Galgotias University Controversy: यह विवाद तब शुरू हुआ जब एक रोबोट, जो कथित तौर पर यूनिवर्सिटी के पवेलियन में डिस्प्ले पर था, उसे लेकर सोशल मीडिया पर क्लेम हुआ कि यह यूनिवर्सिटी की अपनी इन्वेंशन है। वायरल वीडियो और पोस्ट में यह भी दिखाया गया कि एक रिप्रेजेंटेटिव मीडिया को डिटेल्स दे रही थी, जिसमें कुछ गलत या अधूरी जानकारी भी शेयर हो गई।
Galgotias University Controversy: पब्लिक के सवाल और आलोचना
लोगों ने यूनिवर्सिटी पर सवाल उठाए अगर रोबोट यूनिवर्सिटी खुद नहीं बनी थी, तो पब्लिक को इस तरह का रिप्रेजेंटेशन क्यों दिया गया? और इस गलत जानकारी के लिए प्रोफेसर को क्यों टारगेट बनाया गया?
Galgotias University Controversy: यूनिवर्सिटी की ऑफिशियल माफी
18 फरवरी को यूनिवर्सिटी ने एक ऑफिशियल स्टेटमेंट जारी किया। स्टेटमेंट में कहा गया यह रोबोट यूनिवर्सिटी खुद नहीं बनी है। यूनिवर्सिटी ने कभी भी ऐसा क्लेम नहीं किया। पवेलियन पर जो रिप्रेजेंटेटिव मीडिया से बात कर रही थी, उसके पास पूरी जानकारी नहीं थी और उसने बिना प्रॉपर ऑथराइजेशन मीडिया से स्टेटमेंट दे दिया। यूनिवर्सिटी ने साफ़ किया कि प्रोफ़ेसर को इस सिचुएशन में बेवजह ब्लेम किया गया, और इस फ़ैसले को सही करने के लिए उपाय किए जा रहे हैं।
Galgotias University Controversy: प्रोफ़ेसर पर अनफ़ेयर ब्लेम
स्टेटमेंट के हिसाब से एक प्रोफेसर को इस कॉन्ट्रोवर्सी के लिए ‘बलिदान का बकरा’ बना दिया गया था। सोशल मीडिया और न्यूज़ प्लेटफॉर पर लोग सवाल कर रहे हैं कि अगर यूनिवर्सिटी ने गलती मानी, तो प्रोफेसर पर ब्लेम कैसे आ गया? एक्सपर्ट्स कहते हैं कि यह एक टिपिकल केस है जहां ऑर्गेनाइजेशन मिसकम्युनिकेशन और अधूरी जानकारी की वजह से एक व्यक्ति को टारगेट बनाया गया।
Galgotias University Controversy: पब्लिक और सोशल मीडिया रिस्पॉन्स
सोशल मीडिया पर इस इंसिडेंट के बाद पब्लिक काफ़ी नाराज़ है। लोग यूनिवर्सिटी की ट्रांसपेरेंसी और अकाउंटेबिलिटी पर सवाल कर रहे हैं। कई लोगों ने कहा कि ऐसी घटनाओं से स्टूडेंट्स और स्टाफ का ट्रस्ट लेवल कम होता है। ट्विटर और इंस्टाग्राम पर हैशटैग ट्रेंड कर रहे थे जिसमें स्टूडेंट्स और एल्युमनाई ने यूनिवर्सिटी से पूरी सफाई और सही कार्रवाई की मांग की।
Galgotias University Controversy: स्टेप्स यूनिवर्सिटी ने लिए
माफी के साथ यूनिवर्सिटी ने यह भी अनाउंस किया कि मीडिया और पवेलियन रिप्रेजेंटेटिव्स को सही ट्रेनिंग और गाइडलाइंस दी जाएंगी। प्रोफेसर्स और स्टाफ के लिए एक इंटरनल रिव्यू कमेटी बनाई जाएगी, जिससे ब्लेम और अकाउंटेबिलिटी का प्रोसेस फेयर और ट्रांसपेरेंट हो।यूनिवर्सिटी की पब्लिक कम्युनिकेशन्स और प्रेस स्टेटमेंट्स का प्रोसेस और सख्त बनाया जाएगा।
Galgotias University Controversy: एक्सपर्ट्स की राय
एजुकेशनल एक्सपर्ट्स और PR एनालिस्ट कहते हैं कि आज के सोशल मीडिया के जमाने में एक छोटी सी मिसकम्युनिकेशन भी वायरल होकर बड़ा विवाद खड़ा कर सकती है। उनका कहना है कि गलगोटियास यूनिवर्सिटी का समय पर पब्लिक में माफी मांगना और सफाई देना पॉजिटिव है, लेकिन ऑर्गेनाइजेशन को लंबे समय में अपनी इंटरनल कम्युनिकेशन और अकाउंटेबिलिटी प्रोसेस को बेहतर करना होगा।
Galgotias University Controversy: स्टूडेंट्स और एलुमनाई की उम्मीदें
स्टूडेंट्स और एलुमनाई चाहते हैं कि यूनिवर्सिटी ट्रांसपेरेंट हो और भविष्य में ऐसी घटनाएं न हों। फैकल्टी और स्टाफ के साथ फेयर ट्रीटमेंट हो। सोशल मीडिया और प्रेस इंटरैक्शन में प्रॉपर ऑथराइजेशन और ट्रेनिंग हो। कुछ स्टूडेंट्स ने कहा, प्रोफेसर के साथ जो हुआ, वो बिल्कुल गलत था। यूनिवर्सिटी को अपनी जिम्मेदारी को समझना होगा और स्टाफ के साथ फेयर होना होगा।
Galgotias University Controversy: कम्युनिकेशन और ट्रांसपेरेंसी कितनी जरूरी
यह घटना हमें यह सिखाती है कि ऑर्गेनाइजेशन कम्युनिकेशन और ट्रांसपेरेंसी कितनी जरूरी है, खास एजुकेशनल इंस्टीट्यूशन में जहां स्टूडेंट्स, फैकल्टी और पब्लिक का भरोसा काफी जरूरी होता है। गलगोटियास यूनिवर्सिटी ने अपनी गलती मान ली और पब्लिक से माफी मांगी , लेकिन लोग अब भी देख रहे हैं कि क्या यूनिवर्सिटी अपनी इंटरनल पॉलिसी और मीडिया कम्युनिकेशन में सुधार लाएगी या नहीं।
इस केस से एक और सबक यह भी मिलता है कि सोशल मीडिया के जमाने में गलत जानकारी और अधूरी जानकारी का असर काफी बड़ा होता है। यूनिवर्सिटी और ऑर्गेनाइजेशन को हर स्टेटमेंट और प्रेस रिलीज़ में पूरी एक्यूरेसी और ऑथराइजेशन पक्का करना चाहिए। नेहा सिंह के साथ जो अन्याय हुआ, वो हाईलाइट करता है कि प्रोफेसर और स्टाफ को बिना वजह ब्लेम न किया जाए।



