Parliament Budget Debate : संसद में बजट सत्र के दौरान सियासी तापमान उस वक्त और बढ़ गया जब वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के आरोपों पर सीधा और तीखा जवाब दिया। बजट को लेकर विपक्ष की ओर से उठाए गए सवालों पर वित्त मंत्री ने कहा कि ‘जिन्होंने बजट पढ़ा ही नहीं, वे डेटा को तोड़-मरोड़कर पेश कर रहे हैं।’ उनके इस बयान के बाद सदन में जोरदार हंगामा देखने को मिला।
Parliament Budget Debate: बजट पर राहुल गांधी के आरोप क्या थे?
नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने सरकार पर आरोप लगाया था कि इस बार का बजट आम जनता, खासकर युवाओं और किसानों के हित में नहीं है। उन्होंने दावा किया कि बेरोजगारी, महंगाई और कृषि संकट जैसे मुद्दों पर बजट में ठोस प्रावधान नहीं किए गए। राहुल ने यह भी कहा कि आंकड़ों के जरिए देश की वास्तविक आर्थिक स्थिति को छिपाने की कोशिश की गई है।
राहुल गांधी का कहना था कि GDP और रोजगार के आंकड़ों में विसंगतियां हैं, और सरकार ग्राउंड रियलिटी से दूर नजर आ रही है। उन्होंने बजट को ‘कॉरपोरेट-फ्रेंडली’ बताते हुए मध्यम वर्ग और गरीबों की अनदेखी का आरोप लगाया।
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Parliament Budget Debate: निर्मला सीतारमण का पलटवार – डेटा गलत पढ़ा गया
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि बजट में दिए गए सभी आंकड़े पारदर्शी और आधिकारिक स्रोतों पर आधारित हैं। उन्होंने कहा, ‘अगर कोई बजट दस्तावेजों को ठीक से पढ़े बिना बयान देता है, तो यह दुर्भाग्यपूर्ण है।’
उन्होंने विस्तार से बताया कि रोजगार सृजन, इंफ्रास्ट्रक्चर, MSME सेक्टर और किसानों के लिए कई नई योजनाएं शुरू की गई हैं। साथ ही पूंजीगत व्यय (Capital Expenditure) में वृद्धि को देश की दीर्घकालिक आर्थिक मजबूती के लिए जरूरी बताया।
Parliament Budget Debate: रोजगार और युवाओं को लेकर क्या कहा?
वित्त मंत्री ने कहा कि सरकार ने स्टार्टअप, स्किल डेवलपमेंट और डिजिटल इकोनॉमी को बढ़ावा देने के लिए विशेष प्रावधान किए हैं। उन्होंने दावा किया कि पिछले कुछ वर्षों में भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था बना है और इसका असर रोजगार के अवसरों में भी दिख रहा है।
उन्होंने यह भी कहा कि विपक्ष को चाहिए कि वह आंकड़ों को सही संदर्भ में देखे, न कि राजनीतिक नजरिए से।
Parliament Budget Debate: किसानों और ग्रामीण विकास पर सरकार का पक्ष
कृषि क्षेत्र को लेकर उठे सवालों पर निर्मला सीतारमण ने कहा कि पीएम-किसान योजना, सिंचाई परियोजनाओं और ग्रामीण इंफ्रास्ट्रक्चर पर बजट में बड़ा आवंटन किया गया है। उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाना है, जिससे किसानों की आय में स्थायी वृद्धि हो सके।
उन्होंने विपक्ष पर आरोप लगाया कि वे सकारात्मक पहलुओं को नजरअंदाज कर रहे हैं और केवल नकारात्मक तस्वीर पेश कर रहे हैं।
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Parliament Budget Debate: महंगाई और टैक्स को लेकर स्पष्टीकरण
महंगाई को लेकर वित्त मंत्री ने कहा कि वैश्विक परिस्थितियों का असर हर देश पर पड़ा है, लेकिन भारत ने इसे नियंत्रित रखने में सफलता पाई है। टैक्स स्लैब में राहत और मध्यम वर्ग के लिए प्रावधानों को उन्होंने सरकार की प्रतिबद्धता का प्रमाण बताया।
उन्होंने कहा कि बजट संतुलित है और इसमें विकास, कल्याण और राजकोषीय अनुशासन – तीनों का ध्यान रखा गया है।
Parliament Budget Debate: संसद में बढ़ा सियासी घमासान
निर्मला सीतारमण के बयान के बाद विपक्ष ने जोरदार विरोध किया। कांग्रेस सांसदों ने सरकार पर आलोचना से बचने के लिए व्यक्तिगत हमले करने का आरोप लगाया। वहीं बीजेपी सांसदों ने वित्त मंत्री के समर्थन में मेज थपथपाई।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बजट को लेकर यह टकराव आने वाले चुनावी माहौल में और तेज हो सकता है। बजट केवल आर्थिक दस्तावेज नहीं, बल्कि राजनीतिक संदेश भी बन चुका है।
Parliament Budget Debate: आम जनता के लिए क्या मायने?
सवाल यह है कि इस सियासी बहस से आम जनता को क्या मिलेगा? विशेषज्ञों के मुताबिक, बजट के प्रभाव का असली आकलन जमीन पर उसके क्रियान्वयन से होगा। अगर घोषित योजनाएं सही तरीके से लागू होती हैं, तो रोजगार, इंफ्रास्ट्रक्चर और ग्रामीण विकास को गति मिल सकती है। लेकिन अगर विपक्ष के आरोप सही साबित होते हैं, तो आर्थिक असंतोष राजनीतिक मुद्दा बन सकता है।
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