India Canada Security Talks: भारत और कनाडा के रिश्ते बीते कुछ समय से जिस ठंडे दौर से गुजर रहे थे, उसमें अब बदलाव के साफ संकेत मिलने लगे हैं। राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजित डोवाल की कनाडा यात्रा और वहां हुई उच्चस्तरीय वार्ताओं को केवल एक औपचारिक बैठक मानना भूल होगी। यह मुलाकात दोनों देशों के बीच जमी बर्फ को तोड़ने और भरोसे की नई नींव रखने की दिशा में एक निर्णायक कदम मानी जा रही है।
डिप्लोमैटिक तनाव, आरोप-प्रत्यारोप और संवादहीनता के बीच यह बैठक इस बात का संकेत है कि भारत और कनाडा अब टकराव से आगे बढ़कर समाधान की राह तलाशना चाहते हैं।
India Canada Security Talks: NSA अजित डोवाल की भूमिका क्यों है निर्णायक?
NSA अजित डोवाल को भारत की रणनीतिक और सुरक्षा नीति का मजबूत स्तंभ माना जाता है। उनकी मौजूदगी किसी भी अंतरराष्ट्रीय बैठक में साफ संदेश देती है कि भारत मुद्दों को केवल कूटनीतिक भाषा में नहीं, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा के नजरिए से देखता है।
कनाडा में हुई इस बैठक में डोवाल ने यह स्पष्ट कर दिया कि भारत संवाद के पक्ष में है, लेकिन अपनी संप्रभुता और सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर कोई समझौता नहीं करेगा। यही सख्त लेकिन संतुलित रुख इस वार्ता को खास बनाता है।
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India Canada Security Talks: आतंकवाद बना बातचीत का मुख्य एजेंडा
इस उच्चस्तरीय बैठक में आतंकवाद सबसे अहम और संवेदनशील मुद्दा रहा। भारत ने कनाडा के समक्ष उन भारत-विरोधी तत्वों पर अपनी गंभीर चिंता जाहिर की, जो कथित तौर पर विदेशी धरती का इस्तेमाल भारत की सुरक्षा के खिलाफ कर रहे हैं।
भारत का साफ संदेश था कि आतंकवाद को अभिव्यक्ति की आजादी या राजनीतिक मतभेद के चश्मे से नहीं देखा जा सकता। दोनों पक्षों ने इस बात पर सहमति जताई कि आतंकवाद एक वैश्विक खतरा है और इससे निपटने के लिए साझा रणनीति जरूरी है।
India Canada Security Talks: खुफिया सहयोग – रिश्तों की नई रीढ़
बैठक का एक और अहम पहलू रहा खुफिया जानकारी साझा करने पर सहमति। आधुनिक दौर में सुरक्षा खतरे सिर्फ सीमाओं तक सीमित नहीं हैं। साइबर हमले, आतंकी फंडिंग नेटवर्क और डिजिटल प्रोपेगेंडा जैसे नए खतरे तेजी से उभर रहे हैं।
NSA डोवाल ने जोर देकर कहा कि मजबूत और भरोसेमंद खुफिया साझेदारी के बिना इन चुनौतियों से निपटना संभव नहीं। इस दिशा में भारत और कनाडा के बीच तकनीकी सहयोग, रियल-टाइम इंटेलिजेंस शेयरिंग और ऑपरेशनल तालमेल बढ़ाने पर सहमति बनी।
India Canada Security Talks: वैश्विक सुरक्षा पर भी हुई गंभीर चर्चा
यह वार्ता केवल भारत-कनाडा संबंधों तक सीमित नहीं रही। इंडो-पैसिफिक क्षेत्र की स्थिरता, रूस-यूक्रेन युद्ध, पश्चिम एशिया की स्थिति और वैश्विक अस्थिरता जैसे मुद्दों पर भी खुलकर विचार-विमर्श हुआ।
दोनों देशों ने माना कि बदलती वैश्विक व्यवस्था में लोकतांत्रिक देशों के बीच सहयोग पहले से कहीं ज्यादा जरूरी हो गया है। समुद्री सुरक्षा, सप्लाई चेन की सुरक्षा और उभरते सुरक्षा खतरों पर मिलकर काम करने की जरूरत पर जोर दिया गया।
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India Canada Security Talks: डिप्लोमेसी के साथ भारत का सख्त संदेश
NSA अजित डोवाल की रणनीति हमेशा स्पष्ट रही है, बातचीत भी और स्पष्टता भी। इस बैठक में भारत ने साफ शब्दों में यह संदेश दिया कि उसकी सुरक्षा चिंताओं को नजरअंदाज करना द्विपक्षीय संबंधों को नुकसान पहुंचा सकता है।
कनाडा की ओर से भी रिश्तों को सुधारने और भरोसा बहाल करने के संकेत मिले, जिसे अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक हलकों में सकारात्मक बदलाव के रूप में देखा जा रहा है।
India Canada Security Talks: आगे क्या बदलेगा भारत-कनाडा समीकरण?
इस उच्चस्तरीय संवाद के बाद यह उम्मीद जताई जा रही है कि भारत और कनाडा के रिश्तों में धीरे-धीरे स्थिरता लौटेगी। आने वाले समय में सुरक्षा सहयोग के साथ-साथ व्यापार, शिक्षा और लोगों के बीच संपर्क को भी नई दिशा मिल सकती है।
विशेषज्ञ मानते हैं कि यह बैठक किसी अंतिम समाधान का एलान नहीं, बल्कि एक नई शुरुआत है। लेकिन इतना तय है कि संवाद की वापसी ने रिश्तों में जमी बर्फ को पिघलाने का काम जरूर किया है।
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