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टेक्नोलॉजी

India Defence Satellites: आसमान से होगी भारत की कड़ी निगरानी, 50 से ज्यादा जासूसी सैटेलाइट से मजबूत होगा देश का डिफेंस सेक्टर

Manisha
Last updated: 2026-01-21 2:38 अपराह्न
Manisha Published 2026-01-21
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India Defence Satellites
India Defence Satellites: आसमान से होगी भारत की कड़ी निगरानी, 50 से ज्यादा जासूसी सैटेलाइट से मजबूत होगा देश का डिफेंस सेक्टर
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India Defence Satellites: भारत अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा को और मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम उठाने जा रहा है। पाकिस्तान के साथ पिछले वर्ष बढ़े तनाव और सीमा विवाद से मिले अनुभवों के बाद अब देश अपनी सीमाओं की सुरक्षा सिर्फ जमीन और समुद्र से ही नहीं, बल्कि अंतरिक्ष से भी सख्ती से करने की तैयारी में है। इसके तहत भारत 50 से अधिक अत्याधुनिक निगरानी और जासूसी सैटेलाइट लॉन्च करने की योजना पर तेजी से काम कर रहा है, जिससे देश की निगरानी क्षमता में अभूतपूर्व बढ़ोतरी होगी।

Contents
सीमा विवाद से मिली सीख, बदली सुरक्षा रणनीतिनई तकनीक से लैस होंगे India Defence Satellitesस्पेस-बेस्ड सर्विलांस-3 पर तेज़ीग्राउंड स्टेशन से आगे की सोच150 सैटेलाइट का दीर्घकालिक लक्ष्यअंतरराष्ट्रीय परिदृश्य में भारत की स्थितिलॉन्च में चुनौतियां, लेकिन भरोसा कायम

सीमा विवाद से मिली सीख, बदली सुरक्षा रणनीति

पिछले साल पाकिस्तान के साथ उत्पन्न हुए युद्ध जैसे हालात ने भारत की निगरानी व्यवस्था की कुछ कमजोरियों को उजागर किया था। खासतौर पर रात के समय और बादलों के बीच सटीक तस्वीरें हासिल करने में दिक्कतें सामने आई थीं। इन्हीं अनुभवों से सबक लेते हुए अब भारत अपनी स्पेस-बेस्ड सर्विलांस क्षमता को नए स्तर पर ले जाने की तैयारी कर रहा है। सरकार का लक्ष्य है कि किसी भी संदिग्ध गतिविधि पर चौबीसों घंटे और हर मौसम में नजर रखी जा सके।

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नई तकनीक से लैस होंगे India Defence Satellites

भारत जिन नए India Defence Satellites को तैनात करने की योजना बना रहा है, वे पारंपरिक इलेक्ट्रो-ऑप्टिकल सिस्टम से आगे बढ़कर सिंथेटिक अपर्चर रडार (SAR) तकनीक से लैस होंगे। इस तकनीक की खासियत यह है कि यह अंधेरे, घने बादलों और खराब मौसम में भी हाई-रिजॉल्यूशन तस्वीरें लेने में सक्षम होती है। इससे सीमा क्षेत्रों में किसी भी तरह की हलचल पर बिना रुकावट नजर रखी जा सकेगी।

स्पेस-बेस्ड सर्विलांस-3 पर तेज़ी

स्पेस-बेस्ड सर्विलांस-3 (SBS-3) कार्यक्रम के तहत पहले चरण में 52 सैटेलाइट  को तेजी से लॉन्च करने की तैयारी की जा रही है। इन India Defence Satellites के जरिए संवेदनशील इलाकों की निगरानी पहले की तुलना में कहीं अधिक बार और सटीक तरीके से की जा सकेगी। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, इस कार्यक्रम के तहत पहला बैच अप्रैल तक कक्षा में स्थापित किया जा सकता है।

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ग्राउंड स्टेशन से आगे की सोच

सरकार सिर्फ India Defence Satellites लॉन्च तक सीमित नहीं रहना चाहती। निगरानी डेटा को और तेजी से साझा करने के लिए विदेशों में ग्राउंड स्टेशन स्थापित करने की संभावनाओं पर भी विचार किया जा रहा है। मध्य पूर्व, दक्षिण-पूर्व एशिया और स्कैंडिनेविया जैसे क्षेत्रों में ग्राउंड स्टेशन बनाए जाने पर चर्चा चल रही है, हालांकि इसके लिए संबंधित देशों की मंजूरी जरूरी होगी। इसके अलावा, सैटेलाइट के बीच सीधे डेटा ट्रांसफर की क्षमता विकसित करने पर भी काम हो रहा है, जिससे ग्राउंड स्टेशन पर निर्भरता कम हो सके।

150 सैटेलाइट का दीर्घकालिक लक्ष्य

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के अनुसार, भारत आने वाले वर्षों में कुल 150 नए India Defence Satellites तैनात करने की योजना बना रहा है। इस महत्वाकांक्षी परियोजना पर लगभग 26,000 करोड़ रुपये की लागत आने का अनुमान है। इन सैटेलाइट का उद्देश्य न सिर्फ सीमा सुरक्षा को मजबूत करना है, बल्कि अंतरिक्ष में मौजूद भारतीय परिसंपत्तियों की रक्षा भी करना है।

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अंतरराष्ट्रीय परिदृश्य में भारत की स्थिति

वर्तमान में भारत के पास कक्षा में 100 से अधिक सक्रिय सैटेलाइट हैं, जबकि पाकिस्तान के पास यह संख्या बेहद सीमित है। हालांकि, पिछले टकराव के दौरान यह सामने आया था कि पाकिस्तान को चीन से तकनीकी समर्थन मिला, जिससे उसे रात के समय निगरानी में बढ़त मिली। इसी वजह से भारत को कुछ मामलों में विदेशी कंपनियों से सैटेलाइट डेटा खरीदना पड़ा था।

लॉन्च में चुनौतियां, लेकिन भरोसा कायम

इन जासूसी India Defence Satellites को लॉन्च करने के लिए इसरो अपने मौजूदा रॉकेट सिस्टम का उपयोग करेगा। हाल के महीनों में इसरो को कुछ असफलताओं का सामना करना पड़ा है, लेकिन कई अहम मिशन सफल भी रहे हैं। साथ ही, निजी क्षेत्र की स्टार्टअप कंपनियां जैसे स्काईरूट एयरोस्पेस भी भारत की स्पेस निगरानी क्षमताओं को मजबूत करने में अहम भूमिका निभा रही हैं।

कुल मिलाकर, अंतरिक्ष आधारित निगरानी की यह नई रणनीति भारत के डिफेंस सेक्टर को तकनीकी रूप से कहीं अधिक सक्षम बनाएगी। इससे न केवल सीमाओं की सुरक्षा मजबूत होगी, बल्कि भविष्य की किसी भी चुनौती से निपटने में देश को निर्णायक बढ़त मिलेगी।

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