Four Stars of Destiny: भारत के पूर्व सेना प्रमुख जनरल एम.एम. नरवणे की अप्रकाशित किताब ‘Four Stars of Destiny’ के मसौदे के कथित लीक होने से सियासी और सुरक्षा हलकों में हलचल मच गई है. दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने इस मामले में सक्रियता दिखाते हुए प्रकाशक पेंगुइन रैंडम हाउस को नोटिस भेजा है और डिजिटल लीक की गुत्थी सुलझाने के लिए जांच शुरू कर दी है.
मामला इसलिए और संवेदनशील हो गया है क्योंकि किताब में सेना और चीन सीमा से जुड़े अहम मुद्दों का जिक्र बताया जा रहा है. विपक्ष द्वारा संसद में इस किताब के अंशों का हवाला दिए जाने के बाद सवाल और तीखे हो गए हैं जब किताब आधिकारिक रूप से प्रकाशित ही नहीं हुई, तो उसका कंटेंट सार्वजनिक डोमेन तक कैसे पहुंचा?
पब्लिकेशन हाउस का ‘इनसाइडर’ कौन?
स्पेशल सेल की जांच का सबसे अहम बिंदु यह है कि क्या पेंगुइन के भीतर से किसी ‘इनसाइडर’ ने मसौदा लीक किया? पुलिस यह खंगाल रही है कि एडिटिंग, टाइपसेटिंग, डिजाइन या डिजिटल मार्केटिंगकिस स्तर से टाइप-सेट पीडीएफ कॉपी बाहर आई. सूत्रों के मुताबिक, जांच एजेंसियां उन कर्मचारियों और फ्रीलांसरों की सूची भी मांग सकती हैं, जिन्हें किताब के डिजिटल ड्राफ्ट तक एक्सेस था. साथ ही यह भी देखा जा रहा है कि क्या किसी बाहरी तत्व के साथ मिलकर कंटेंट साझा किया गया.
डिजिटल एक्सेस और सर्वर सिक्योरिटी पर सवाल
दिल्ली पुलिस इस पहलू पर भी गंभीरता से पड़ताल कर रही है कि जब किताब का आधिकारिक प्रकाशन नहीं हुआ था, तब उसकी पीडीएफ कॉपी सर्वर पर किन-किन विभागों के पास उपलब्ध थी.
संभावना है कि पुलिस यह पूछे-
- कितने यूजर्स को ड्राफ्ट का एक्सेस था?
- क्या एक्सेस लॉग सुरक्षित रखे गए थे?
- क्या किसी संदिग्ध लॉगिन या डेटा ट्रांसफर का रिकॉर्ड मिला?
- डिजिटल फॉरेंसिक टीम सर्वर गतिविधियों और डेटा ट्रेल की भी जांच कर सकती है.
क्या था सुरक्षा प्रोटोकॉल?
इतने संवेदनशील सैन्य विषय से जुड़ी किताब के लिए क्या विशेष साइबर सिक्योरिटी ऑडिट कराया गया था? पुलिस यह भी जानना चाहती है कि प्रकाशक को पहली बार लीक की जानकारी कब मिली और क्या उन्होंने तुरंत सुरक्षा एजेंसियों को सूचित किया. यदि सूचना दी गई थी, तो किस एजेंसी को और कब? इन सवालों के जवाब जांच की दिशा तय करेंगे.
तीसरे पक्ष की भूमिका भी जांच के घेरे में
जांच एजेंसियां यह भी देख रही हैं कि क्या किताब का मसौदा किसी विदेशी प्रिंटिंग प्रेस, ई-बुक प्लेटफॉर्म या बाहरी एजेंसी के साथ साझा किया गया था. यदि ऐसा हुआ, तो डेटा ट्रांसफर की शर्तें और सुरक्षा उपाय क्या थे? किसी अंतरराष्ट्रीय सर्वर या क्लाउड प्लेटफॉर्म से लीक की आशंका को भी खारिज नहीं किया गया है.
Four Stars of Destiny का विवाद संसद तक पहुंचा
अप्रकाशित किताब ‘Four Stars of Destiny’ का मुद्दा संसद तक पहुंच चुका है. कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने संसद में इस किताब के अंशों का हवाला दिया, जिस पर सत्ता पक्ष ने आपत्ति जताई. हंगामे के बीच यह सवाल और तेज हो गया कि जब किताब को आधिकारिक मंजूरी नहीं मिली और वह प्रकाशित नहीं हुई, तो उसके अंश सार्वजनिक कैसे हुए? पेंगुइन रैंडम हाउस ने सफाई देते हुए कहा है कि किताब प्रकाशित नहीं हुई है और जो कॉपी प्रसारित हो रही है वह कॉपीराइट का उल्लंघन है. वहीं, जनरल नरवणे ने भी अपना पक्ष स्पष्ट किया है.
राजनीतिक और सुरक्षा आयाम
मामले ने राजनीतिक रंग भी ले लिया है. विपक्ष जहां सरकार से जवाब मांग रहा है, वहीं सुरक्षा एजेंसियां इस लीक को संभावित राष्ट्रीय सुरक्षा जोखिम के रूप में देख रही हैं. क्योंकि यदि संवेदनशील सैन्य जानकारी बिना अनुमति सार्वजनिक हुई है, तो यह सिर्फ कॉपीराइट का मामला नहीं, बल्कि सुरक्षा चूक का गंभीर संकेत भी हो सकता है.
Four Stars of Destiny मामले में आगे क्या?
स्पेशल सेल की जांच अब इस दिशा में बढ़ेगी कि डेटा लीक की वास्तविक कड़ी कहां टूटी? क्या यह आंतरिक लापरवाही थी या सुनियोजित साजिश? और क्या भविष्य में ऐसे मामलों को रोकने के लिए पब्लिकेशन इंडस्ट्री में नए सुरक्षा मानक लागू किए जाएंगे? जब तक जांच पूरी नहीं होती, यह मामला सियासी और सुरक्षा दोनों मोर्चों पर चर्चा का केंद्र बना रहेगा.



