Gupt Navratri 2026: हिंदू धर्म में नवरात्रि का पर्व अत्यंत पवित्र और शुभ माना जाता है। नवरात्रि का शाब्दिक अर्थ है ‘नौ रातें’, जो मां दुर्गा के नौ रूपों की पूजा के लिए समर्पित होती हैं। साल में चार नवरात्रि मनाई जाती हैं, जिनमें दो प्रमुख (प्रकट) और दो गुप्त नवरात्रि होती हैं। गुप्त नवरात्रि विशेष रूप से माघ और आषाढ़ मास में आती है और इसे अधिकतर लोग गुप्त साधना और शक्ति पूजा के लिए अपनाते हैं।
साल 2026 में माघ मास की गुप्त नवरात्रि 19 जनवरी 2026, सोमवार से शुरू होकर 27 जनवरी 2026, मंगलवार तक चलेगी। ज्योतिषाचार्य डॉ. अनीष व्यास के अनुसार, इस बार गुप्त नवरात्रि सर्वार्थसिद्धि योग और रवि योग में प्रारंभ हो रही है, जिसका अर्थ है कि इस समय किए गए सभी धार्मिक, आध्यात्मिक और मांगलिक कार्य विशेष फलदायी होंगे।
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Gupt Navratri 2026: गुप्त नवरात्रि 2026 की तिथि और समय
• आरंभ: 19 जनवरी 2026, सोमवार सुबह 01:21 बजे
• समाप्ति: 27 जनवरी 2026, मंगलवार सुबह 02:14 बजे
• घटस्थापना (कलश स्थापना) मुहूर्त: सुबह 07:14 से 10:46 बजे
• अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 12:11 से 12:53 बजे
विशेष योग के दिन
• 19 जनवरी: कुमार योग, सर्वार्थ सिद्धि
• 20 जनवरी: द्विपुष्कर योग, राजयोग
• 21 जनवरी: राजयोग, रवि योग
• 22 जनवरी: रवि योग
• 23 जनवरी: कुमार योग, रवि योग
• 24 जनवरी: रवि योग
• 25 जनवरी: रवि योग, सर्वार्थ सिद्धि
• 27 जनवरी: सर्वार्थ सिद्धि योग
इन नौ दिनों में मां दुर्गा की साधना और पूजा करने से मानसिक शांति, स्वास्थ्य लाभ, सफलता और समृद्धि की प्राप्ति होती है।
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Gupt Navratri 2026: गुप्त नवरात्रि का महत्व
गुप्त नवरात्रि का नाम इसलिए पड़ा क्योंकि इस दौरान मां दुर्गा की साधना और पूजा को गोपनीय और गुप्त रूप से किया जाता है। इसे तंत्र और शक्ति साधना का विशेष समय माना जाता है।
इस नवरात्रि में निम्नलिखित चीजों की पूजा की जाती है –
• 10 महाविद्याएं: मां काली, तारा, त्रिपुर सुंदरी, भुवनेश्वरी, छिन्नमस्ता, त्रिपुर भैरवी, धूमावती, बगलामुखी, मातंगी और कमला।
• साधना विधि: मंत्र जाप, हवन, श्री दुर्गा सप्तशती का पाठ या राम रक्षा स्त्रोत का नौ दिन का संकल्प।
• अखण्ड ज्योति: लगातार दीप जलाना और साधना करना लाभकारी माना जाता है।
मान्यता है कि जितनी अधिक गोपनीयता और एकाग्रता के साथ साधना की जाएगी, उतना ही जल्दी और प्रभावशाली फल प्राप्त होगा।
Gupt Navratri 2026: गुप्त नवरात्रि 2026 पूजा विधि
पूजा सामग्री
• मां दुर्गा की प्रतिमा या चित्र
• सिंदूर, केसर, कपूर
• जौ, धूप, वस्त्र
• दर्पण, कंगन-चूड़ी, सुगंधित तेल
• लाल पुष्प, दूर्वा, मेंहदी, बिंदी, सुपारी, हल्दी
• पटरा, आसन, चौकी, रोली, मौली
• पुष्पहार, बेलपत्र, कमलगट्टा, दीपक, दीपबत्ती
• नैवेद्य: मधु, शक्कर, पंचमेवा, जायफल, जावित्री, नारियल
• रेत, मिट्टी, पान, लौंग, इलायची, गंगाजल
पूजा विधि
• कलश स्थापना: कलश में जल भरें। धातु या मिट्टी का कलश उपयोग करें।
• मां दुर्गा की स्थापना: लाल चुनरी और सिंदूर अर्पित करें।
• पूजा सामग्री अर्पण: लाल पुष्प, नैवेद्य, रोली, मौली आदि रखें।
• दीपक प्रज्वलन: सरसों के तेल से दीपक जलाएं।
• मंत्र जाप: ‘ॐ दुं दुर्गायै नमः’ का जाप करें।
• नौ दिन की साधना: हवन, सप्तशती पाठ या नौ दिन का संकल्प लेकर नियमित पूजा करें।
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Gupt Navratri 2026: विशेष योग और लाभ
इस बार गुप्त नवरात्रि के दौरान दो सर्वार्थ सिद्धि योग और चार रवि योग बन रहे हैं। इसका अर्थ है कि इस दौरान किए गए धार्मिक, आध्यात्मिक और शुभ कार्य विशेष रूप से फलदायी होंगे। ग्रह योग और सूर्य का उत्तरायण होने के कारण यह समय साधना, पूजा और तंत्र कर्म के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है।
गुप्त नवरात्रि के दौरान नियमित पूजा करने से मानसिक शांति, आत्मिक बल, धन-संपत्ति और स्वास्थ्य में वृद्धि होती है। इसे हर आयु वर्ग के व्यक्ति कर सकते हैं और इसे अपने जीवन में सकारात्मक ऊर्जा, सौभाग्य और सफलता लाने का अवसर माना जाता है।
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