Maharashtra BMC Election: मुंबई की सियासत में सालों बाद वो पल देखने को मिला, जिसकी किसी ने कल्पना तक नहीं की थी। 1997 से जिस पर ठाकरे परिवार का कब्जा था, आज उसी किले पर भगवा लहरा चुका है। महायुति गठबंधन ने बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) चुनाव में ऐतिहासिक जीत दर्ज कर इतिहास रच दिया है। बीजेपी और एकनाथ शिंदे की शिवसेना ने मिलकर 227 सदस्यीय निकाय में 118 सीटें जीतकर बहुमत का आंकड़ा पार कर लिया।
इस जीत के साथ ही एशिया की सबसे अमीर नगरपालिका पर लंबे समय तक छाए ठाकरे परिवार का वर्चस्व खत्म हो गया है। अब मुंबई को लंबे समय बाद बीजेपी-शिंदे गुट की शिवसेना का महापौर मिलने जा रहा है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की सियासी पकड़ भी इस ऐतिहासिक जीत के साथ और मजबूत हुई है।
Maharashtra BMC Election- महायुति गठबंधन ने ठोक दी जीत की पुख्ता छाप
बीजेपी ने 89 सीटें जीतकर खुद का रिकॉर्ड तोड़ा, जबकि शिंदे गुट की शिवसेना ने 29 सीटें जीतकर गठबंधन को निर्णायक बढ़त दिलाई। बहुमत का आंकड़ा 114 था, लेकिन महायुति गठबंधन 118 सीटों के साथ इससे कहीं आगे निकल गया। यह सिर्फ एक चुनावी जीत नहीं है, बल्कि ठाकरे परिवार के उस अभेद्य किले में सीधे सेंध लगाने जैसी घटना है। उद्धव ठाकरे की शिवसेना यूबीटी को इस चुनाव में सिर्फ 65 सीटों पर संतोष करना पड़ा, राज ठाकरे की मनसे 6 सीटों तक सीमित रही और शरद पवार गुट की एनसीपी महज 1 सीट तक रह गई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी इस ऐतिहासिक जीत पर मुंबई की जनता का आभार जताया। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा: एनडीए को आशीर्वाद देने के लिए मैं मुंबई के अपने भाई-बहनों का अत्यंत आभारी हूं। मुंबई हमारे देश का गौरव है और यह शहर विकास को गति देता है।
Maharashtra BMC Election- पवार परिवार की राजनीतिक रणनीति बुरी तरह फेल
महाराष्ट्र निकाय चुनाव सिर्फ ठाकरे परिवार ही नहीं, पवार फैमिली के लिए भी बड़ा झटका साबित हुआ। साल 2023 में अजित पवार ने शरद पवार से बगावत कर एनसीपी तोड़ी और महायुति में डिप्टी सीएम बने थे। तब से दोनों गुट अलग चल रहे थे। निकाय चुनाव में राजनीतिक मजबूरी के चलते दोनों फिर एक साथ आए, क्योंकि पुणे और पिंपरी-चिंचवाड़ जैसे पवार गढ़ पर खतरा था। मगर नतीजा उल्टा निकला। भाजपा ने इन किलों में भी सेंध लगाई। शरद पवार वाली एनसीपी 24 निकायों में एक भी सीट नहीं जीत पाई, और अजित पवार की एनसीपी पूरी तरह धराशायी हो गई। केवल अहिल्यानगर में गठबंधन के चलते थोड़ी राहत मिली, लेकिन बड़ा लाभ नहीं हुआ।

Maharashtra BMC Election- अजित पवार की मुश्किलें बढ़ीं
अजित पवार महायुति सरकार में डिप्टी सीएम हैं और उनके राजनीतिक साथी भाजपा और एकनाथ शिंदे गुट हैं, लेकिन इस चुनाव में उन्होंने अपनी पार्टी की ही रणनीति के उलट कदम उठाया। उन्होंने भाजपा के खिलाफ उम्मीदवार खड़े किए और शरद पवार के साथ मिलकर पिंपरी-चिंचवाड़ में प्रचार किया, जहां भाजपा पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष रवींद्र चव्हाण ने साफ शब्दों में कहा कि अजित पवार को साथ लेने का अफसोस है।
Maharashtra BMC Election- चुनाव में रणनीति पूरी तरह फेल
चुनाव में हार के बाद अजित पवार की यह रणनीति पूरी तरह फेल साबित हुई है और अब उनके सामने दो ही रास्ते बचे हैं: पहला, भाजपा के साथ रिश्ते सुधारकर सरकार में बने रहना, लेकिन इसमें खतरा यह है कि भाजपा उनकी कमजोरी का फायदा उठा सकती है और उन्हें कम तवज्जो दे सकती है; दूसरा, शरद पवार के साथ मिलकर एनसीपी को फिर से एक करना और विपक्ष खड़ा करना, लेकिन 2023 की बगावत के बाद दोनों के रिश्तों में अभी भी तनाव मौजूद है।
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Maharashtra BMC Election- भविष्य की रणनीति और जिला परिषद चुनाव
इस महीने के अंत में जिला परिषद चुनाव असली टेस्ट होंगे। अगर चाचा-भतीजा फिर साथ लड़ते हैं, तो मजबूरी में एकता का संकेत होगा। नहीं तो दोनों गुटों का भविष्य और मुश्किल हो जाएगा। कुल मिलाकर महाराष्ट्र की राजनीति अब भाजपा के इर्द-गिर्द घूम रही है। उद्धव ठाकरे कमजोर पड़ चुके हैं, एकनाथ शिंदे का प्रदर्शन भी खास नहीं, कांग्रेस लगभग हाशिए पर है और पवार परिवार अब नई रणनीति बनाने को मजबूर है। मतदाता साफ संदेश दे चुके हैं कि विकास और स्थिरता चाहिए, परिवारवाद और गुटबाजी नहीं। अजित पवार अब महायुति में मोलभाव की स्थिति में नहीं रह पाएंगे।



