Avimukteshwaranand POCSO Case: प्रयागराज में माघ मेला के बीच एक बड़ा धार्मिक और कानूनी विवाद सामने आया है। शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के खिलाफ नाबालिग बच्चों से कथित यौन शोषण के आरोपों में मुकदमा दर्ज होने के बाद पुलिस ने जांच शुरू कर दी है। कोर्ट के आदेश के बाद झूंसी थाना पुलिस ने POCSO एक्ट की गंभीर धाराओं में एफआईआर दर्ज की है।
इस मामले में तुलसी पीठाधीश्वर स्वामी रामभद्राचार्य के शिष्य आशुतोष ब्रह्मचारी ने शिकायत दर्ज कराई थी। अदालत के हस्तक्षेप के बाद पुलिस टीम अब माघ मेला स्थित शिविर पहुंचकर घटनास्थल का भौतिक सत्यापन और जांच प्रक्रिया शुरू कर चुकी है।
कोर्ट के आदेश के बाद दर्ज हुई FIR
आशुतोष ब्रह्मचारी ने दो कथित नाबालिग पीड़ितों की ओर से झूंसी थाने में तहरीर दी थी। जब पुलिस ने एफआईआर दर्ज नहीं की, तो उन्होंने 28 जनवरी को जिला कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। 21 फरवरी को एडीजे रेप एंड POCSO स्पेशल कोर्ट ने याचिका मंजूर करते हुए एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया। इसके बाद झूंसी थाना पुलिस ने शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के खिलाफ POCSO एक्ट की धारा 5/6 सहित कई गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज किया।
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माघ मेला शिविर पहुंची पुलिस टीम
झूंसी थाना अध्यक्ष महेश मिश्रा के नेतृत्व में पुलिस टीम वादी आशुतोष ब्रह्मचारी के साथ माघ मेला स्थित शिविर पहुंची। यहां पुलिस ने शिविर परिसर, प्रवेश और निकास मार्ग, संबंधित कक्षों और अन्य महत्वपूर्ण स्थलों का निरीक्षण किया। इस दौरान पूरे क्षेत्र का साइट प्लान तैयार किया गया, ताकि घटनास्थल से जुड़े हर पहलू की सटीक और व्यवस्थित जांच सुनिश्चित की जा सके। (Avimukteshwaranand POCSO Case)

जांच के दायरे में क्या-क्या?
एफआईआर दर्ज होने के बाद पुलिस ने मामले की जांच को तेज करते हुए कई अहम बिंदुओं पर काम शुरू कर दिया है। टीम कथित पीड़ितों के बयान दर्ज कर रही है, शिविर में मौजूद लोगों से पूछताछ कर रही है और घटनास्थल से जुड़े संभावित साक्ष्य जुटाने में लगी हुई है। इन सभी पहलुओं के आधार पर जांच की दिशा तय होगी, जो आने वाले दिनों में मामले की गंभीरता को स्पष्ट कर सकती है। (Avimukteshwaranand POCSO Case)
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निष्पक्ष जांच के लिए किया गया भौतिक सत्यापन
विवेचना अधिकारी ने त्रिवेणी मार्ग स्थित शिविर का विस्तृत निरीक्षण किया। पुलिस ने मौके पर मौजूद ढांचे, कमरों और गतिविधियों से जुड़े स्थानों का भौतिक सत्यापन और अंकन किया, ताकि जांच प्रक्रिया पारदर्शी और वैज्ञानिक तरीके से आगे बढ़ सके। (Avimukteshwaranand POCSO Case)
पहले नहीं दर्ज हुई थी FIR
वादी का आरोप है कि पहले पुलिस ने शिकायत के बावजूद एफआईआर दर्ज नहीं की थी। इसी कारण अदालत की शरण ली गई। एडीजे पोक्सो एक्ट विनोद कुमार चौरसिया के आदेश के बाद पुलिस ने कार्रवाई करते हुए मामला दर्ज किया और अब जांच शुरू कर दी है। (Avimukteshwaranand POCSO Case)



