Judicial Corruption Chapter: देश का एजुकेशन सिस्टम इस समय एक बड़े विवाद के सेंटर में है। NCERT की 8वीं क्लास की टेक्स्टबुक में शामिल ज्यूडिशियल करप्शन पर एक चैप्टर ने पॉलिटिकल सर्कल से लेकर कोर्ट तक में विवाद खड़ा कर दिया है। मामला इतना बढ़ गया कि सुप्रीम कोर्ट ने खुद संज्ञान लेते हुए मामले की सुनवाई शुरू कर दी।
सूत्रों के मुताबिक, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी कैबिनेट मीटिंग में इस मुद्दे पर गहरी नाराजगी जताई। सवाल उठाए गए कि, 8वीं क्लास के स्टूडेंट्स को किस तरह का कंटेंट पढ़ाया जा रहा है और इसकी मॉनिटरिंग कौन कर रहा है?
Judicial Corruption Chapter: क्या है पूरा विवाद?
यह विवाद एक चैप्टर के इर्द-गिर्द घूमता है जो ज्यूडिशियरी के अंदर करप्शन के मामलों को हाईलाइट करता है। क्रिटिक्स का कहना है कि इतने छोटे बच्चों को ज्यूडिशियल सिस्टम की कमजोरियों पर आधारित मटीरियल पढ़ाने से इंस्टीट्यूशन के बारे में नेगेटिव सोच बन सकती है।
दूसरी ओर, कुछ एकेडेमिक्स का तर्क है कि डेमोक्रेसी में ट्रांसपेरेंसी और अकाउंटेबिलिटी लाना जरूरी है। सवाल यह है कि क्या सेंसिटिव सब्जेक्ट्स पढ़ाने के लिए कोई तय उम्र होनी चाहिए?
Judicial Corruption Chapter: सुप्रीम कोर्ट का स्वप्रेरणा से संज्ञान लेना क्यों जरूरी है?
जब भारत के सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले का स्वप्रेरणा से संज्ञान लिया, तो उसने यह इशारा किया कि यह मुद्दा सिर्फ एजुकेशन तक ही सीमित नहीं है, बल्कि इंस्टीट्यूशनल डिग्निटी से भी जुड़ा है। कोर्ट ने पूछा कि क्या ऐसे टॉपिक्स को बिना सही रिव्यू के करिकुलम में शामिल किया गया था।
इस कदम से एजुकेशन मिनिस्ट्री और संबंधित अधिकारियों में हलचल मच गई। खबर है कि टेक्स्टबुक से विवादित चैप्टर हटाने का प्रोसेस शुरू कर दिया गया है।
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Judicial Corruption Chapter: कैबिनेट मीटिंग में PM मोदी की सख्त टिप्पणी
सूत्रों के मुताबिक, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कैबिनेट मीटिंग में साफ-साफ कहा कि, ‘आठवीं क्लास के स्टूडेंट्स को ज्यूडिशियल करप्शन के बारे में क्या पढ़ाया जा रहा है? इसकी मॉनिटरिंग कौन कर रहा है?’
प्रधानमंत्री का बयान कई मायनों में अहम है। इससे साफ पता चलता है कि सरकार एजुकेशनल मटीरियल के साथ नरमी बरतने का इरादा रखती है। उन्होंने अकाउंटेबिलिटी पक्का करने और भविष्य में ऐसी गलतियों को रोकने के लिए एक सख्त रिव्यू सिस्टम की जरूरत पर जोर दिया।
Judicial Corruption Chapter: एजुकेशन बनाम पॉलिटिक्स – असली बहस क्या है?
यह विवाद अब दो गुटों में बंट गया है। पहले पक्ष का मानना है कि बच्चों को डेमोक्रेसी की असलियत के बारे में बताना जरूरी है। दूसरे पक्ष का तर्क है कि ऐसे टॉपिक जो सेंसिटिव इंस्टीट्यूशन पर सवाल उठाते हैं, बच्चों में भरोसा खत्म कर सकते हैं।
एजुकेशन एक्सपर्ट्स का कहना है कि कंटेंट का मकसद जरूरी है, क्या इसका मकसद अवेयरनेस बढ़ाना था या अनजाने में इंस्टीट्यूशन की इमेज को नुकसान पहुंचाना था?
Judicial Corruption Chapter: करिकुलम पर पहले भी हो चुके हैं विवाद
यह पहली बार नहीं है जब NCERT की टेक्स्टबुक्स विवादों में घिरी हैं। पहले भी, हिस्ट्री, पॉलिटिकल साइंस और सोशियोलॉजी के कुछ चैप्टर्स पर बहस छिड़ चुकी है।
करिकुलम में बदलाव से अक्सर सामाजिक और राजनीतिक बहस छिड़ जाती है, क्योंकि शिक्षा सीधे आने वाली पीढ़ियों की सोच पर असर डालती है।
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Judicial Corruption Chapter: आगे क्या होगा?
अब सबकी नज़रें शिक्षा मंत्रालय और कोर्ट के बीच होने वाली अगली सुनवाई पर हैं। अगर कोर्ट कड़े कमेंट करता है, तो भविष्य में करिकुलम बनाने का प्रोसेस ज्यादा ट्रांसपेरेंट और मल्टी-लेयर्ड हो सकता है। इस बात की संभावना है कि, विवादित कॉपियां वापस ले ली जाएंगी, एक रिव्यू कमिटी बनाई जाएगी और भविष्य के लिए और सख्त गाइडलाइंस बनाई जाएंगी।
Judicial Corruption Chapter: यह मुद्दा क्यों हो रहा वायरल?
यह मुद्दा तेजी से वायरल हो रहा है क्योंकि इसमें तीन मुख्य बातें शामिल हैं, स्कूल की शिक्षा, न्यायपालिका और प्रधानमंत्री की बातें। जब शिक्षा, न्यायपालिका और राजनीति एक ही मुद्दे पर टकराते हैं, तो राष्ट्रीय स्तर पर बहस होना तय है।
Judicial Corruption Chapter: असली सवाल – बच्चों को क्या और कब सिखाया जाना चाहिए?
यह विवाद हमारे सामने एक बड़ा सवाल खड़ा करता है कि, क्या हमें बच्चों को सिर्फ आदर्श सिस्टम के बारे में पढ़ाना चाहिए या उन्हें सिस्टम की चुनौतियों से भी परिचित कराना चाहिए? लोकतंत्र की ताकत पारदर्शिता में है, लेकिन संतुलन भी उतना ही जरूरी है। यह बहस भविष्य में शिक्षा नीति की दिशा तय कर सकती है।
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