US India Trade Deal Controversy: भारतीय राजनीति एक बार फिर गरमा गई है। इस बार मुद्दा अमेरिका के साथ कथित ट्रेड डील और उसके असर का है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने सीधे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर आरोप लगाया है कि वे अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दबाव में ऐसा समझौता कर रहे हैं जिससे भारतीय कृषि व्यवस्था की नींव कमजोर हो सकती है।
राहुल गांधी ने कहा कि यह डील भारतीय किसानों के हितों के खिलाफ है और कांग्रेस पार्टी देश के किसानों को’बलि का बकरा’ नहीं बनने देगी। उनके इस बयान ने राजनीतिक गलियारों में बहस को और तेज कर दिया है।
US India Trade Deal Controversy: भारतीय कृषि को खतरा या राजनीतिक बयानबाजी?
राहुल गांधी का दावा है कि इस एग्रीमेंट से अमेरिकी एग्रीकल्चरल प्रोडक्ट्स की भारत में ज्यादा पहुंच होगी, जिससे भारतीय किसानों के लिए मुकाबला करना और मुश्किल हो जाएगा। उनका कहना है कि अगर सस्ते अमेरिकी अनाज, डेयरी और एग्रीकल्चरल प्रोडक्ट्स भारतीय बाजार में आ गए, तो छोटे और मीडियम साइज के किसानों को भारी नुकसान हो सकता है।
उन्होंने खास तौर पर केरल और दक्षिण भारत के किसानों का जिक्र करते हुए कहा कि इसका सीधा असर मसाले, नारियल, रबर और दूसरे एग्रीकल्चरल प्रोडक्ट्स पर पड़ेगा। उनका आरोप है कि सरकार ने किसानों से सलाह किए बिना यह कदम उठाया।
US India Trade Deal Controversy: क्या है पूरा मामला?
भारत और अमेरिका के बीच ट्रेड रिलेशन लंबे समय से मजबूत रहे हैं। दोनों देशों के बीच इंपोर्ट-एक्सपोर्ट के आंकड़े लगातार बढ़ रहे हैं। हालांकि, जब एग्रीकल्चर सेक्टर की बात आती है, तो भारत ने हमेशा सावधानी वाला रवैया अपनाया है।
अमेरिका चाहता है कि भारत अपने एग्रीकल्चर मार्केट को और खोले ताकि अमेरिकी किसानों को भी भारतीय मार्केट से फायदा हो सके। भारत का तर्क है कि यहां खेती मुख्य रूप से छोटे किसानों पर आधारित है, जिनकी इनकम और रोजी-रोटी पहले से ही मुश्किलों में है।
यहीं से पॉलिटिक्स गरमा जाती है। राहुल गांधी का आरोप है कि प्रधानमंत्री मोदी ने अमेरिकी दबाव में किसानों के हितों से समझौता किया है।
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US India Trade Deal Controversy: कांग्रेस का रुख – किसानों के साथ खड़ी है पार्टी
राहुल गांधी ने साफ कहा कि कांग्रेस पार्टी भारतीय किसानों के खिलाफ किसी भी पॉलिसी का विरोध करेगी। उन्होंने यह भी कहा कि अगर जरूरत पड़ी तो देश भर में आंदोलन शुरू किया जाएगा।
कांग्रेस का दावा है कि खेती सिर्फ एक आर्थिक मुद्दा नहीं है, बल्कि लाखों परिवारों के गुजारे से जुड़ा मामला है। इसलिए, किसी भी इंटरनेशनल समझौते से पहले पूरी चर्चा और ट्रांसपेरेंसी जरूरी है।
US India Trade Deal Controversy: BJP का संभावित तर्क क्या हो सकता है?
हालांकि सरकार ने इस बयान पर सीधे तौर पर कोई जवाब नहीं दिया है, लेकिन BJP का आम तौर पर यह रुख रहा है कि भारत जो भी इंटरनेशनल डील करता है, वह देश के हित में होती है। सरकार का तर्क यह हो सकता है कि ग्लोबल ट्रेड में हिस्सेदारी से भारतीय किसानों को भी नए मार्केट मिलेंगे।
BJP अक्सर कहती रही है कि भारत को ग्लोबल इकॉनमी में एक मजबूत रोल निभाने की जरूरत है, और इसके लिए ट्रेड एग्रीमेंट जरूरी हैं। सरकार यह भी दावा कर सकती है कि किसी भी डील में किसानों के हितों को नजरअंदाज नहीं किया गया है।
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US India Trade Deal Controversy: किसानों पर असल में क्या असर हो सकता है?
एक्सपर्ट्स के मुताबिक, किसी भी ट्रेड डील का असर तुरंत नहीं दिखता है। यह टैरिफ, कोटा और सब्सिडी जैसे तय किए गए प्रोविजन पर निर्भर करता है। अगर इंपोर्ट ड्यूटी में काफी कमी की जाती है, तो विदेशी प्रोडक्ट सस्ते हो सकते हैं। इससे घरेलू प्रोड्यूसर्स पर दबाव बढ़ सकता है।
दूसरी ओर, अगर भारतीय एग्रीकल्चरल प्रोडक्ट्स को US में बेहतर एक्सेस मिलता है, तो एक्सपोर्ट भी बढ़ सकता है। इसका मतलब है कि तस्वीर पूरी तरह से ब्लैक एंड व्हाइट नहीं है, लेकिन इसे एक बड़ा पॉलिटिकल मुद्दा बनाया जा रहा है।
US India Trade Deal Controversy: क्या यह मामला 2026 के चुनावी समीकरण से जुड़ा है?
पॉलिटिकल एनालिस्ट का मानना है कि यह बयान सिर्फ एक इकोनॉमिक मुद्दा नहीं, बल्कि चुनावी स्ट्रैटेजी का हिस्सा हो सकता है। भारत में किसानों का मुद्दा हमेशा से सेंसिटिव रहा है।
कृषि कानूनों के खिलाफ हाल के विरोध प्रदर्शनों ने साबित कर दिया है कि किसान राजनीति का रुख बदल सकते हैं। इसलिए, राहुल गांधी के बयान को ग्रामीण वोट बैंक को लुभाने की कोशिश के तौर पर भी देखा जा सकता है।
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