Social Media Content Removal: मिडिल ईस्ट में जारी तनाव और युद्ध जैसे हालात के बीच भारत में पेट्रोल, डीजल और एलपीजी को लेकर फैल रही अफवाहों ने सरकार की चिंता बढ़ा दी है। ऊर्जा क्षेत्र से जुड़ी झूठी खबरें जिस तेजी से सोशल मीडिया पर वायरल हो रही हैं, उसने आम लोगों के बीच भ्रम और अनावश्यक घबराहट पैदा कर दी है। अब सरकार इस स्थिति से निपटने के लिए सख्त कदम उठाने की तैयारी में है। सूत्रों के मुताबिक, सरकार सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के लिए भ्रामक और आपत्तिजनक कंटेंट हटाने (Social Media Content Removal) की समय सीमा को घटाकर सिर्फ 1 घंटा करने की योजना बना रही है। फिलहाल यह सीमा 3 घंटे तय है, लेकिन तेजी से फैलती अफवाहों को देखते हुए इसे और कम करने का निर्णय लिया गया है।
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अफवाहों की रफ्तार पर लगाम लगाने की तैयारी
ऊर्जा संकट को लेकर फैलाई जा रही झूठी खबरों का असर सीधे आम लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी पर पड़ रहा है। पेट्रोल पंपों पर बढ़ती भीड़ और एलपीजी की कथित कमी जैसे हालात इसी का परिणाम हैं। सरकार का मानना है कि अगर इन अफवाहों को शुरुआती चरण में ही रोक दिया जाए, तो स्थिति को बिगड़ने से बचाया जा सकता है। यही वजह है कि कंटेंट हटाने (Social Media Content Removal) की समय सीमा को घटाकर 1 घंटा करने का प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है। सरकार इस मुद्दे पर टेक कंपनियों के साथ अंतिम दौर की बातचीत कर रही है, जिसके बाद जल्द ही आधिकारिक दिशा-निर्देश जारी किए जा सकते हैं।
पहले भी हो चुका है नियमों में बदलाव
इससे पहले फरवरी में इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने ‘सूचना प्रौद्योगिकी (मध्यवर्ती दिशानिर्देश और डिजिटल मीडिया आचार संहिता) नियम, 2021’ में संशोधन किया था। इन संशोधनों के तहत सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स (Social Media Content Removal) को कंटेंट हटाने की समय सीमा को पहले के 24 से 36 घंटे से घटाकर 2 से 3 घंटे कर दिया गया था। हालांकि अब सरकार का मानना है कि मौजूदा समयसीमा भी तेजी से वायरल हो रहे कंटेंट को रोकने के लिए पर्याप्त नहीं है।
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‘अवैध’ और ‘आपत्तिजनक’ कंटेंट पर फोकस
सरकार ने स्पष्ट किया है कि उसकी कार्रवाई केवल अवैध और समाज में भ्रम फैलाने वाले कंटेंट तक सीमित है। इसके तहत उन पोस्ट्स पर सख्ती की जाएगी, जो ऊर्जा संकट, सप्लाई में कमी या राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर गलत जानकारी फैलाते हैं। इसके अलावा, ‘अश्लील’ और संवेदनशील कंटेंट (Social Media Content Removal) की नई परिभाषा तय करने की दिशा में भी काम चल रहा है, ताकि डिजिटल स्पेस को और सुरक्षित बनाया जा सके।
‘सहयोग’ पोर्टल से निगरानी तेज
वर्तमान में कंटेंट ब्लॉकिंग और मॉनिटरिंग की प्रक्रिया सहयोग पोर्टल के माध्यम से संचालित की जाती है, जो गृह मंत्रालय के तहत आता है। इस पोर्टल के जरिए विभिन्न एजेंसियां आपत्तिजनक कंटेंट (Social Media Content Removal) की पहचान कर उसे हटाने की प्रक्रिया शुरू करती हैं। नए नियम लागू होने के बाद इस सिस्टम को और ज्यादा तेज और प्रभावी बनाया जाएगा।
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क्यों जरूरी हुआ सख्त कदम?
सरकार को कई यूजर्स और विशेषज्ञों से यह फीडबैक मिला था कि पहले की समयसीमाएं बहुत लंबी थीं, जिससे भ्रामक कंटेंट तेजी (Social Media Content Removal) से फैल जाता था और उसे रोक पाना मुश्किल हो जाता था। एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, आज के समय में टेक कंपनियों के पास ऐसे उन्नत तकनीकी साधन मौजूद हैं, जिनकी मदद से वे आपत्तिजनक कंटेंट को पहले से कहीं ज्यादा तेजी से हटा सकती हैं।
डिजिटल अफवाहों पर डिजिटल नियंत्रण
सरकार का यह कदम साफ संकेत देता है कि अब डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर फैलने वाली अफवाहों (Social Media Content Removal) को हल्के में नहीं लिया जाएगा। ऊर्जा जैसे संवेदनशील क्षेत्र में गलत जानकारी न केवल आर्थिक असंतुलन पैदा कर सकती है, बल्कि सामाजिक व्यवस्था को भी प्रभावित कर सकती है। ऐसे में कंटेंट हटाने की समय सीमा को घटाना एक बड़ा और जरूरी कदम माना जा रहा है। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि ये नए नियम सोशल मीडिया की दुनिया में किस तरह का बदलाव लाते हैं और अफवाहों पर कितनी प्रभावी रोक लगा पाते हैं।
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