल
मंगलवार देर रात एसटीएफ को बनारसी यादव के चौबेपुर थाना क्षेत्र के बारियासनपुर रिंग रोड पर मौजूद होने की पुख्ता जानकारी मिली। सूचना मिलते ही टीमों ने इलाके को चारों ओर से घेर लिया। पुलिस के अनुसार, आरोपी को आत्मसमर्पण करने का पूरा मौका दिया गया, लेकिन उसने हथियार डालने के बजाय पुलिस टीम पर गोलियां चला दीं।
Banarasi Yadav encounter: जवाबी फायरिंग में हुआ घायल, अस्पताल में तोड़ा दम
पुलिस की जवाबी कार्रवाई में बनारसी यादव गंभीर रूप से घायल हो गया। उसे तुरंत अस्पताल ले जाया गया, लेकिन इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। मुठभेड़ स्थल से दो पिस्टल, मैगजीन और भारी मात्रा में कारतूस बरामद किए गए हैं। अधिकारियों का कहना है कि मुठभेड़ पूरी तरह आत्मरक्षा में की गई कार्रवाई थी।
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Banarasi Yadav encounter: महेंद्र गौतम हत्याकांड से जुड़ा था नाम
बनारसी यादव का नाम 21 अगस्त 2025 को हुए वाराणसी के चर्चित महेंद्र गौतम हत्याकांड में सामने आया था। सारनाथ थाना क्षेत्र की अरिहंत नगर कॉलोनी में कॉलोनाइजर महेंद्र गौतम की दिनदहाड़े गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इस वारदात ने पूरे शहर को हिला कर रख दिया था और इसके बाद से ही पुलिस उसकी तलाश में जुटी हुई थी।
Banarasi Yadav encounter: जमीन विवाद और सुपारी की कहानी
पुलिस जांच में सामने आया कि महेंद्र गौतम की हत्या की वजह करोड़ों की जमीन से जुड़ा विवाद था। करीब 40 बिस्वा जमीन, जिसकी कीमत लगभग 50 करोड़ रुपये बताई गई, इस पूरे विवाद की जड़ थी। आरोप है कि हत्या के लिए करीब पांच लाख रुपये की सुपारी दी गई थी और इसी साजिश का अहम हिस्सा बनारसी यादव था।
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Banarasi Yadav encounter: हमले में निभाई थी मुख्य भूमिका
जांच के मुताबिक, वारदात के समय बनारसी यादव के साथ अरविंद यादव उर्फ फौजी और विशाल भी मौजूद थे। विशाल बाइक चला रहा था, जबकि बनारसी यादव और अरविंद ने महेंद्र गौतम पर ताबड़तोड़ गोलियां चलाई थीं। इसी वजह से पुलिस उसे इस हत्याकांड का मुख्य साजिशकर्ता मान रही थी।
Banarasi Yadav encounter: मामलों में था वांछित
बनारसी यादव का आपराधिक इतिहास लंबा और संगीन रहा है। उस पर वाराणसी, गाजीपुर, सोनभद्र सहित कई जिलों में हत्या, लूट, रंगदारी और अवैध हथियार रखने जैसे कुल 21 मुकदमे दर्ज थे। अपराध की दुनिया में उसकी पहचान एक पेशेवर सुपारी किलर के रूप में थी, जो पैसे के लिए किसी भी हद तक जा सकता था।
Banarasi Yadav encounter: फरारी के दौरान लगातार बदलता रहा ठिकाना
हत्याकांड के बाद से बनारसी यादव पुलिस की पकड़ से दूर था। वह लगातार जगह बदल रहा था और तकनीकी निगरानी से बचने के लिए मोबाइल का सीमित इस्तेमाल करता था। हालांकि, एसटीएफ की सर्विलांस और मुखबिर नेटवर्क ने आखिरकार उसे ट्रैक कर लिया।
Banarasi Yadav encounter: पुलिस का दावा- नेटवर्क तक पहुंचेगी जांच
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि बनारसी यादव के मारे जाने से उसके आपराधिक नेटवर्क का भी खुलासा होगा। उसके संपर्कों, आर्थिक लेन-देन और अन्य मामलों से जुड़े लोगों की पहचान की जा रही है। आने वाले दिनों में इस नेटवर्क से जुड़े और नाम सामने आने की संभावना है।
Banarasi Yadav encounter: अपराध के रास्ते का यही अंजाम
बनारसी यादव का अंत एक बार फिर यह संदेश देता है कि अपराध चाहे जितना संगठित क्यों न हो, कानून से बच नहीं सकता। पुलिस ने साफ किया है कि प्रदेश में अपराधियों के खिलाफ अभियान आगे भी पूरी सख्ती के साथ जारी रहेगा।
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