UCC Strategy: भारतीय राजनीति में इन दिनों UCC Strategy यानी Uniform Civil Code को लेकर बहस तेज हो गई है। भारतीय जनता पार्टी अब इस मुद्दे को सीधे राष्ट्रीय स्तर पर लागू करने के बजाय राज्यों के जरिए आगे बढ़ाने की रणनीति पर काम कर रही है। पश्चिम बंगाल में हालिया घोषणाओं के बाद यह साफ हो गया है कि BJP की UCC Strategy अब चरणबद्ध तरीके से लागू करने की दिशा में आगे बढ़ रही है।
पश्चिम बंगाल से UCC Strategy को मिला नया राजनीतिक मंच
कोलकाता में पार्टी का घोषणापत्र जारी करते हुए केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah ने ऐलान किया कि यदि भाजपा पश्चिम बंगाल में सत्ता में आती है, तो राज्य में Uniform Civil Code लागू किया जाएगा। इससे पहले असम में भी इसी तरह का वादा किया जा चुका है।
यह कदम केवल चुनावी वादा नहीं माना जा रहा, बल्कि इसे BJP की व्यापक UCC Strategy का हिस्सा समझा जा रहा है। पार्टी लगातार यह संदेश देने की कोशिश कर रही है कि One Nation, One Law का विचार अब केवल वैचारिक नहीं, बल्कि नीतिगत दिशा बन चुका है।
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दशकों पुरानी वैचारिक प्रतिबद्धता का हिस्सा है UCC Strategy
BJP के लिए Uniform Civil Code कोई नया मुद्दा नहीं है। यह पार्टी की वैचारिक नींव का हिस्सा रहा है, जिसमें Article 44 के तहत समान नागरिक संहिता लागू करने की बात कही गई है।
राम मंदिर निर्माण और Article 370 हटाने के बाद, UCC को भाजपा के तीसरे बड़े वैचारिक लक्ष्य के रूप में देखा जाता है। Narendra Modi भी कई मंचों पर सेक्युलर सिविल कोड की जरूरत पर जोर दे चुके हैं, जिसे वे संविधान की भावना के अनुरूप मानते हैं।
गठबंधन राजनीति बनी UCC Strategy की सबसे बड़ी चुनौती
हालांकि BJP की यह UCC Strategy नई नहीं है, लेकिन इसे लागू करने में सबसे बड़ी बाधा गठबंधन की राजनीति रही है। 1998 और 1999 में Atal Bihari Vajpayee के नेतृत्व में बनी सरकार को सहयोगी दलों के दबाव के कारण इस मुद्दे को पीछे रखना पड़ा था।
आज भी स्थिति कुछ अलग नहीं है। 2024 के बाद केंद्र में भाजपा का बहुमत पहले जैसा मजबूत नहीं है और सहयोगी दलों की भूमिका अहम हो गई है। Nitish Kumar और N. Chandrababu Naidu जैसे सहयोगी दल UCC को लेकर सतर्क रुख अपनाते रहे हैं।
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राज्यों के जरिए आगे बढ़ रही UCC Strategy
केंद्र में सीमाओं को देखते हुए BJP ने अपनी UCC Strategy को राज्यों के जरिए लागू करने का नया रास्ता चुना है। इस दिशा में सबसे बड़ा कदम तब देखा गया जब Uttarakhand ने 2025 में Uniform Civil Code लागू कर देश का पहला राज्य बनने का दावा किया।
इसके बाद Gujarat ने भी 2026 में इस दिशा में कानून पारित कर संकेत दिया कि भाजपा शासित राज्य इस एजेंडे को आगे बढ़ाने के लिए तैयार हैं।
अब असम, उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों में भी इसी तरह की पहल की तैयारी चल रही है। यह साफ संकेत है कि BJP की UCC Strategy अब “state-to-center approach” पर आधारित है।
राजनीतिक और सामाजिक असर: UCC Strategy क्यों अहम है?
Uniform Civil Code का मुद्दा केवल कानून का विषय नहीं है, बल्कि इसका सामाजिक और राजनीतिक प्रभाव भी गहरा है। इसके जरिए भाजपा समान नागरिक अधिकारों, लैंगिक समानता और कानूनी एकरूपता की बात करती है।
वहीं, विरोधी दल इसे विविधता पर असर डालने वाला कदम मानते हैं और व्यापक चर्चा की मांग करते हैं। यही कारण है कि BJP अपनी UCC Strategy को धीरे-धीरे लागू करने के पक्ष में दिख रही है, ताकि सामाजिक सहमति भी बन सके।
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क्या राष्ट्रीय स्तर पर लागू होगा Uniform Civil Code?
फिलहाल BJP की रणनीति साफ है—पहले राज्यों में Uniform Civil Code लागू कर उसका मॉडल तैयार करना और फिर धीरे-धीरे राष्ट्रीय स्तर पर इसे आगे बढ़ाना।
राज्यों में सफल प्रयोग होने के बाद केंद्र सरकार के लिए इसे लागू करना आसान हो सकता है। इस तरह BJP की UCC Strategy एक लंबी राजनीतिक और नीतिगत प्रक्रिया के रूप में सामने आ रही है।
चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ रही UCC Strategy
राम मंदिर और Article 370 जैसे बड़े फैसलों के बाद अब BJP का फोकस Uniform Civil Code पर है। लेकिन इस बार पार्टी सीधे केंद्र से नहीं, बल्कि राज्यों के जरिए अपनी रणनीति को आगे बढ़ा रही है।
आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि BJP की यह UCC Strategy किस तरह देशभर में लागू होती है और इसका राजनीतिक व सामाजिक असर क्या पड़ता है। फिलहाल इतना तय है कि यह मुद्दा आने वाले चुनावों में भी प्रमुख एजेंडा बना रहेगा।
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