Tyson Bishnoi: जेल की सलाखों के पीछे बंद लॉरेंस बिश्नोई और हिरासत में मौजूदअनमोल बिश्नोई के बाद यह माना जा रहा था कि बिश्नोई गैंग की कमर टूट चुकी है। लेकिन कनाडा में हाल ही में हुई अंधाधुंध फायरिंग ने इस धारणा को झटका दे दिया है। इस हमले के बाद सोशल मीडिया पर सामने आए एक पोस्ट ने गैंग के नए चेहरे टायसन बिश्नोई को चर्चा के केंद्र में ला दिया है।
बताया जा रहा है कि टायसन बिश्नोई ने आरजू बिश्नोई और शुभम लोनकर के साथ मिलकर इस हमले की जिम्मेदारी ली है। यह घटनाक्रम इस ओर इशारा करता है कि गैंग अब जेल में बंद सरगनाओं के बावजूद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नए चेहरों के जरिए अपना नेटवर्क चला रहा है।
कनाडा में फायरिंग से मचा हड़कंप
कनाडा के एक रिहायशी इलाके में हुई इस फायरिंग ने स्थानीय सुरक्षा एजेंसियों को अलर्ट कर दिया है। वायरल वीडियो में हमलावरों को एक घर के बाहर गाड़ी रोककर ऑटोमैटिक हथियारों से गोलियां चलाते देखा जा सकता है। हमले के बाद सामने आए सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा गया कि जो भी गैंग के खिलाफ जाएगा या उनके दुश्मनों की मदद करेगा, उसका अंजाम यही होगा। यह संदेश सीधे तौर पर विरोधी गिरोहों और कथित लक्ष्यों के लिए चेतावनी माना जा रहा है।
कौन है टायसन बिश्नोई?
Tyson Bishnoi को गैंग का नया रणनीतिक चेहरा बताया जा रहा है। एजेंसियों के मुताबिक, वह विदेश में बैठकर ऑपरेशंस को निर्देश दे रहा है। गैंग के अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क को समन्वित करने की भूमिका निभा रहा है। नए मॉड्यूल के जरिए गैंग की गतिविधियों को आगे बढ़ा रहा है। टायसन का नाम सामने आना इस बात का संकेत है कि गैंग अब नए नेतृत्व ढांचे के साथ काम कर रहा है।
शुभम लोनकर से क्या है कनेक्शन?
इस मामले में शुभम लोनकर का नाम भी सामने आया है, जिसे गैंग का सक्रिय ऑपरेटर माना जाता है। वह पहले भी कई हाई-प्रोफाइल मामलों में चर्चा में रह चुका है। इस बार टायसन और लोनकर का साथ आना यह दिखाता है कि गैंग अपने ऑपरेशंस को बहुस्तरीय संरचना के जरिए चला रहा है। (Tyson Bishnoi)
गैंग का ‘रिमोट कंट्रोल’ मॉडल
जांच एजेंसियों के मुताबिक, यह गैंग अब पारंपरिक तरीके से नहीं बल्कि एक नए रिमोट कंट्रोल मॉडल पर काम कर रहा है। इसमें सीधे आदेश देने के बजाय निर्देश कई स्तरों और चैनलों से होकर नीचे तक पहुंचते हैं। इससे न केवल ऑपरेशन को गुप्त रखा जाता है, बल्कि मुख्य सरगना तक पहुंचना भी बेहद मुश्किल हो जाता है। अलग-अलग देशों से गतिविधियों को संचालित करने की यह शैली अब डिजिटल रिमोट कंट्रोल क्राइम मॉडल के रूप में देखी जा रही है। (Tyson Bishnoi)
read also: Delhi AI Summit 2026: AI समिट प्रोटेस्ट केस में सख्ती, ग्वालियर से यूथ कांग्रेस कार्यकर्ता गिरफ्तार
‘फ्रेंचाइजी’ स्टाइल ऑपरेशन
इस नेटवर्क की एक खास रणनीति कथित तौर पर ‘फ्रेंचाइजी’ स्टाइल ऑपरेशन है। गैंग अलग-अलग देशों जैसे कनाडा, ऑस्ट्रेलिया और दुबई में छोटे-छोटे मॉड्यूल बनाकर काम करता है। स्थानीय अपराधियों को गैंग का नाम इस्तेमाल करने की छूट दी जाती है, और जैसे ही काम पूरा होता है, उनसे संपर्क खत्म कर दिया जाता है। इस सेल-बेस्ड संरचना के कारण जांच एजेंसियों के लिए असली नेटवर्क तक पहुंचना और भी जटिल हो जाता है। (Tyson Bishnoi)

सोशल मीडिया बना भर्ती का जरिया
सोशल मीडिया भी इस गैंग के लिए एक बड़ा हथियार बनकर उभरा है। एजेंसियों का मानना है कि हथियारों और लग्जरी लाइफस्टाइल से जुड़े वीडियो दिखाकर युवाओं को आकर्षित किया जाता है। डिजिटल प्लेटफॉर्म पर आक्रामक और प्रभावशाली छवि पेश कर गैंग अपनी ‘डिजिटल ब्रांडिंग’ मजबूत करता है, जिससे नए सदस्यों की भर्ती आसान हो जाती है। (Tyson Bishnoi)
फंडिंग का नया नेटवर्क
फंडिंग के मामले में भी गैंग आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल कर रहा है। जांच में सामने आया है कि क्रिप्टोकरेंसी, हवाला नेटवर्क और म्यूल अकाउंट्स के जरिए पैसों का लेन-देन किया जाता है। इस तरह की वित्तीय प्रणाली के कारण आर्थिक ट्रेल को ट्रैक करना बेहद मुश्किल हो जाता है, जिससे गैंग की गतिविधियों पर लगाम लगाना जांच एजेंसियों के लिए बड़ी चुनौती बनता जा रहा है।
जांच एजेंसियों की बढ़ी चुनौती
अब भारतीय एजेंसियों के साथ अंतरराष्ट्रीय एजेंसियां भी टायसन बिश्नोई की गतिविधियों पर नजर रखे हुए हैं। डिजिटल फुटप्रिंट्स के जरिए उसके नेटवर्क को ट्रैक करने की कोशिश जारी है। (Tyson Bishnoi)



