स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज से वाशिंगटन तक... जयशंकर की कूटनीतिक जीत ने दुनिया को किया हैरान
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S Jaishankar Indian Diplomacy: पश्चिम एशिया में जारी भीषण संघर्ष और वैश्विक अस्थिरता के बीच भारत ने अपनी ‘परिपक्व कूटनीति’ से दुनिया को दांतों तले उंगली दबाने पर मजबूर कर दिया है। जहां एक ओर अमेरिका, रूस, चीन, ईरान और इजरायल जैसी महाशक्तियां एक-दूसरे के खून की प्यासी नजर आ रही हैं, वहीं भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने एक ऐसा ‘ग्रेट गेम’ खेला है कि ये सभी धुर-विरोधी देश आज भारत की नीति को सलाम कर रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंचने और वैश्विक सप्लाई चेन के चरमराने के बावजूद, भारत ने न केवल अपनी अर्थव्यवस्था को सुरक्षित रखा है, बल्कि खुद को विश्व राजनीति के केंद्र में मजबूती से स्थापित कर लिया है।
इंवेस्टमेंट एक्सपर्ट सोमनाथ मुखर्जी के विश्लेषण के अनुसार, इतिहास में हर भू-राजनीतिक उथल-पुथल कुछ विजेताओं को जन्म देती है, और वर्तमान संकट में भारत वह विजेता बनकर उभर रहा है। जयशंकर की रणनीति का कमाल देखिए कि जिस रूस से तेल खरीदने पर अमेरिका ने भारत पर पेनाल्टी लगाई थी, आज वही अमेरिका बदलती परिस्थितियों में भारत को रूस से व्यापार जारी रखने के लिए प्रोत्साहित कर रहा है। यह लेख भारत की उस संतुलित और चतुर कूटनीति का कच्चा-चिट्ठा है, जिसने ईरान की मिसाइलों और इजरायल के बारूद के बीच भी भारत के हितों को सर्वोच्च रखा है। (S Jaishankar Indian Diplomacy)
50 साल बाद ऐतिहासिक निवेश
संकट के इस दौर में भारत ने अमेरिका के साथ अपने रिश्तों को एक नई ऊंचाई दी है। डोनाल्ड ट्रंप के नेतृत्व वाले अमेरिका में पिछले 50 वर्षों में पहली बार कोई नई रिफाइनरी लग रही है, और गर्व की बात यह है कि इसे भारतीय कंपनी रिलायंस इंडस्ट्रीज लगा रही है। ‘रिलायंस इंडस्ट्रीज हैवी सॉर क्रूड प्रोसेस करने में माहिर है,’ और इसी विशेषज्ञता के कारण अमेरिका अब खाड़ी के देशों पर अपनी निर्भरता कम करने के लिए भारत की ओर देख रहा है। यह निवेश न केवल व्यापारिक है, बल्कि सामरिक दृष्टि से भारत-अमेरिका संबंधों के लिए एक मील का पत्थर है। (S Jaishankar Indian Diplomacy)
चीन के साथ रिश्तों पर जमी बर्फ पिघली
गलवान घाटी की घटना के बाद चार साल तक चले तनाव को पीछे छोड़ते हुए भारत ने चीन को लेकर एक बड़ा नीतिगत फैसला लिया है। भारत सरकार ने चीन सहित पड़ोसी देशों से आने वाले निवेश (FDI) की शर्तों में बड़ी ढील दी है। 2024 के कजान सम्मेलन में पीएम मोदी और शी जिनपिंग की मुलाकात के बाद से ही रिश्ते पटरी पर लौटने लगे थे। आज दोनों देशों के बीच सीधी उड़ानें और मानसरोवर यात्रा फिर से शुरू हो चुकी है, जो यह दर्शाता है कि भारत सीमा सुरक्षा के साथ-साथ आर्थिक हितों को साधने में कितना माहिर है। (S Jaishankar Indian Diplomacy)S Jaishankar Indian Diplomacy
भारत और रूस की पुरानी दोस्ती आज नई अग्निपरीक्षा में सफल हुई है। अमेरिका, जो पहले भारत के रूस से तेल खरीदने पर आपत्ति जताता था, अब पश्चिम एशिया संकट के कारण खुद भारत को रूस से तेल आयात जारी रखने की सलाह दे रहा है। यह जयशंकर की कूटनीति की सबसे बड़ी जीत है, जहां उन्होंने अमेरिका को यह समझाने में सफलता पाई कि वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा के लिए भारत का रूस से तेल खरीदना अनिवार्य है। (S Jaishankar Indian Diplomacy)
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का हालिया इजरायल दौरा और वहां हुई सैन्य डील भारत की सुरक्षा जरूरतों के लिए अहम है। लेकिन साथ ही, भारत ने ईरान के साथ अपने ऐतिहासिक संबंधों को भी आंच नहीं आने दी है। स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज में जारी तनाव के बीच विदेश मंत्री एस. जयशंकर और ईरानी विदेश मंत्री की बातचीत का ही नतीजा है कि भारत आने वाले कार्गो जहाजों को सुरक्षित रास्ता (Safe Passage) मिला है। ‘ईरान ने भी इस पूरे बवाल में भारत के रुख की तारीफ की और उसे संतुलित बताया,’ जो भारत की कूटनीतिक परिपक्वता का सबसे बड़ा प्रमाण है। (S Jaishankar Indian Diplomacy)
जयशंकर का ‘ग्रेट गेम’ और भारत का भविष्य
भारत आज उस स्थिति में है जहां वह किसी गुट का हिस्सा बने बिना अपनी शर्तों पर दुनिया से बात कर रहा है। जहां पड़ोसी देश पाकिस्तान और बांग्लादेश आर्थिक बदहाली से जूझ रहे हैं, वहीं भारत अपनी रिफाइनिंग क्षमता और रणनीतिक स्वायत्तता (Strategic Autonomy) के दम पर दुनिया का नेतृत्व कर रहा है। जयशंकर का यह ‘ग्रेट गेम’ आने वाले दशकों तक भारत को एक वैश्विक शक्ति के रूप में परिभाषित करेगा। (S Jaishankar Indian Diplomacy)