Rajasthan Oil Leak: पश्चिमी राजस्थान के बाड़मेर जिले से एक असामान्य और चिंताजनक घटना सामने आई है। काउखेड़ा गांव में एक किसान के खेत की जमीन अचानक फट गई और उसमें से कच्चा तेल (Crude Oil) बाहर आने लगा। पिछले लगभग 40 घंटों से जारी इस रिसाव ने गांव में दहशत का माहौल पैदा कर दिया है। ग्रामीण इसे प्राकृतिक घटना मानने को तैयार नहीं हैं और इसकी वजह जानने की मांग कर रहे हैं।
बताया जा रहा है कि Rajasthan Oil Leak उस इलाके की है जहां आसपास पहले से तेल उत्पादन से जुड़ी गतिविधियां चल रही हैं। किसान जब रोजाना की तरह अपने खेत का जायजा लेने पहुंचे तो उन्हें जमीन के एक हिस्से में लंबी दरार दिखाई दी। कुछ ही देर बाद उस दरार से काले रंग का गाढ़ा तरल बाहर निकलने लगा। पहले तो इसे पानी या कीचड़ समझा गया, लेकिन तेज गंध और रंग देखकर लोगों को अंदेशा हुआ कि यह कच्चा तेल हो सकता है।
फसल और मिट्टी पर संकट
रिसाव के कारण खेत का एक हिस्सा पूरी तरह काला और चिपचिपा हो गया है। किसान का कहना है कि इस जमीन पर हाल ही में बुवाई की गई थी और फसल की अच्छी उम्मीद थी। अब उन्हें डर है कि तेल के कारण मिट्टी की उर्वरता खत्म हो सकती है। यदि ऐसा हुआ तो आने वाले कई मौसम तक खेती करना मुश्किल हो जाएगा।
ग्रामीणों का कहना है कि तेल का फैलाव धीरे-धीरे बढ़ रहा है। यदि समय रहते इसे नहीं रोका गया तो आसपास के खेत भी प्रभावित हो सकते हैं। पशुपालकों ने भी चिंता जताई है कि यदि मवेशी अनजाने में इस हिस्से में चले गए तो उनके स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ सकता है।
दहशत में गांव, बच्चों को दूर रहने की हिदायत
तेज गंध और जमीन से लगातार निकलते तरल को देखकर गांव के लोग सहमे हुए हैं। कई परिवारों ने अपने बच्चों को उस इलाके से दूर रहने के निर्देश दिए हैं। महिलाओं का कहना है कि उन्हें आग लगने या किसी अन्य दुर्घटना का भय सता रहा है। हालांकि अभी तक किसी तरह की जनहानि या बड़ी दुर्घटना की सूचना नहीं है।
गांव के बुजुर्गों का कहना है कि उन्होंने पहले कभी इस तरह जमीन फटते और तेल निकलते नहीं देखा। इलाके में तेल (Crude Oil) उत्पादन नया नहीं है, लेकिन खेत के बीचोंबीच इस तरह का रिसाव असामान्य है।
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प्रशासन और तकनीकी टीम सक्रिय
Rajasthan Oil Leak घटना की सूचना मिलते ही जिला प्रशासन और संबंधित कंपनी की तकनीकी टीम मौके पर पहुंची। एहतियात के तौर पर रिसाव वाले हिस्से को घेराबंदी कर सुरक्षित कर दिया गया है। अधिकारियों ने बताया कि प्रारंभिक जांच में संभावना है कि भूमिगत दबाव में बदलाव या किसी पाइपलाइन में तकनीकी समस्या के कारण यह स्थिति बनी हो।
विशेषज्ञों ने मिट्टी और तरल पदार्थ के नमूने एकत्र किए हैं, जिन्हें प्रयोगशाला जांच के लिए भेजा गया है। प्रशासन का कहना है कि रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट रूप से कारण बताया जा सकेगा। फिलहाल प्राथमिकता रिसाव को नियंत्रित करना और आसपास के क्षेत्र को सुरक्षित रखना है।
मुआवजे और स्थायी समाधान की मांग
प्रभावित किसान ने प्रशासन से उचित मुआवजे की मांग की है। उनका कहना है कि यदि जमीन की उपजाऊ शक्ति नष्ट हो गई तो परिवार की आय पर गंभीर असर पड़ेगा। ग्रामीणों ने भी मांग की है कि भविष्य में ऐसी घटनाओं से बचाव के लिए नियमित निगरानी और सुरक्षा मानकों की सख्ती से समीक्षा की जाए।
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स्थानीय लोगों का यह भी कहना है कि औद्योगिक गतिविधियों से विकास जरूर होता है, लेकिन सुरक्षा और पर्यावरण संरक्षण को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। उनका मानना है कि यदि समय-समय पर तकनीकी जांच और रखरखाव होता रहे तो ऐसी घटनाओं की संभावना कम की जा सकती है।
विशेषज्ञों की राय
ऊर्जा क्षेत्र के जानकारों के अनुसार, तेल (Crude Oil) उत्पादन क्षेत्रों में कभी-कभी भूमिगत दबाव या प्राकृतिक दरारों के कारण सतह पर रिसाव हो सकता है। हालांकि Rajasthan Oil Leak घटनाएं दुर्लभ होती हैं और आमतौर पर तकनीकी कारणों से जुड़ी होती हैं। विस्तृत भू-वैज्ञानिक जांच के बाद ही किसी निष्कर्ष पर पहुंचा जा सकता है।
फिलहाल बाड़मेर के काउखेड़ा गांव में लोग सतर्क हैं और प्रशासनिक कार्रवाई का इंतजार कर रहे हैं। Rajasthan Oil Leak घटना एक बार फिर याद दिलाती है कि औद्योगिक विकास के साथ-साथ स्थानीय समुदाय की सुरक्षा और पर्यावरण संतुलन को प्राथमिकता देना कितना जरूरी है। जांच रिपोर्ट आने तक गांव में अनिश्चितता और चिंता का माहौल बना रहेगा।
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