Dhirendra Shastri Pushkar Visit: राजस्थान की मार्बल सिटी किशनगढ़ शुक्रवार को भक्ति और उत्साह के रंग में रंगी नजर आई, जब धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री का विमान किशनगढ़ एयरपोर्ट पर उतरा। उनके आगमन की खबर पहले से ही श्रद्धालुओं के बीच उत्साह का विषय बनी हुई थी, जिसका नतीजा एयरपोर्ट परिसर में उमड़ी भारी भीड़ के रूप में देखने को मिला। ढोल-नगाड़ों की थाप, फूल-मालाओं की खुशबू और ‘जय बालाजी सरकार’ के गूंजते जयकारों के बीच पीठाधीश्वर (Dhirendra Shastri Pushkar Visit) का स्वागत किसी आध्यात्मिक उत्सव से कम नहीं था। पूरा माहौल भक्तिमय हो गया और हर ओर श्रद्धा का ज्वार दिखाई दिया।
एयरपोर्ट बना भक्ति का केंद्र
जैसे ही विमान ने रनवे को छुआ, पहले से मौजूद सैकड़ों श्रद्धालु उत्साह से झूम उठे। एयरपोर्ट परिसर में सुरक्षा के बीच भी आस्था का उफान साफ झलक रहा था। लोगों ने फूल बरसाकर, तिलक लगाकर और मालाएं पहनाकर उनका अभिनंदन किया। स्थानीय प्रशासन को भीड़ को नियंत्रित करने के लिए अतिरिक्त व्यवस्था करनी पड़ी। श्रद्धालुओं में युवा, महिलाएं और बुजुर्ग सभी शामिल थे। कई भक्तों ने हाथ जोड़कर आशीर्वाद लिया तो कुछ ने दूर से ही दर्शन कर अपने आप को धन्य माना।
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आसपास के जिलों से उमड़े श्रद्धालु
केवल किशनगढ़ ही नहीं, बल्कि अजमेर और पुष्कर सहित आसपास के क्षेत्रों से भी बड़ी संख्या में लोग पहुंचे। भक्तों का कहना था कि वे केवल एक झलक पाने के लिए घंटों पहले से एयरपोर्ट पर मौजूद थे। कुछ श्रद्धालुओं ने बताया कि धीरेंद्र शास्त्री (Dhirendra Shastri Pushkar Visit) के प्रवचनों और कथाओं से उन्हें मानसिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा मिलती है। यही कारण है कि उनके आगमन को लेकर लोगों में विशेष उत्साह देखने को मिला।
किशनगढ़ से पुष्कर तक आस्था की कतारें
एयरपोर्ट पर संक्षिप्त प्रवास के बाद धीरेंद्र शास्त्री (Dhirendra Shastri Pushkar Visit) का काफिला पुष्कर के लिए रवाना हुआ। जैसे ही उनका वाहन काफिला आगे बढ़ा, सड़क के दोनों ओर श्रद्धालुओं की लंबी कतारें लग गईं। भक्ति गीतों और जयकारों के बीच लोग हाथ जोड़कर उनका अभिवादन करते रहे। कई स्थानों पर स्थानीय संगठनों ने पुष्प वर्षा कर स्वागत किया। यात्रा मार्ग पर सुरक्षा और यातायात की विशेष व्यवस्था की गई थी, ताकि श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो।
पुष्कर में पारंपरिक अंदाज में स्वागत
पुष्कर पहुंचने पर भी भव्य स्वागत की झलक देखने को मिली। प्रवेश द्वार पर बैंड-बाजों और पारंपरिक राजस्थानी रीति-रिवाजों के साथ उनका अभिनंदन किया गया।स्थानीय नागरिकों और श्रद्धालुओं ने फूल-मालाओं के साथ स्वागत कर आस्था का प्रदर्शन किया। पूरे शहर में धार्मिक माहौल बन गया, जिससे वातावरण आध्यात्मिक ऊर्जा से भर गया।
सामाजिक और आध्यात्मिक प्रभाव
इस यात्रा ने केवल धार्मिक उत्साह ही नहीं बढ़ाया, बल्कि स्थानीय स्तर पर सामाजिक एकजुटता का भी संदेश दिया। बड़ी संख्या में लोगों का एक साथ एकत्र होना, भक्ति के माध्यम से सकारात्मकता का प्रसार करना और सांस्कृतिक परंपराओं को जीवंत रखना इस आयोजन की खास विशेषता रही। माना जा रहा है कि ऐसे आयोजन न केवल धार्मिक भावनाओं को सशक्त करते हैं, बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था और पर्यटन को भी बढ़ावा देते हैं। किशनगढ़ से पुष्कर तक का यह सफर केवल एक यात्रा नहीं, बल्कि आस्था और सामाजिक ऊर्जा का प्रतीक बन गया।
धीरेंद्र शास्त्री (Dhirendra Shastri Pushkar Visit) के आगमन ने राजस्थान की इस धरती को एक बार फिर भक्ति के रंग में रंग दिया। किशनगढ़ एयरपोर्ट से लेकर पुष्कर तक हर जगह श्रद्धालुओं की आस्था और उत्साह देखने लायक था। यह यात्रा न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण रही, बल्कि सामाजिक समरसता और सांस्कृतिक चेतना को भी नई ऊर्जा देने वाली साबित हुई।
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