Middle East Conflict: मिडिल ईस्ट में जारी तनाव (Middle East Conflict) के बीच ईरान ने हिंद महासागर में स्थित डिएगो गार्सिया के अमेरिकी-ब्रिटिश बेस पर दो इंटरमीडियट रेंज बैलिस्टिक मिसाइल (IRBM) दागे। यह हमला पूरे विश्व के लिए चौंकाने वाला रहा, क्योंकि डिएगो गार्सिया की दूरी ईरान से लगभग 4,000 किलोमीटर है। इससे यह संकेत मिलता है कि ईरान के पास सार्वजनिक तौर पर घोषित क्षमता (2,000 किलोमीटर) से कहीं अधिक लंबी दूरी की मिसाइलें हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि यह हमला ईरान की तकनीकी क्षमताओं और रणनीतिक तैयारियों को दर्शाता है। यह पहली बार है जब ईरान ने अपने घोषित रेंज से दोगुनी दूरी तक बैलिस्टिक मिसाइलों का परीक्षण किया है।
पेजेशकियान ने PM मोदी से साझा की शर्त
ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से टेलीफोन पर बातचीत की। इस दौरान उन्होंने कहा कि ईरान ने इस युद्ध (Middle East Conflict) को शुरू नहीं किया, बल्कि उनके देश पर बिना किसी वैध कारण के हमले किए गए। पेजेशकियान ने युद्ध को रोकने की शर्त रखी-
- अमेरिका और इजरायल तुरंत आक्रामक गतिविधियां रोकें।
- भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।
उन्होंने यह भी कहा कि ईरान हमेशा वैश्विक नेताओं से बातचीत के लिए तैयार है, चाहे वह फोन पर हो या आमने-सामने।
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अमेरिका के परमाणु कब्जे की योजना
तीन हफ्तों से जारी संघर्ष के बाद, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ईरान के सभी परमाणु ठिकानों और सामग्रियों पर कब्जा करने के विकल्पों पर विचार कर रहे हैं। स्रोतों के अनुसार, अमेरिकी प्रशासन अभी परमाणु सामग्री को सुरक्षित निकालने और कब्जे में लेने के तरीकों की योजना बना रहा है। हालांकि, अभी तक किसी आधिकारिक ऑपरेशन का आदेश नहीं दिया गया है।
ईरानी विदेश मंत्री का अमेरिका पर तंज
ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने अमेरिका के युद्ध में जीत के दावों की आलोचना की। उन्होंने कहा कि अमेरिका वियतनाम युद्ध की तरह वास्तविकता से दूर होकर दावा कर रहा है कि युद्ध सफलतापूर्वक चल रहा है। अराघची ने चेतावनी दी कि अमेरिका को इतिहास से सबक लेना चाहिए।
UAE और कुवैत पर हमले की रिपोर्ट
ईरान की सरकारी मीडिया के अनुसार, ईरानी नौसेना ने UAE के अल-मिन्हाद एयरबेस और कुवैत के अली अल सलेम एयरबेस पर बैलिस्टिक मिसाइल और ड्रोन हमले किए। इन हमलों में हैंगर और फ्यूल टैंकरों को निशाना बनाया गया, जिनका कथित तौर पर इस्तेमाल ईरान पर हमला करने के लिए किया जा रहा था। विशेषज्ञों का कहना है कि यह हमला ईरान की क्षमता और क्षेत्रीय प्रभुत्व दिखाने की रणनीति का हिस्सा हो सकता है।
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अंतरराष्ट्रीय राजनीति और तनाव का असर
डिएगो गार्सिया पर हमले ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति को भी हिला दिया है। विशेषज्ञ मानते हैं कि यह घटना भारत समेत एशियाई और पश्चिमी देशों के लिए सुरक्षा चुनौतियों का संकेत देती है। प्रधानमंत्री मोदी और अन्य वैश्विक नेताओं के बीच कूटनीतिक वार्ता और संघर्ष नियंत्रण के प्रयास अब और महत्वपूर्ण हो गए हैं।
अगले कदम और वैश्विक निगरानी
विशेषज्ञों के अनुसार, ईरान के इस हमले के बाद-
- अमेरिका और इजरायल अपने रणनीतिक ठिकानों की सुरक्षा बढ़ा सकते हैं।
- अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्ग और हिंद महासागर क्षेत्र में निगरानी बढ़ाई जाएगी।
- वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और तेल निर्यात पर भी असर पड़ सकता है।
वैश्विक समुदाय की निगाहें अब मध्य पूर्व और हिंद महासागर पर टिक गई हैं, क्योंकि यह संघर्ष (Middle East Conflict) लंबे समय तक क्षेत्रीय और वैश्विक सुरक्षा पर असर डाल सकता है।
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