Avimukteshwaranand Notice Reply: प्रयागराज माघ मेले में शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती और मेला प्रशासन के बीच चल रहा विवाद लगातार गहराता जा रहा है। मेला प्राधिकरण की ओर से सुप्रीम कोर्ट का हवाला देते हुए जारी नोटिस के बाद अब स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद का तीखा और स्पष्ट जवाब सामने आया है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा है कि शंकराचार्य कौन होगा, इसका निर्णय प्रशासन, मुख्यमंत्री या राष्ट्रपति नहीं बल्कि स्वयं शंकराचार्य परंपरा तय करती है।
Avimukteshwaranand Notice Reply: मेला प्रशासन का नोटिस और 24 घंटे की समयसीमा
प्रयागराज मेला प्रशासन ने ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती को नोटिस जारी कर 24 घंटे के भीतर यह स्पष्ट करने को कहा कि उन्होंने अपने नाम के आगे शंकराचार्य पदवी कैसे लिखी।
नोटिस में सुप्रीम कोर्ट का हवाला देते हुए कहा गया कि बिना वैधानिक प्रमाण के स्वयं को शंकराचार्य बताना नियमों के विरुद्ध हो सकता है।
Read : कैसे बन गए शंकराचार्य? 24 घंटे में देना होगा जवाब, मेला प्रशासन ने भेजा नोटिस
Avimukteshwaranand Notice Reply: स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद का सवाल – प्रशासन कैसे तय करेगा शंकराचार्य?
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने इस नोटिस पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए कहा, ‘क्या अब प्रशासन तय करेगा कि शंकराचार्य कौन है? क्या मुख्यमंत्री या राष्ट्रपति को यह अधिकार है?’
उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत के राष्ट्रपति को भी यह अधिकार नहीं है कि वह शंकराचार्य की नियुक्ति तय करें। उनके अनुसार, शंकराचार्य पद का निर्णय केवल शंकराचार्य परंपरा के अंतर्गत अन्य पीठों के शंकराचार्य ही कर सकते हैं।
Avimukteshwaranand Notice Reply: दो शंकराचार्यों का लिखित समर्थन होने का दावा
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने बड़ा दावा करते हुए कहा कि –
• द्वारका पीठ के शंकराचार्य
• श्रृंगेरी पीठ के शंकराचार्य
दोनों उन्हें सार्वजनिक रूप से और लिखित रूप में शंकराचार्य मान चुके हैं। उन्होंने बताया कि पिछले माघ मेले में दोनों शंकराचार्य उनके साथ स्नान भी कर चुके हैं, जो व्यावहारिक मान्यता का प्रमाण है।
Avimukteshwaranand Notice Reply: पुरी पीठ की मौन स्वीकृति पर दिया तर्क
पुरी पीठ के शंकराचार्य को लेकर उठ रहे सवालों पर उन्होंने कहा, ‘पुरी के शंकराचार्य ने न तो मेरा समर्थन किया है और न ही विरोध। यह उनकी मौन स्वीकृति है।’
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि सुप्रीम कोर्ट में दाखिल हलफनामे को लेकर भ्रम फैलाया गया। वास्तविक एफिडेविट में लिखा है कि उनसे समर्थन मांगा ही नहीं गया था, इसलिए समर्थन नहीं दिया गया।
Latest News Update Uttar Pradesh News, उत्तराखंड की ताज़ा ख़बर
Avimukteshwaranand Notice Reply: ज्योतिष पीठ का दूसरा शंकराचार्य कौन? – खुली चुनौती
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने प्रशासन और विरोधियों को खुली चुनौती देते हुए कहा, ‘अगर कोई कहता है कि ज्योतिष पीठ का कोई और शंकराचार्य है, तो सामने आकर नाम बताए और मुझसे बात करे।’ उन्होंने कहा कि अगर विवाद जानबूझकर खड़ा किया जा रहा है, तो यह दूषित भावना का परिणाम है।
Avimukteshwaranand Notice Reply: शिविर में नोटिस चस्पा करने पर भी उठे सवाल
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने आरोप लगाया कि मेला प्रशासन देर रात भारी पुलिस बल के साथ उनके शिविर पहुंचा और नोटिस चस्पा कर दिया। उन्होंने कहा –
• प्रशासन से सुबह नोटिस देने को कहा गया था
• खुद को कानूनगो बताने वाले अधिकारी ने नोटिस चस्पा कर दिया
• यह प्रक्रिया असम्मानजनक और नियमों के विरुद्ध है
Avimukteshwaranand Notice Reply: क्या बोले स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के वकील?
इस मामले में सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता पीएन मिश्रा स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद की ओर से पक्ष रखेंगे।
वकील पीएन मिश्रा ने कहा –
• सुप्रीम कोर्ट ने कहीं नहीं कहा कि स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद शंकराचार्य नहीं लिख सकते
• बल्कि सुप्रीम कोर्ट के आदेशों में उन्हें शंकराचार्य कहा गया है
• मेला प्रशासन का नोटिस न्यायिक प्रक्रिया में हस्तक्षेप है
उन्होंने चेतावनी दी कि यह मामला न्यायालय की अवमानना की श्रेणी में आ सकता है।
Avimukteshwaranand Notice Reply: क्या सुप्रीम कोर्ट तक जाएगा मामला?
जिस तरह से मेला प्रशासन सुप्रीम कोर्ट के आदेशों की व्याख्या कर रहा है और शंकराचार्य परंपरा को प्रशासनिक नियंत्रण में लाने की कोशिश हो रही है, उससे संकेत मिल रहे हैं कि यह विवाद जल्द ही सुप्रीम कोर्ट में एक बड़े धार्मिक और संवैधानिक मुद्दे के रूप में उभर सकता है।
पढ़े ताजा अपडेट : Hindi News, Today Hindi News, Breaking



