Mamata Banerjee News: भारत की राजनीति में केंद्रीय जांच एजेंसियों और ताकतवर मुख्यमंत्रियों की टकराहट कोई नई बात नहीं है, लेकिन इतिहास गवाह है कि CBI और ED से सीधे टकराने का अंजाम अक्सर जेल की सलाखों तक पहुंचा है। लालू प्रसाद यादव, अरविंद केजरीवाल और हेमंत सोरेनतीनों ने अपने-अपने दौर में केंद्रीय एजेंसियों से पंगा लिया और अंततः गिरफ्तारी से नहीं बच पाए।
अब इसी कड़ी में पश्चिम बंगाल की Mamata Banerjee बनर्जी का नाम चर्चा में है। आई-पैक (I-PAC) के दफ्तर पर ED की छापेमारी, मौके पर खुद ममता का पहुंचना और एजेंसी के काम में हस्तक्षेप के आरोपमामला अब सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच चुका है। सवाल यही है कि क्या ममता बनर्जी भी वही राह पकड़ रही हैं, जिसका अंजाम पहले तीन मुख्यमंत्री भुगत चुके हैं?
Mamata Banerjee News- CBI-ED से टकराव का इतिहास
केंद्रीय एजेंसियों से सीधे टकराव का इतिहास बताता है कि राजनीतिक ताकत कानून से बड़ी नहीं होती। जिन नेताओं ने एजेंसियों को चुनौती दी, वे या तो जेल गए या सत्ता छोड़ने पर मजबूर हुए।
CBI से भिड़े, लेकिन गिरफ्तारी से नहीं बचे
बिहार के मुख्यमंत्री रहते लालू प्रसाद यादव पर जब चारा घोटाले के आरोप लगे, तो CBI जांच शुरू हुई। समर्थकों के भारी विरोध और राजनीतिक दबाव के बावजूद 30 जुलाई 1997 को CBI ने लालू को गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तारी से पहले उन्होंने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देकर राबड़ी देवी को सीएम बनाया, लेकिन यह रणनीति भी उन्हें सजा से नहीं बचा सकी। आजादी के बाद यह पहला मौका था, जब किसी मौजूदा या पूर्व मुख्यमंत्री को CBI ने गिरफ्तार किया।
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Mamata Banerjee News- अरविंद केजरीवाल
दिल्ली के मुख्यमंत्री रहते अरविंद केजरीवाल पर शराब नीति घोटाले में मनी लॉन्ड्रिंग का आरोप लगा। ED ने पूछताछ के लिए 9 नोटिस भेजे, लेकिन केजरीवाल न पेश हुए, न जवाब दिया। आखिरकार 21 मार्च 2024 को ED ने उन्हें गिरफ्तार कियाइतिहास में पहली बार कोई मुख्यमंत्री पद पर रहते गिरफ्तार हुआ। जमानत के बावजूद राहत नहीं मिली और 26 जून 2024 को CBI ने तिहाड़ जेल से ही दूसरी गिरफ्तारी कर ली। ED से पंगा लेना केजरीवाल को सत्ता और साखदोनों पर भारी पड़ा।
Mamata Banerjee News- हेमंत सोरेन
झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन पर जमीन घोटाले और मनी लॉन्ड्रिंग का मामला बना। ED के 10 नोटिस भेजे गए, लेकिन उन्होंने अदालतों की शरण लेकर समय टालने की कोशिश की। आखिरकार 31 जनवरी 2024 को ED ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तारी से ठीक पहले उन्होंने इस्तीफा देकर चंपाई सोरेन को सीएम घोषित किया, लेकिन बाद में यह फैसला राजनीतिक भूल साबित हुआ।
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I-PAC रेड से सुप्रीम कोर्ट तक
जनवरी 2026 में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने इंडियन पॉलिटिकल एक्शन कमेटी (I-PAC) के दफ्तर समेत कई ठिकानों पर छापेमारी की। ED का दावा है कि यह कार्रवाई कोयला घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग केस में की गई। I-PAC 2019 से TMC के लिए चुनावी रणनीति तैयार कर रही है। छापेमारी के दौरान खुद ममता बनर्जी पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ मौके पर पहुंच गई। ED का आरोप है कि एजेंसी के काम में बाधा डाली गई।
Mamata Banerjee News- दस्तावेज और फाइलें छीनी गई
I-PAC के मालिक प्रतीक जैन का मोबाइल जब्त कर लिया गया। सुप्रीम कोर्ट में टकराव, नाराज दिखी अदालत ED ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर CBI जांच की मांग की है। याचिका में ममता बनर्जी, DGP राजीव कुमार और अन्य अधिकारियों पर कानून व्यवस्था में बाधा डालने का आरोप लगाया गया है। सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी बेहद सख्त रही। अदालत ने कहा कि अगर इस तरह की घटनाओं पर रोक नहीं लगी, तो अन्य राज्यों में भी कानूनहीनता की स्थिति पैदा हो सकती है।
Mamata Banerjee बनाम केंद्रीय एजेंसियां
यह पहला मौका नहीं है जब ममता बनर्जी केंद्रीय एजेंसियों से टकराई हों। 2018 में CBI को दी गई सामान्य सहमति वापस ली। 2019 में CBI बनाम कोलकाता पुलिस टकराव, जहां CBI अधिकारियों को हिरासत में लिया गया। ममता ने रातभर धरना दिया और मौके पर कैबिनेट बैठक तक की 2024 में सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार की याचिका खारिज कर दी
क्या ममता भी वही गलती दोहरा रही हैं?
लालू यादव, अरविंद केजरीवाल और हेमंत सोरेनतीनों की कहानी एक ही सबक देती है। ED और CBI से सीधी टक्कर का नतीजा अक्सर गिरफ्तारी होता है। अब जबकि मामला सुप्रीम कोर्ट में है और अदालत के रुख सख्त दिख रहे हैं, तो राजनीतिक गलियारों में यही सवाल गूंज रहा है। क्या Mamata Banerjee अगला बड़ा नाम होंगी, या बंगाल की राजनीति कोई नया मोड़ लेगी?



