Galgotia University controversy: उत्तर प्रदेश विधानसभा के शुक्रवार के सत्र में शिक्षा और स्वास्थ्य व्यवस्था के मुद्दों के बीच गलगोटिया यूनिवर्सिटी का रोबोट डॉग विवाद चर्चा का केंद्र बन गया। नेता प्रतिपक्ष माता प्रसाद पांडेय ने निजी विश्वविद्यालयों पर कटाक्ष करते हुए कहा- गलगोटिया यूनिवर्सिटी को देखिए पता नहीं कहां का कुत्ता ले आए। कह रहे हैं हमने बनाया। उनका यह बयान सदन में हंसी का माहौल पैदा कर गया। सपा विधायक शिवपाल यादव और अन्य सदस्य भी इस पर खिलखिला उठे।
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Galgotia University controversy: इंडिया AI इम्पैक्ट समिट में शुरू हुआ विवाद
दरअसल, यह मामला दिल्ली में आयोजित इंडिया AI इम्पैक्ट समिट से शुरू हुआ। गलगोटिया यूनिवर्सिटी ने वहां एक रोबोट डॉग को अपने इनोवेशन के तौर पर पेश किया। इसके बाद सोशल मीडिया पर दावा किया गया कि यह रोबोट असल में एक चीनी कंपनी का प्रोडक्ट है, जिसे यूनिवर्सिटी ने अपना बताने की कोशिश की। यूनिवर्सिटी ने सफाई दी कि यह उनका शोध प्रोजेक्ट है, लेकिन आरोप और वीडियो वायरल होने के कारण विवाद अभी भी कायम है।
Galgotia University controversy: माता प्रसाद पांडेय ने उठाया मुद्दा
सदन में नेता प्रतिपक्ष ने निजी विश्वविद्यालयों के बढ़ते प्रभाव पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि गलगोटिया यूनिवर्सिटी जैसे संस्थान शिक्षा के विस्तार की बजाय पूंजीपतियों के हित बढ़ा रहे हैं। उनके अनुसार, निजी विश्वविद्यालयों में फीस अधिक है और छात्रों की शिक्षा पर जोर कम है। माता प्रसाद ने कहा कि जब यूनिवर्सिटी बनाने का बिल आया था, तब विपक्ष ने विरोध किया था। उनका मानना था कि इससे शिक्षा नहीं बढ़ेगी, बल्कि संस्थापकों की पूंजी बढ़ेगी।
Galgotia University controversy: फीस और सुविधा का मामला
माता प्रसाद ने लखनऊ यूनिवर्सिटी का उदाहरण देते हुए कहा कि सरकारी संस्थानों में फीस सस्ती है और शिक्षा आम छात्रों के लिए सुलभ है। वहीं, निजी संस्थानों में उच्च शुल्क लेने की प्रवृत्ति है। उन्होंने जोर देकर कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल कमाई नहीं होना चाहिए। उनका कहना था कि निजी विश्वविद्यालयों के बढ़ते प्रभाव से शिक्षा की गुणवत्ता पर असर पड़ सकता है।
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Galgotia University controversy: सदन में हल्की-फुल्की हंसी के बीच गंभीर सवाल
माता प्रसाद के कटाक्ष के बाद सदन में हल्की हंसी छा गई, लेकिन उनका मुद्दा गंभीर था। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि क्या निजी विश्वविद्यालय शोध और शिक्षा के बजाय सिर्फ मार्केटिंग और प्रॉफिट पर ध्यान दे रहे हैं। सदन में यह चर्चा शिक्षा नीति और निजी संस्थानों की जिम्मेदारी पर भी प्रकाश डाल रही थी।
Galgotia University controversy: शिक्षा सुधार और भविष्य की चुनौती
सत्र में उठाए गए सवाल दर्शाते हैं कि राज्य सरकार के सामने शिक्षा और निजी विश्वविद्यालयों के मुद्दे पर संतुलन बनाना एक बड़ी चुनौती है। माता प्रसाद का कहना था कि सरकारी विश्वविद्यालयों को मजबूत किया जाना चाहिए और निजी संस्थानों की निगरानी बढ़ाई जानी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि छात्र की भलाई और शोध को प्राथमिकता दी जानी चाहिए, न कि सिर्फ संस्थापकों के फायदे को।
Galgotia University controversy: रोबोट विवाद से शिक्षा नीति तक
गलगोटिया यूनिवर्सिटी का रोबोट डॉग विवाद सिर्फ तकनीकी या प्रोजेक्ट का मसला नहीं रहा, बल्कि इससे यह सवाल भी उठता है कि निजी विश्वविद्यालय शिक्षा में कितनी जिम्मेदारी निभा रहे हैं। नेता प्रतिपक्ष के कटाक्ष और सदन में चर्चा ने यह साफ किया कि शिक्षा और पूंजी के बीच संतुलन बनाए रखना आज के समय की बड़ी जरूरत है।
इस पूरे विवाद ने यह भी साबित किया कि डिजिटल और तकनीकी नवाचार की दुनिया में पारदर्शिता और सत्यापन कितना जरूरी है। साथ ही, यह मामला यह याद दिलाता है कि छात्र, अभिभावक और समाज भी इस प्रक्रिया में सतर्क रहें ताकि शिक्षा केवल ज्ञान और कौशल के लिए हो, सिर्फ पैसों के लिए नहीं।
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